
नई दिल्ली/नगांव: पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार असम के लिए आज का दिन ऐतिहासिक स्वर्णाक्षरों में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के नगांव जिले के कालियाबोर में काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर (Kaziranga Elevated Corridor) परियोजना का भव्य भूमि पूजन किया। लगभग 6,950 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाला यह प्रोजेक्ट न केवल असम के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन का एक अनुकरणीय उदाहरण भी बनेगा।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह कॉरिडोर ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और पूर्वोत्तर के सतत विकास के प्रति केंद्र सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
दुनिया का सबसे लंबा ‘वाइल्डलाइफ फ्रेंडली’ कॉरिडोर
काजीरंगा नेशनल पार्क, जो एक सींग वाले गैंडों के लिए विश्व प्रसिद्ध है, हर साल मानसून के दौरान एक बड़ी चुनौती का सामना करता है। बाढ़ के समय वन्यजीव ऊंचे स्थानों (कार्बी आंगलोंग पहाड़ियों) की ओर जाने के लिए मौजूदा हाईवे को पार करते हैं, जिसमें अक्सर वे सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं।
इस समस्या का स्थायी समाधान है—काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर। 86 किलोमीटर लंबे इस पूरे प्रोजेक्ट में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 35 किलोमीटर का एलिवेटेड सेक्शन है। यह हिस्सा जमीन से ऊपर पिलर्स पर बनाया जाएगा, जिससे सड़क के नीचे से वन्यजीव बिना किसी बाधा और खतरे के अपनी प्राकृतिक आवाजाही कर सकेंगे।
प्रोजेक्ट की तकनीकी रूपरेखा: एक नजर में
यह प्रोजेक्ट सामरिक और पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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कुल लंबाई: 86 किलोमीटर।
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एलिवेटेड सेक्शन: 35 किलोमीटर (विशेष रूप से वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए)।
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लेन विस्तार: एनएच-715 (NH-715) को वर्तमान दो लेन से बढ़ाकर चार लेन (4-Lane) किया जाएगा।
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नया बाईपास: परियोजना के तहत 21 किलोमीटर का नया बाईपास बनाया जाएगा, जो स्थानीय शहरों में ट्रैफिक के दबाव को कम करेगा।
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लागत: ₹6,950 करोड़ से अधिक।
वन्यजीव संरक्षण और सड़क सुरक्षा का समन्वय
विशेषज्ञों का मानना है कि काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर भारत के सबसे पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स में से एक है। वर्तमान में, काजीरंगा के पास से गुजरने वाले वाहनों की गति पर सख्त प्रतिबंध रहते हैं ताकि वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे। इस कॉरिडोर के बन जाने के बाद:
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निर्बाध यातायात: हाईवे पर चलने वाले वाहनों की गति और सुरक्षा में सुधार होगा।
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शून्य दुर्घटना: वन्यजीवों और वाहनों के बीच होने वाली टक्करों की संभावना समाप्त हो जाएगी।
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पारिस्थितिकी संतुलन: काजीरंगा नेशनल पार्क के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम हो जाएगा।
असम की आर्थिकी को मिलेगी नई रफ्तार
यह कॉरिडोर केवल जानवरों के लिए नहीं, बल्कि असम के लोगों के लिए भी समृद्धि का मार्ग है। बेहतर कनेक्टिविटी से ऊपरी असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच माल ढुलाई और पर्यटन को भारी बढ़ावा मिलेगा। कालियाबोर और आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पर्यटन के क्षेत्र में काजीरंगा की वैश्विक ब्रांडिंग और मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “जब इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होता है, तो उसका सबसे बड़ा लाभ मध्यम वर्ग और गरीबों को मिलता है। यह प्रोजेक्ट असम के युवाओं के लिए सुनहरे भविष्य का द्वार खोलेगा।”
चुनौतियां और भविष्य की राह
इतने बड़े पैमाने पर एलिवेटेड स्ट्रक्चर का निर्माण करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है, विशेषकर काजीरंगा जैसे बाढ़ संभावित क्षेत्र में। हालांकि, आधुनिक इंजीनियरिंग और ‘प्रोजेक्ट गतिशक्ति’ के तहत इसके समयबद्ध निष्पादन की योजना बनाई गई है। सरकार का लक्ष्य है कि इस कॉरिडोर को रिकॉर्ड समय में पूरा कर जनता और वन्यजीवों को समर्पित किया जाए।
प्रमुख विशेषताएं: एक नजर में
| विशेषता | विवरण |
| परियोजना का नाम | काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर |
| स्थान | नगांव (असम) |
| मुख्य हाईवे | एनएच-715 |
| उद्देश्य | वन्यजीव सुरक्षा और चार लेन कनेक्टिविटी |
| प्रभावित क्षेत्र | काजीरंगा नेशनल पार्क |
काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का भूमि पूजन इस बात का प्रमाण है कि विकास के लिए पर्यावरण की बलि देना अनिवार्य नहीं है। यह परियोजना ‘इकोलॉजी और इकोनॉमी’ के सह-अस्तित्व का एक नया भारतीय मॉडल पेश करती है। आने वाले वर्षों में, जब यात्री इस 35 किमी लंबे एलिवेटेड ब्रिज से गुजरेंगे, तो वे नीचे गैंडों और हाथियों को सुरक्षित घूमते देख सकेंगे—जो वाकई में नए भारत की एक सुखद तस्वीर होगी।



