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देहरादून में बेलगाम रोड कटिंग पर ‘फुल स्टॉप’: मंत्री सुबोध उनियाल ने दिए विधिक एक्शन और भारी जुर्माने के निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की सड़कों पर चलने वाले राहगीरों और वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। शहर में बेतरतीब ढंग से हो रही रोड कटिंग और उसके बाद सड़कों को बदहाल छोड़ने वाली कार्यदायी संस्थाओं पर अब सरकार का डंडा चलने वाला है। शुक्रवार को देहरादून के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल ने स्पष्ट कर दिया है कि रोड कटिंग मानकों के उल्लंघन को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी एजेंसियों के खिलाफ सीधे मुकदमा (FIR) दर्ज किया जाएगा।

मंथन सभागार में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री उनियाल ने अधिकारियों को दो-टूक लहजे में कहा कि जनमानस की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाली एजेंसियों पर ‘भारी अर्थदंड’ रोपित किया जाए और इसकी वसूली आरसी (Recovery Certificate) के माध्यम से की जाए।

अप्रैल तक ‘डेडलाइन’: अधूरी सड़कों का जाल होगा साफ

बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री ने सभी कार्यदायी संस्थाओं—लोनिवि (PWD), यूपीसीएल, पिटकुल, जल संस्थान, पेयजल निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड को अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि अप्रैल 2026 तक शहर में संचालित सभी निर्माण कार्यों को हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए।

प्रभारी मंत्री ने कहा, “बार-बार सड़क खोदने की परंपरा अब बंद होनी चाहिए। सभी विभाग आपसी समन्वय और एक ‘इंटीग्रेटेड प्लान’ (एकीकृत योजना) के साथ कार्य करें। ऐसा न हो कि एक विभाग सड़क बनाए और दूसरा उसे पाइपलाइन के लिए फिर से खोद दे।”

जेई (JE) की मौजूदगी अनिवार्य, लापरवाही पर कटेगा चालान

अक्सर देखा जाता है कि निर्माण स्थलों पर केवल मजदूर और ठेकेदार मौजूद होते हैं, जिससे कार्य की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए मंत्री ने निर्देश दिया कि निर्माण साइटों पर जूनियर इंजीनियर (JE) का सुपरविजन अनिवार्य होगा।

मंत्री सुबोध उनियाल के प्रमुख निर्देश:

  • शपथ पत्र की अनिवार्यता: अब किसी भी एजेंसी को रोड कटिंग की अनुमति तभी मिलेगी जब वह शर्तों के पालन और समयावधि में कार्य पूर्ण करने का शपथ पत्र देगी।

  • सुरक्षा मानक: बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक और रिफ्लेक्टर की कमी पाए जाने पर तत्काल विधिक कार्रवाई होगी।

  • सड़क की ‘राइडिंग क्वालिटी’: पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़क को निर्धारित मानकों के अनुसार कंप्रेस (दबाया) किया जाए, ताकि सड़क धंसे नहीं।

गैस पाइपलाइन और अंडरग्राउंड केबलिंग पर अपडेट

बैठक में ‘गैल गैस लिमिटेड’ के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि शहर में 65 हजार किमी का नेटवर्क बिछाया जा रहा है। शुरुआती चरण में 38 हजार घरों को पीएनजी (PNG) कनेक्शन से जोड़ना है, जिसमें से 2500 घरों को जोड़ा जा चुका है। प्रभारी मंत्री ने गैस पाइपलाइन, विद्युत लाइन अंडरग्राउंड करने (UPCL-ADB) और सीवर लाइन के कार्यों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने जोर दिया कि जनता को धूल और गड्ढों से जल्द से जल्द मुक्ति मिलनी चाहिए।

जिला प्रशासन का कड़ा रुख: पुरानी सभी अनुमतियां निरस्त

बैठक में यह तथ्य सामने आया कि सक्षम अधिकारियों द्वारा नियमित निगरानी के अभाव में शहर में अव्यवस्था फैली है। जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि वर्तमान में जिला प्रशासन ने शहर में निर्माण कार्यों हेतु पूर्व में जारी सभी अनुमतियां निरस्त कर दी हैं। अब नई अनुमति केवल सख्त शर्तों और शपथ पत्र के आधार पर ही दी जाएगी।

जिलाधिकारी ने मंत्री को आश्वस्त किया कि मानकों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ अब सीधे मुकदमा दर्ज कर भारी पेनल्टी लगाई जाएगी।

जनता की सुरक्षा ‘सर्वोपरि’

बैठक में विधायक खजानदास (राजपुर), उमेश शर्मा ‘काऊ’ (रायपुर) और सविता कपूर (कैंट) ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में सड़कों की बदहाली का मुद्दा उठाया। विधायकों ने कहा कि निर्माण एजेंसियों की लापरवाही से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। मंत्री ने निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में कानून व्यवस्था और जन सुरक्षा प्रभावित करने वाली कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी: बैठक में अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्युष सिंह, उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी, अधीक्षण अभियंता लोनिवि ओपी सिंह सहित यूपीसीएल, जल निगम और अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

देहरादून में रोड कटिंग मानकों का उल्लंघन अब निर्माण एजेंसियों को महंगा पड़ने वाला है। प्रभारी मंत्री के सख्त तेवर और प्रशासन की ओर से ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति यह संकेत देती है कि इस साल चारधाम यात्रा और मानसून से पहले देहरादून की सड़कों की सूरत बदल सकती है। अब दारोमदार जूनियर इंजीनियरों और विभागीय निगरानी पर है कि वे मुख्यमंत्री और प्रभारी मंत्री के निर्देशों को धरातल पर कैसे उतारते हैं।

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