एक तरफ एम्स ऋषिकेश में छह महीने से कैंसर का इलाज, दूसरी तरफ उजड़ते आशियाने की चिंता; फरवरी 2026 से तीन बार शिकायत के बावजूद राहत का इंतजार, केदारनाथ हाईवे पर नाली निर्माण की खुदाई बनी परेशानी की वजह
रुद्रप्रयाग: जिंदगी पहले ही एक कठिन परीक्षा ले रही हो और उसी बीच सिर छिपाने वाले आशियाने पर भी संकट मंडराने लगे, तो इंसान की बेबसी का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। कुछ ऐसी ही पीड़ा से गुजर रही हैं रुद्रप्रयाग जिले के तिलवाड़ा मुख्य बाजार की रहने वाली प्रभा सकलानी। एक ओर वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं और पिछले छह महीनों से एम्स ऋषिकेश में अपना उपचार करा रही हैं, तो दूसरी ओर उनके चार मंजिला मकान की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। केदारनाथ हाईवे पर नाली निर्माण के लिए की जा रही खुदाई ने उनके सामने ऐसी परेशानी खड़ी कर दी है, जिसने बीमारी के बीच उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। मकान की नींव और संरचना को संभावित नुकसान पहुंचने की आशंका के बीच प्रभा ने अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुहार लगाकर न्याय और सुरक्षा की मांग की है।
प्रभा सकलानी का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे नाली निर्माण के लिए की जा रही खुदाई से उनके मकान की सुरक्षा प्रभावित हो रही है। फरवरी 2026 से शुरू हुई इस खुदाई को लेकर वह लगातार अपनी चिंता संबंधित विभागों तक पहुंचाती रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने तीन बार लिखित शिकायतें देकर अधिकारियों का ध्यान समस्या की ओर आकर्षित किया, लेकिन अब तक उन्हें ऐसी ठोस राहत नहीं मिल पाई है, जिससे वह अपने मकान की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त हो सकें। लगातार बारिश और भवन को संभावित नुकसान की आशंका ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर मामले की तकनीकी जांच कराने और आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की है।
खुदाई से मकान की नींव प्रभावित होने की आशंका, बारिश ने बढ़ाई चिंता
तिलवाड़ा मुख्य बाजार में केदारनाथ हाईवे के किनारे चल रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर प्रभा सकलानी की सबसे बड़ी चिंता अपने चार मंजिला मकान की सुरक्षा है। उनके अनुसार, फरवरी 2026 में शुरू हुई खुदाई लंबे समय से जारी है और मकान के ठीक बाहर की गई खुदाई के कारण भवन की नींव पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। उन्हें डर है कि यदि समय रहते स्थिति का आकलन नहीं किया गया और जरूरी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, तो मकान को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
प्रभा का कहना है कि लगातार बारिश के बीच उनकी चिंता और बढ़ गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान जमीन और भवनों की सुरक्षा अपने आप में एक महत्वपूर्ण विषय बन जाता है। ऐसे में किसी मकान के आसपास खुदाई किए जाने पर उसकी नींव और संरचना की तकनीकी स्थिति का आकलन करना जरूरी हो जाता है। हालांकि, प्रभा के मकान की वास्तविक स्थिति क्या है, नींव पर कितना असर पड़ा है और संभावित खतरे की वजह क्या है, इसकी पुष्टि संबंधित विशेषज्ञों की तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
लेकिन प्रभा के लिए यह केवल निर्माण कार्य से जुड़ा मामला नहीं है। यह उस घर की सुरक्षा का सवाल है, जिसमें उनका जीवन और भविष्य जुड़ा हुआ है। गंभीर बीमारी से जूझते हुए हर दिन इलाज और स्वास्थ्य की चिंता के बीच मकान को लेकर बना डर उनकी मानसिक और आर्थिक परेशानियों को भी बढ़ा रहा है।
फरवरी से अब तक तीन शिकायतें, फिर भी राहत का इंतजार
प्रभा सकलानी का कहना है कि उन्होंने इस मामले में चुप बैठने के बजाय लगातार संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया। फरवरी 2026 से शुरू हुई खुदाई को लेकर उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग और संबंधित समिति को तीन बार लिखित आवेदन दिए। इन शिकायतों के माध्यम से उन्होंने मकान की सुरक्षा, खुदाई से संभावित नुकसान और सड़क की सीमा को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
इसके बावजूद, उनके अनुसार, अब तक उन्हें कोई ठोस समाधान नहीं मिला है। उनका कहना है कि यदि समय रहते उनकी शिकायत पर गंभीरता से ध्यान दिया जाता और मकान की तकनीकी जांच कराई जाती, तो शायद उनकी चिंता कम हो सकती थी।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब किसी भवन स्वामी की ओर से निर्माण कार्य के दौरान मकान की सुरक्षा को लेकर बार-बार शिकायत की जाती है, तो उस शिकायत का निस्तारण किस तरह और कितनी जल्दी होना चाहिए? सार्वजनिक निर्माण कार्यों में सड़क और नाली जैसी सुविधाओं का विकास जरूरी है, लेकिन इनके साथ आसपास स्थित भवनों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना उतना ही आवश्यक है।
प्रभा की मांग है कि उनकी शिकायतों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। साथ ही, अब तक की गई कार्रवाई और शिकायतों के निस्तारण में हुई देरी की भी समीक्षा की जाए, ताकि समस्या का स्थायी समाधान निकल सके।
सड़क की सीमा और नाप-जोख पर भी उठाए सवाल
प्रभा सकलानी ने मकान और सड़क की सीमा निर्धारित करने के लिए पहले की गई नाप-जोख पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि पहली बार नाप किए जाने के दौरान मकान का करीब एक मीटर हिस्सा सड़क की सीमा में बताया गया था। हालांकि, उनके अनुसार, दोबारा नाप लेते समय पहले की सफेद पट्टी और मार्किंग को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि नाली की ओर से नाप की गई। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण पहले और बाद में सामने आई स्थिति में अंतर दिखाई दिया।
अब प्रभा चाहती हैं कि पुरानी और नई नाप-जोख का निष्पक्ष तरीके से मिलान किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि उनके मकान की वास्तविक सीमा क्या है। यदि भवन का कोई हिस्सा परियोजना की निर्धारित सीमा में आता है, तो नियमानुसार मुआवजे की प्रक्रिया अपनाई जाए। वहीं, यदि मकान निर्धारित सीमा से बाहर है और निर्माण कार्य या खुदाई के कारण उसे नुकसान पहुंचा है, तो तकनीकी आकलन के आधार पर उचित क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सड़क निर्माण या नाली निर्माण के दौरान जमीन की सीमा, भवन की स्थिति और निर्माण संबंधी मानकों को लेकर स्पष्टता होना जरूरी है। किसी भी पक्ष के दावे को बिना जांच के अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। ऐसे में निष्पक्ष सर्वेक्षण, तकनीकी रिपोर्ट और संबंधित अभिलेखों की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
एक तरफ कैंसर का इलाज, दूसरी तरफ आशियाने की चिंता
प्रभा सकलानी की परेशानी का सबसे संवेदनशील पहलू उनकी स्वास्थ्य स्थिति है। वह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं और पिछले छह महीनों से एम्स ऋषिकेश में उपचार करा रही हैं। बीमारी से लड़ना अपने आप में एक लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। इलाज के दौरान समय, आर्थिक संसाधनों और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है। ऐसे में मकान की सुरक्षा को लेकर लगातार बनी चिंता उनके लिए अतिरिक्त बोझ बन गई है।
प्रभा के अनुसार, गंभीर बीमारी और आर्थिक कठिनाइयों के बीच मकान की मरम्मत या सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर खर्च करना उनके लिए बेहद मुश्किल है। उन्हें यह चिंता भी सता रही है कि यदि भवन को अधिक नुकसान पहुंचता है, तो उसकी मरम्मत और सुरक्षा के इंतजाम कैसे हो पाएंगे।
एक ओर उन्हें अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए इलाज पर ध्यान देना है, वहीं दूसरी ओर अपने घर को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता से भी जूझना पड़ रहा है। ऐसे हालात में उनकी मांग है कि प्रशासन उनकी परिस्थितियों को संवेदनशीलता से समझे और समस्या का समाधान निकालने में अनावश्यक देरी न करे।
प्रभा की गुहार केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। वह चाहती हैं कि उनके मकान की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए, खतरे की आशंका होने पर समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाएं और यदि निर्माण कार्य से कोई नुकसान हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी निर्धारित कर नियमानुसार राहत दी जाए।
विकास कार्यों का विरोध नहीं, सुरक्षित निर्माण और न्याय की मांग
प्रभा सकलानी ने स्पष्ट किया है कि उन्हें सड़क और नाली निर्माण जैसे विकास कार्यों से कोई विरोध नहीं है। उनकी आपत्ति निर्माण कार्य के तरीके और उससे उनके मकान को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर है। वह चाहती हैं कि विकास कार्य निर्धारित सीमाओं और तकनीकी मानकों के अनुरूप हो तथा किसी भी भवन की सुरक्षा से समझौता न किया जाए।
उनकी मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर मकान की नींव, दीवारों और पूरी संरचना का तकनीकी निरीक्षण कराएं। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लेकर यह पता लगाया जाए कि खुदाई से भवन पर कितना प्रभाव पड़ा है और आगे किसी नुकसान को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
इसके साथ ही, खुदाई वाले स्थान पर आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए। यदि तकनीकी जांच में भवन के लिए खतरे की पुष्टि होती है, तो स्थिति की गंभीरता के अनुसार तत्काल सुरक्षात्मक कदम उठाए जाने चाहिए। पुरानी और नई नाप-जोख के अंतर की भी जांच होनी चाहिए, जिससे सड़क की सीमा और मकान की वास्तविक स्थिति को लेकर बना विवाद दूर हो सके।
प्रभा ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित विभागों को निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दें। उनका कहना है कि शिकायतों का समाधान केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई से होना चाहिए।
जिलाधिकारी ने दिए सुरक्षा के साथ निर्माण कार्य कराने के निर्देश
इस मामले में जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग को भवनों को सुरक्षित रखते हुए निर्माण कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्य की हर दिन निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी व्यक्ति को निर्माण कार्य के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े।
जिलाधिकारी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रभा सकलानी अपने मकान की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग मौके पर निरीक्षण कर उनकी शिकायत का निस्तारण किस तरह करता है और भवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
तिलवाड़ा में प्रभा सकलानी का मामला सार्वजनिक निर्माण कार्यों और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को सामने लाता है। विकास कार्य किसी भी क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं, लेकिन इन कार्यों के दौरान आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा, उनकी शिकायतों और उनके कानूनी अधिकारों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
प्रभा सकलानी इस समय केवल अपने मकान की सुरक्षा के लिए आवाज नहीं उठा रही हैं, बल्कि वह ऐसी जांच और कार्रवाई की मांग कर रही हैं, जिससे पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सके। उनकी उम्मीद है कि प्रशासन उनकी परिस्थितियों को समझते हुए समय रहते समस्या का समाधान करेगा।
अब सबसे अहम सवाल यही है कि क्या उनकी तीनों शिकायतों की निष्पक्ष समीक्षा होगी? क्या मकान की नींव और संरचना का तकनीकी निरीक्षण कर संभावित खतरे की स्थिति स्पष्ट की जाएगी? और यदि जांच में नुकसान की पुष्टि होती है, तो क्या उन्हें नियमानुसार सुरक्षा और क्षतिपूर्ति मिल पाएगी?
कैंसर से जूझ रही प्रभा सकलानी के लिए यह केवल एक मकान का मामला नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य और सुकून से जीने के अधिकार का सवाल है। अब उनकी निगाहें मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि उनकी पुकार सुनी जाएगी और बीमारी से लड़ते हुए उन्हें अपने आशियाने को लेकर एक और संघर्ष नहीं करना पड़ेगा।
