नंद्याल (आंध्र प्रदेश)। आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली दुर्घटना सामने आई है। गुरुवार तड़के एक निजी बस और मोटरसाइकिलों से लदे कंटेनर के बीच हुई सीधी भिड़ंत में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहनों ने पलक झपकते ही आग पकड़ ली और देखते ही देखते वे लोहे के कंकाल में तब्दील हो गए। इस हादसे ने एक बार फिर रात के समय राजमार्गों पर दौड़ने वाली बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आधी रात का भयावह मंजर: टायर फटने से बिगड़ा संतुलन
मिली जानकारी के अनुसार, हादसा रात करीब 1:30 बजे हुआ। एक निजी ट्रैवल्स की बस नेलोर से हैदराबाद की ओर जा रही थी। चश्मदीदों के मुताबिक, हाईवे पर तेज गति से दौड़ रही बस का दाहिना टायर अचानक जोरदार धमाके के साथ फट गया। टायर फटते ही बस अनियंत्रित हो गई और चालक उस पर से अपना संतुलन खो बैठा। अनियंत्रित बस डिवाइडर को फांदते हुए विपरीत दिशा से आ रही एक कंटेनर लॉरी से जा टकराई।
यह टक्कर इतनी भीषण थी कि कंटेनर और बस के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए। टक्कर के कुछ ही सेकंड के भीतर शॉर्ट सर्किट या घर्षण के कारण ईंधन टैंक में रिसाव हुआ और दोनों वाहनों में भीषण आग लग गई।
देवदूत बने स्थानीय लोग: 36 जिंदगियों को मौत के मुंह से निकाला
जिस समय यह हादसा हुआ, बस में सवार अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। आग की लपटें उठते ही बस के भीतर चीख-पुकार मच गई। हालांकि, इस त्रासदी के बीच मानवीय साहस की एक बड़ी मिसाल देखने को मिली। धमाके की आवाज सुनकर पास के गांवों के लोग और हाईवे पर मौजूद अन्य राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे।
स्थानीय निवासियों ने बस के क्लीनर और कंडक्टर के साथ मिलकर तत्परता दिखाई। उन्होंने बस की खिड़कियों के शीशे तोड़कर अंदर फंसे 36 यात्रियों को एक-एक कर बाहर निकाला। स्थानीय लोगों की इस सूझबूझ और बहादुरी के कारण बस में सवार सभी 36 यात्री समय रहते बाहर आ गए, जिससे एक बहुत बड़ा नरसंहार टल गया। बताया जा रहा है कि इनमें से चार यात्रियों को गंभीर फ्रैक्चर आए हैं, जिन्हें तुरंत नंद्याल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
दो चालकों की मौके पर ही मौत
इस हादसे में बस चालक और कंटेनर लॉरी के चालक की किस्मत ने साथ नहीं दिया। टक्कर के बाद दोनों अपने-अपने केबिन में बुरी तरह फंस गए थे। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उन्हें बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला। गंभीर चोटों और आग में झुलसने के कारण दोनों चालकों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने क्रेन की मदद से शवों को बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया है।
घंटों तक दहकता रहा हाईवे, यातायात रहा ठप
हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। चूंकि कंटेनर में नई मोटरसाइकिलें लदी हुई थीं, इसलिए आग ने विकराल रूप ले लिया था। फायर टेंडरों को आग पर पूरी तरह काबू पाने में कई घंटों की मशक्कत करनी पड़ी। इस दौरान हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह बाधित रहा। सुबह करीब 6 बजे के बाद क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात बहाल किया जा सका।
पुलिस की शुरुआती जांच और तकनीकी खामी
मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि दुर्घटना का मुख्य कारण बस का टायर फटना ही था। अधिकारियों का कहना है कि टायर फटने के बाद बस की गति इतनी अधिक थी कि वह डिवाइडर को पार कर दूसरी तरफ चली गई। पुलिस अब बस के रखरखाव रिकॉर्ड और टायर की गुणवत्ता की जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि क्या इसमें बस मालिक की लापरवाही थी।
सुरक्षा पर सवाल: बार-बार क्यों हो रहे हैं ऐसे हादसे?
यह हादसा कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में आंध्र प्रदेश के ही कर्नूल जिले में एक बस में आग लगने से 20 यात्रियों की मौत हो गई थी। बार-बार हो रहे ये हादसे कुछ कड़वे सवाल खड़े करते हैं:
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क्या लंबी दूरी की बसों का नियमित तकनीकी परीक्षण (Fitness Test) सही तरीके से किया जा रहा है?
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क्या रात के समय बस चालकों की गति सीमा पर अंकुश लगाने के लिए कोई प्रभावी तंत्र है?
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क्या निजी बस ऑपरेटर पुराने या खराब हो चुके टायरों का इस्तेमाल कर यात्रियों की जान जोखिम में डाल रहे हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों और रात के समय सड़क के घर्षण से टायर गर्म होकर फट जाते हैं, ऐसे में अच्छी गुणवत्ता वाले टायरों का होना अनिवार्य है।
नंद्याल की यह घटना हमें याद दिलाती है कि सड़क पर एक छोटी सी तकनीकी चूक कितनी बड़ी तबाही ला सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह निजी परिवहन सेवाओं के लिए कड़े सुरक्षा मानक तय करे ताकि भविष्य में किसी निर्दोष की जान न जाए।


