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पहाड़ में ‘देवदूत’ बनी एयर एंबुलेंस: रुद्रप्रयाग में स्कूल में ड्यूटी के दौरान शिक्षक को आया ब्रेन स्ट्रोक, DM की तत्परता से बचाई गई जान

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के सीमावर्ती और पर्वतीय जिलों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की अहमियत एक बार फिर धरातल पर दिखाई दी है। जनपद रुद्रप्रयाग के विकासखंड अगस्त्यमुनि के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज (GIC) बीना में उस समय हड़कंप मच गया, जब विद्यालय में कार्यरत प्रवक्ता प्रभाकर थपलियाल की तबीयत अचानक कार्य के दौरान बिगड़ गई। आनन-फानन में उन्हें जिला अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें ‘ब्रेन स्ट्रोक’ की पुष्टि की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल एयर एंबुलेंस की व्यवस्था कराई, जिससे मरीज को समय रहते एम्स ऋषिकेश पहुँचाया जा सका।

स्कूल में अचानक बिगड़ी तबीयत, सहकर्मियों में मचा हड़कंप

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 9 बजे राजकीय इंटर कॉलेज बीना में शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही थीं। प्रवक्ता प्रभाकर थपलियाल अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे कि अचानक उन्हें तेज सिरदर्द और बेचैनी महसूस हुई। कुछ ही क्षणों में उनकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वे अचेत होने लगे।

विद्यालय प्रशासन और साथी शिक्षकों ने बिना समय गंवाए सक्रियता दिखाई। उन्हें तत्काल निजी वाहन से जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग लाया गया। अस्पताल में प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि थपलियाल को ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) आया है। उनकी गिरती सेहत और मस्तिष्क की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेषज्ञों ने उन्हें तुरंत हायर सेंटर (उच्च उपचार केंद्र) रेफर करने की सलाह दी।

प्रशासनिक तत्परता: जिलाधिकारी ने पेश की मिसाल

जैसे ही इस घटना की सूचना रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी प्रतिक जैन को मिली, उन्होंने स्थिति का संज्ञान लेते हुए इसे ‘गोल्डन ऑवर’ की आपात स्थिति माना। चिकित्सा जगत में ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। जिलाधिकारी ने तत्काल शासन और नागरिक उड्डयन विभाग से संपर्क साधा और एयर एंबुलेंस (Air Ambulance) की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई का ही परिणाम था कि कागजी औपचारिकताएं न्यूनतम समय में पूरी की गईं और एयर एंबुलेंस रुद्रप्रयाग पहुंची। जिला अस्पताल से एंबुलेंस के जरिए मरीज को हेलीपैड तक लाया गया और वहां से उन्हें सुरक्षित तरीके से एम्स ऋषिकेश के लिए एयरलिफ्ट किया गया।

जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मिला सहयोग

मरीज के परिजन उपेंद्र सती ने बताया कि यह एक कठिन समय था। स्कूल परिसर में ही स्ट्रोक आने के बाद त्वरित सहायता की आवश्यकता थी। उन्होंने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता कुलदीप राणा आजाद और क्षेत्रीय विधायक आशा नौटियाल ने इस संकट की घड़ी में सेतु का काम किया। विधायक नौटियाल ने शासन स्तर पर निरंतर समन्वय बनाए रखा, जिससे हवाई सेवा की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकी।

AIIMS ऋषिकेश में उपचार जारी

वर्तमान में प्रभाकर थपलियाल एम्स ऋषिकेश के न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञों की निगरानी में हैं। बताया जा रहा है कि एयर एंबुलेंस के कारण उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में लगने वाले 5 से 6 घंटे के सड़क मार्ग के समय को घटाकर महज कुछ मिनटों में बदल दिया गया। समय पर उपचार मिलने से उनकी स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

उत्तराखंड की एयर एंबुलेंस सेवा: पहाड़ के लिए वरदान

यह घटना उत्तराखंड सरकार की एयर एंबुलेंस सेवा की उपयोगिता को सिद्ध करती है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस राज्य में सड़क मार्ग से देहरादून या ऋषिकेश पहुंचना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है।

  • त्वरित रिस्पॉन्स: 9 बजे सूचना मिलने के कुछ ही घंटों के भीतर मरीज को हायर सेंटर शिफ्ट कर दिया गया।

  • जीवन रक्षा: ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसे मामलों में यह सेवा ‘संजीवनी’ साबित हो रही है।

  • आभार: शिक्षक के परिजनों और स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार और जिला प्रशासन के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है।

रुद्रप्रयाग की यह घटना न केवल प्रशासनिक तत्परता का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि तंत्र संवेदनशील हो, तो बहुमूल्य जीवन को बचाया जा सकता है। प्रभाकर थपलियाल के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए पूरा विद्यालय परिवार और स्थानीय लोग प्रार्थना कर रहे हैं।

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