
देहरादून: शासन और प्रशासन का अर्थ केवल फाइलें निपटाना और नियम बनाना ही नहीं होता, बल्कि समाज के उस अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की पीड़ा को समझना भी होता है जो मुख्यधारा से कट चुका है। देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने एक बार फिर अपनी कार्यशैली से यह सिद्ध कर दिया है कि एक संवेदनशील प्रशासनिक पहल कैसे किसी के जीवन में आशा की किरण जगा सकती है।
गुरुवार, 26 फरवरी 2026 को देहरादून स्थित राजकीय महिला कल्याण एवं पुनर्वास केंद्र (नारी निकेतन) की संवासनियों के लिए दिन की शुरुआत कुछ अलग और बेहद खास रही। जिलाधिकारी के निर्देशों पर जिला प्रशासन ने इन महिलाओं को चारदीवारी के मौन से बाहर निकाल कर शहर के सिटी पार्क की हरियाली और खुले आसमान के बीच एक यादगार भ्रमण कराया।
चारदीवारी से खुले आसमान तक: मुस्कुराहटों का सफर
नारी निकेतन में निवासरत महिलाएं अक्सर एक सीमित दायरे और एकाकीपन में अपना जीवन बिताती हैं। लंबे समय बाद जब ये महिलाएं सिटी पार्क के प्राकृतिक सौंदर्य और हरियाली के बीच पहुँचीं, तो उनके चेहरों पर एक अनूठा संतोष और आत्मविश्वास नजर आया। प्रशासन की इस मानवीय पहल का मुख्य उद्देश्य इन महिलाओं के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना था।
पार्क के खुले वातावरण में संवासनियों ने न केवल टहलकर प्रकृति का आनंद लिया, बल्कि सामूहिक रूप से डांस और अन्य मनोरंजक गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। संगीत की धुन पर थिरकते हुए इन महिलाओं की खुशी यह बताने के लिए काफी थी कि बाहरी दुनिया से यह सकारात्मक जुड़ाव उनके पुनर्वास के लिए कितना आवश्यक है।
प्रकृति के सानिध्य में भोजन और आत्मीय संवाद
भ्रमण को और अधिक विशेष बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा संवासनियों के लिए सिटी पार्क में ही दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई थी। एक साथ बैठकर धूप और हरियाली के बीच भोजन करते समय इन महिलाओं ने आपस में और उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आत्मीय संवाद किया।
इस दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट और अधीक्षिका सोनल राणा सहित अन्य कर्मचारियों ने महिलाओं की व्यक्तिगत समस्याओं, उनकी आवश्यकताओं और भविष्य के सुझावों पर भी चर्चा की। अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि प्रशासन उन्हें केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि एक सामान्य और सम्मानजनक जीवन जीने के हर संभव अवसर प्रदान करेगा।

“पुनर्वास केवल सुरक्षा नहीं, सम्मानजनक जीवन है”: डीएम सविन बंसल
इस पहल पर अपने विचार साझा करते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा, “समाज के संवेदनशील और कमजोर वर्गों के प्रति प्रशासन की जिम्मेदारी केवल उन्हें छत मुहैया कराने तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास है कि उन्हें एक स्वस्थ, सकारात्मक और सम्मानजनक वातावरण मिले। बाहरी दुनिया से यह संपर्क उनमें आत्मबल और नई आशा जगाएगा, जो उनके सामाजिक पुनर्स्थापन (Social Reintegration) के लिए बेहद जरूरी है।”
जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि भविष्य में भी समय-समय पर ऐसे आउटडोर कार्यक्रमों और मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया जाता रहेगा ताकि नारी निकेतन की संवासनियां मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस न करें।
पुनर्वास प्रक्रिया में ‘मानसिक स्वास्थ्य’ का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि जो महिलाएं कठिन परिस्थितियों से गुजरकर पुनर्वास केंद्रों तक पहुँचती हैं, उनके लिए प्राकृतिक वातावरण और सामाजिक मेलजोल एक ‘थेरेपी’ की तरह काम करता है। देहरादून जिला प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम से नारी निकेतन के आंतरिक वातावरण में भी एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। जब ये महिलाएं खुशी और उत्साह के साथ केंद्र वापस लौटती हैं, तो वहाँ का माहौल अधिक सहयोगात्मक और सकारात्मक बनता है।
प्रशासनिक टीम की उपस्थिति
इस पूरे भ्रमण कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में जिला प्रोबेशन कार्यालय की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मौके पर जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, नारी निकेतन की अधीक्षिका सोनल राणा और सुरक्षा कर्मियों सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहा। सभी ने संवासनियों के साथ एक परिवार की तरह समय बिताया, जिससे प्रशासन और जनता के बीच की दूरी भी कम होती नजर आई।
एक अनुकरणीय उदाहरण
देहरादून जिला प्रशासन की इस संवदेनशील पहल ने एक मिसाल कायम की है। ‘Bugyal News’ की ओर से ऐसी पहल का स्वागत है, क्योंकि जब प्रशासन संवदेना के साथ सक्रिय होता है, तो समाज के सबसे उपेक्षित कोनों में भी मुस्कान लौट आती है। सिटी पार्क में बिताए गए ये कुछ घंटे शायद इन संवासनियों के लिए जीवन भर की मीठी याद बन गए हैं।



