राज्य स्थापना दिवस पर परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम को लेकर गरमाई सियासत, कांग्रेस ने भीड़ जुटाने में नाकाम रहने का लगाया आरोप; अंकिता भंडारी हत्याकांड से लेकर SIR और कथित वोट धांधली तक के मुद्दों पर बीजेपी को घेरा
देहरादून। उत्तराखंड में राज्य स्थापना दिवस के कार्यक्रम के बाद सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के देहरादून दौरे और परेड ग्राउंड में आयोजित जनसभा को लेकर कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने बीजेपी के इस कार्यक्रम को ‘फ्लॉप शो’ करार देते हुए दावा किया है कि तमाम तैयारियों और ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा सम्मानजनक संख्या में लोगों को जनसभा तक नहीं जुटा सकी। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने इस आयोजन को लेकर भाजपा की कार्यशैली पर सवाल उठाए और कहा कि प्रदेश की जनता अब पिछले दस वर्षों के भाजपा शासन से परेशान हो चुकी है और बदलाव चाहती है।
कांग्रेस का कहना है कि अमित शाह जैसे बड़े केंद्रीय नेता के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी थी, लेकिन इसके बावजूद जनसभा में अपेक्षित भीड़ नहीं दिखाई दी। धस्माना ने दावा किया कि कार्यक्रम में कम लोगों की मौजूदगी प्रदेश की जनता के बदलते राजनीतिक रुख का संकेत है। उन्होंने भाजपा पर चुनावी जुमलों और दावों के सहारे जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आने वाले समय में प्रदेश की जनता भाजपा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने का मन बना चुकी है।
त्योहार के दिन व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने का आरोप
कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के कारण राजधानी के व्यापारियों को हुई कथित परेशानी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि त्योहार के दिन व्यापारियों को कारोबार करने का महत्वपूर्ण अवसर मिलता है। पहले से ही मंदी और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे व्यापारी इस दिन कुछ बेहतर कारोबार की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन भाजपा के कार्यक्रम और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के कारण उनका पूरे दिन का काम प्रभावित हुआ।
धस्माना ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के चलते शहर में यातायात और अन्य व्यवस्थाओं पर असर पड़ा, जिससे आम लोगों के साथ-साथ व्यापारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना था कि सरकार को किसी बड़े आयोजन की व्यवस्था करते समय स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों की सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए था।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश के छोटे व्यापारी आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं, तब सरकार को ऐसे आयोजनों की योजना इस तरह बनानी चाहिए कि आम जनता और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर भी बीजेपी को घेरा
अमित शाह की जनसभा में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटने के पीछे कांग्रेस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड को भी एक प्रमुख कारण बताया। सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि प्रदेश की जनता आज भी अंकिता भंडारी को पूर्ण न्याय दिलाने की मांग कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता के माता-पिता लगातार न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।
धस्माना ने इस प्रकरण में सामने आए कथित वीआईपी के मुद्दे को उठाते हुए भाजपा सरकार पर उसे बचाने के लिए कानूनी संरक्षण देने का आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना है कि जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सभी सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता और पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, तब तक प्रदेश की जनता के मन में सवाल बने रहेंगे।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को प्रदेश की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि जनता केवल भाषण और बड़े आयोजनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है, बल्कि वह सरकार से जवाबदेही चाहती है।
अमित शाह के ‘हैट्रिक’ वाले बयान पर कांग्रेस का पलटवार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने उत्तराखंड दौरे के दौरान भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनाने यानी हैट्रिक लगाने का विश्वास जताया था। उनके इस राजनीतिक दावे पर भी कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
सूर्यकांत धस्माना ने अमित शाह के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा को उत्तराखंड में हैट्रिक लगाने के सपने देखने के बजाय प्रदेश से अपनी विदाई की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता पिछले दस वर्षों के शासन से परेशान है और अब भाजपा को सत्ता में बनाए रखने के पक्ष में नहीं है।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में बेरोजगारी, महंगाई, व्यापारियों की समस्याओं और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार अपेक्षित परिणाम देने में नाकाम रही है। ऐसे में केवल बड़े नेताओं की रैलियों और राजनीतिक घोषणाओं से जनता का विश्वास दोबारा हासिल करना आसान नहीं होगा।
SIR और वोटों की कथित धांधली पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने अमित शाह के कार्यक्रम को लेकर भाजपा पर हमला करने के साथ ही SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप है कि देशभर में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
धस्माना ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देशभर में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोटों में धांधली को लेकर सवाल उठाए हैं, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब चुनाव आयोग से सवाल पूछे जाते हैं, तो जवाब देने की जिम्मेदारी भाजपा के नेता उठा रहे हैं।
कांग्रेस ने दावा किया कि देशभर में करीब 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने की आशंका और आरोप सामने आए हैं। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर मुद्दा बताते हुए चुनाव आयोग से पारदर्शिता बरतने और सभी सवालों का जवाब देने की मांग की।
हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटने और मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने को लेकर कांग्रेस के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि आवश्यक है। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया और आधिकारिक आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे।
अमित शाह ने भी कांग्रेस पर साधा था निशाना
गौरतलब है कि राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर देहरादून पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने भाजपा सरकार की उपलब्धियों और उत्तराखंड के विकास से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए प्रदेश में पार्टी की राजनीतिक मजबूती का संदेश दिया।
अमित शाह के दौरे के दौरान उत्तराखंड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर प्रदान करने का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस आयोजन को राज्य और पुलिस विभाग के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया।
एक तरफ भाजपा अमित शाह के दौरे और कार्यक्रम को अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक ताकत के प्रदर्शन के रूप में देख रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने इसी आयोजन को निशाने पर लेकर भाजपा की लोकप्रियता और सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं।
उत्तराखंड में तेज हुई सियासी बयानबाजी, 2027 के चुनावों पर नजर
अमित शाह के दौरे के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस जहां अंकिता भंडारी हत्याकांड, महंगाई, व्यापारियों की समस्याओं और SIR जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रही है, वहीं भाजपा अपने विकास कार्यों और राजनीतिक उपलब्धियों के जरिए जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है।
उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राज्य स्थापना दिवस जैसे बड़े आयोजनों और केंद्रीय नेताओं के दौरों को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस के इस हमले को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
फिलहाल, अमित शाह की रैली को लेकर कांग्रेस के ‘फ्लॉप शो’ वाले बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि भाजपा कांग्रेस के इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और आगामी चुनावों में जनता किसके दावों पर भरोसा जताती है।
