
F-15E गिरने के बाद शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की सेना को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में एक खतरनाक रेस्क्यू मिशन के दौरान दो अमेरिकी हेलिकॉप्टरों पर हमला किया गया। यह ऑपरेशन उस समय शुरू किया गया था जब अमेरिकी एयरफोर्स का एक अत्याधुनिक F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान ईरानी क्षेत्र में गिर गया था।
सूत्रों के अनुसार, विमान के गिरने के बाद उसमें सवार दो क्रू मेंबर्स ने इजेक्ट कर अपनी जान बचाई थी। इसके बाद तुरंत सर्च एंड रेस्क्यू मिशन शुरू किया गया। इसी मिशन के तहत UH-60 ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर समेत दो हेलिकॉप्टर पायलटों की तलाश में भेजे गए थे। यह ऑपरेशन बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा था क्योंकि यह सीधे ईरानी क्षेत्र के भीतर चल रहा था।
रेस्क्यू टीम पर हमला, बाल-बाल बचे हेलिकॉप्टर
अमेरिकी मीडिया संस्थान ‘The Hill’ के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, जैसे ही रेस्क्यू हेलिकॉप्टर ऑपरेशन क्षेत्र में पहुंचे, उन पर ईरानी बलों द्वारा फायरिंग की गई। इस हमले में दोनों हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन पायलटों की सूझबूझ के चलते वे किसी तरह सुरक्षित क्षेत्र तक लौटने में सफल रहे।
हालांकि, इस घटना ने अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन की सुरक्षा और रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि हमले के दौरान हेलिकॉप्टरों को काफी नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी बड़े जनहानि की खबर नहीं है।
इस घटनाक्रम के बाद पेंटागन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है और मामले की जानकारी अमेरिकी संसद की हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी को भी दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मिशन अभी भी जारी है और लापता पायलट को ढूंढने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
एक पायलट सुरक्षित, दूसरे की तलाश जारी
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, गिराए गए F-15E विमान के दो क्रू मेंबर्स में से एक को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाल लिया गया है। लेकिन दूसरा पायलट अब भी लापता है, जिसकी तलाश लगातार जारी है।
लापता पायलट की स्थिति को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। आशंका जताई जा रही है कि वह या तो किसी सुरक्षित स्थान पर छिपा हो सकता है या फिर ईरानी बलों की गिरफ्त में भी हो सकता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी सेना के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि किसी भी सैनिक का दुश्मन क्षेत्र में लापता होना बेहद संवेदनशील मामला होता है। यही वजह है कि अमेरिका इस मिशन को हर हाल में सफल बनाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान का दावा और बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी लड़ाकू विमान को मार गिराया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने विमान के मलबे की तस्वीरें भी जारी की हैं, जिनमें इसे F-15 फाइटर जेट बताया जा रहा है। हालांकि, इन तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ ने इस घटना पर तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका बार-बार अपनी सैन्य ताकत का दावा करता है, लेकिन अब उसे अपने ही पायलटों को खोजने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मिडिल ईस्ट में हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को और भड़का सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनाव चरम पर है, और इस तरह की घटनाएं किसी बड़े सैन्य टकराव का कारण बन सकती हैं।
फिलहाल, संयुक्त राज्य अमेरिका अपने लापता पायलट को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार ऑपरेशन चला रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि अमेरिका इस चुनौती से कैसे निपटता है और क्या यह मामला किसी बड़े संघर्ष में बदलता है या नहीं।



