असम से देहरादून पहुंची महिला ने प्रेस क्लब में सुनाई आपबीती, 2003 में नाबालिग होने का दावा करते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री पर लगाए गंभीर आरोप; बेटे को पिता का नाम और न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री धामी से लगाई गुहार
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर करीब 23 साल पुराना मामला सुर्खियों में आ गया है। वर्ष 2003 के कथित नाबालिग दुष्कर्म प्रकरण को लेकर असम से देहरादून पहुंची एक महिला ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की है। महिला ने देहरादून प्रेस क्लब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक (DGP) से मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और DNA टेस्ट करवाने की मांग उठाई। महिला का कहना है कि वह अपने बेटे को न्याय दिलाने और उसे उसके पिता का नाम दिलाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही है। अब वह चाहती है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और सच्चाई सबके सामने आए।
महिला के देहरादून पहुंचने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में इस पुराने प्रकरण को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। खास बात यह है कि महिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी सीधे हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जिस तरह मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय दिलाने का भरोसा दिया था, उसी तरह उनके मामले में भी न्याय सुनिश्चित किया जाए। महिला ने स्पष्ट किया कि वह असम वापस लौट जाएंगी, लेकिन जब तक उनके बेटे को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
असम से देहरादून पहुंची महिला, प्रेस क्लब में बताई अपनी आपबीती
देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला ने कहा कि वह केवल अपनी बात रखने और मामले में न्याय की मांग करने के लिए उत्तराखंड आई हैं। उनका कहना है कि वह यहां लंबे समय तक नहीं रुक सकतीं, क्योंकि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होता है। महिला ने दावा किया कि जब उनके साथ कथित घटना हुई थी, उस समय उन्हें उत्तराखंड में दोबारा कदम नहीं रखने की सख्त हिदायत दी गई थी।
उन्होंने कहा कि वह जल्द ही वापस असम लौट जाएंगी, लेकिन अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए जरूरत पड़ने पर बार-बार उत्तराखंड आती रहेंगी। महिला के मुताबिक, उनका मुख्य उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने बेटे के भविष्य और अधिकारों के लिए न्याय प्राप्त करना है।
महिला ने मुख्यमंत्री धामी से अपील करते हुए कहा कि उन्हें सरकार से निष्पक्ष जांच की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अंकिता भंडारी मामले में न्याय की मांग को गंभीरता से लिया गया, उसी तरह उनके मामले को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
2003 में 16 साल की थी, हरक सिंह रावत पर लगाया दुष्कर्म का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला ने वर्ष 2003 की घटनाओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय उनकी उम्र महज 16 वर्ष थी। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने उनके साथ दुष्कर्म किया था। महिला ने यह भी दावा किया कि घटना के बाद उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और एक समय उन्हें मानसिक चिकित्सालय में भी रखा गया था।
महिला के अनुसार, वह करीब डेढ़ महीने तक हरक सिंह रावत के यहां रही थीं। इस दौरान उन्हें अलग-अलग होटलों में ले जाया जाता था। उन्होंने आरोप लगाया कि गर्भवती होने के दौरान भी उन्हें काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
महिला ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उस समय परिस्थितियां ऐसी थीं कि वह खुलकर अपनी बात नहीं रख सकीं। अब इतने वर्षों बाद वह अपने बेटे के अधिकारों और न्याय के लिए सामने आई हैं। हालांकि, महिला की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
2016 में दर्ज कराया था मुकदमा, CBI जांच पर भी उठाए सवाल
महिला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वर्ष 2016 में उन्होंने हरक सिंह रावत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उनका दावा है कि उस दौरान भी उनके साथ कथित तौर पर जबरदस्ती की गई थी। इसके बाद मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी।
हालांकि, महिला ने तत्कालीन CBI जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि जांच किस तरह की गई। उन्होंने दावा किया कि उनके पास एक कागज लाया गया था, जिस पर केवल हस्ताक्षर करवाए गए। इसके बाद CBI की कोई टीम उनसे मिलने नहीं आई और न ही उन्हें जांच की प्रक्रिया के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी दी गई।
इसी वजह से अब महिला दोबारा CBI जांच की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि मामले की जांच नए सिरे से होनी चाहिए, ताकि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की निष्पक्ष तरीके से पड़ताल हो सके। उन्होंने उत्तराखंड के DGP से इस संबंध में उचित कार्रवाई करने की अपील की है।
बेटे के DNA टेस्ट और पिता की पहचान को लेकर उठाई मांग
इस पूरे मामले में महिला की सबसे बड़ी मांग अपने बेटे को न्याय दिलाने की है। उन्होंने DNA टेस्ट कराने की मांग करते हुए कहा कि वैज्ञानिक तरीके से जांच होने पर मामले से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें महेंद्र भट्ट नाम के किसी व्यक्ति के बारे में जानकारी नहीं है और वह उन्हें नहीं जानती हैं। ऐसे में उन्होंने अपने DNA टेस्ट को लेकर उठ रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। महिला का कहना है कि इस मामले को किसी अन्य व्यक्ति या राजनीतिक विवाद से जोड़ने के बजाय उनकी शिकायत और उनके बेटे के अधिकारों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनके नाम को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उनके नाम का इस्तेमाल करके राजनीति करता है, तो वह उसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने से भी पीछे नहीं हटेंगी।
मुख्यमंत्री धामी से लगाई न्याय की गुहार, बोलीं- बेटे को इंसाफ मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
महिला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भरोसा जताते हुए कहा कि इसी विश्वास के साथ वह देहरादून पहुंची हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि उनके मामले में भी निष्पक्ष जांच कराई जाए और उनके बेटे को न्याय दिलाया जाए।
महिला का कहना है कि वह उत्तराखंड में स्थायी रूप से नहीं रह सकतीं, क्योंकि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने बेटे के अधिकारों के लिए लड़ना छोड़ देंगी। उन्होंने दोहराया कि जब तक उनके बेटे को न्याय नहीं मिलता, तब तक वह इस लड़ाई को जारी रखेंगी।
फिर चर्चा में हरक सिंह रावत, राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
इस मामले के दोबारा सामने आने के बाद उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज होना स्वाभाविक है। एक ओर महिला ने पुराने प्रकरण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर CBI जांच, DNA टेस्ट और बेटे को न्याय दिलाने की मांग ने इस मामले को फिर से सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम में महिला की ओर से लगाए गए आरोपों और उनकी मांगों के आधार पर निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड सरकार महिला की मांग पर दोबारा CBI जांच कराने की दिशा में कोई कदम उठाएगी? क्या DNA टेस्ट के जरिए मामले से जुड़े सवालों का जवाब मिल पाएगा? और क्या करीब 23 साल पुराने इस विवाद में महिला और उसके बेटे को न्याय मिल सकेगा? फिलहाल, इन सवालों के जवाब जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।
