एशियन गेम्स 2026 के 13वें दिन भारत को मिला शानदार तोहफा, अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड़ की तिकड़ी ने वर्ल्ड चैंपियन दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराया
नागोया (जापान): एशियन गेम्स 2026 के 13वें दिन भारत ने शानदार अंदाज में अपने अभियान की शुरुआत की। भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने फाइनल में मौजूदा चैंपियन और वर्ल्ड चैंपियन दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ भारत की झोली में एशियन गेम्स 2026 का 11वां गोल्ड मेडल आ गया है। महिला रिकर्व टीम की इस जीत ने भारतीय तीरंदाजी के बढ़ते दबदबे को भी एक बार फिर सामने ला दिया।
भारतीय टीम में अनुभवी अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और महज 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड़ शामिल थीं। तीनों खिलाड़ियों ने दबाव भरे फाइनल मुकाबले में शानदार संयम और सटीक निशानेबाजी का प्रदर्शन किया। भारत ने दक्षिण कोरिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए मुकाबला 5-3 से अपने नाम किया और पहली बार एशियन गेम्स में महिला रिकर्व टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक हासिल किया।
पहली बार फाइनल में पहुंचकर सीधे गोल्ड पर निशाना
भारतीय महिला रिकर्व टीम की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि टीम ने पहली बार एशियाई खेलों के इस वर्ग के फाइनल में जगह बनाई थी। इससे पहले सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने चीन को 5-1 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था।
फाइनल में भारत के सामने दक्षिण कोरिया की चुनौती थी, जिसे इस स्पर्धा की सबसे मजबूत टीमों में गिना जाता है। इसके बावजूद भारतीय तिकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुकाबले पर पकड़ बनाए रखी। अंततः भारत ने 5-3 की जीत के साथ इतिहास रच दिया।
महिला रिकर्व टीम के लिए यह सफर खास तौर पर उल्लेखनीय है। हांगझोउ एशियन गेम्स 2023 में भारतीय महिला रिकर्व टीम ने कांस्य पदक जीता था। अब तीन साल बाद टीम ने उसी स्पर्धा में कांस्य से आगे बढ़ते हुए सीधे स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया।
तीरंदाजी में भारत का चौथा गोल्ड
महिला रिकर्व टीम की जीत के साथ एशियन गेम्स 2026 में तीरंदाजी के क्षेत्र में भारत का यह चौथा स्वर्ण पदक हो गया है। इससे पहले भारतीय खिलाड़ियों ने पुरुष कंपाउंड, महिला कंपाउंड और मिश्रित कंपाउंड टीम स्पर्धाओं में गोल्ड मेडल जीते थे।
इस तरह भारतीय तीरंदाजों ने एशियन गेम्स में लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के पदक अभियान को मजबूती दी है। खास बात यह है कि इस बार रिकर्व वर्ग में भी भारत ने अपनी ताकत का परिचय दिया है।
शंघाई में मिली सफलता ने बढ़ाया था आत्मविश्वास
भारतीय महिला रिकर्व टीम के शानदार प्रदर्शन की नींव कुछ महीने पहले ही मजबूत हो गई थी। टीम ने मई में शंघाई वर्ल्ड कप में पांच साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए स्वर्ण पदक जीता था। उस प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में भी भारत ने दक्षिण कोरिया को मात दी थी।
शंघाई की सफलता ने भारतीय टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाया और एशियन गेम्स में भी टीम ने उसी लय को बरकरार रखा। इस बार भी टीम में शंघाई में स्वर्ण जीतने वाली टीम के लगभग वही खिलाड़ी शामिल रहे।
हालांकि टीम में एक बदलाव जरूर हुआ। पूर्व विश्व नंबर एक दीपिका कुमारी की जगह इस बार कीर्ति शर्मा को टीम में शामिल किया गया। दीपिका चयन ट्रायल के जरिए एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी थीं। इसके बावजूद भारतीय टीम ने अपने प्रदर्शन पर इसका असर नहीं पड़ने दिया और ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
17 साल की कुमकुम मोहोड़ ने बढ़ाया गौरव
इस जीत की खास बात भारतीय टीम में शामिल 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड़ का प्रदर्शन भी रहा। इतनी कम उम्र में एशियन गेम्स जैसे बड़े मंच पर उतरकर वर्ल्ड चैंपियन दक्षिण कोरिया के खिलाफ फाइनल में स्वर्ण पदक जीतना भारतीय तीरंदाजी के लिए उम्मीदों को और मजबूत करता है।
अंकिता भकत के अनुभव, कीर्ति शर्मा के प्रदर्शन और कुमकुम मोहोड़ के युवा जोश ने मिलकर भारतीय टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई। यह पदक न केवल वर्तमान उपलब्धि है, बल्कि भारतीय महिला तीरंदाजी के भविष्य के लिए भी एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।
भारत की पदक तालिका में भी हुआ इजाफा
महिला रिकर्व टीम के गोल्ड के साथ भारत के कुल स्वर्ण पदकों की संख्या 11 हो गई है। भारत के खाते में अब कुल 67 पदक हैं, जिनमें 11 स्वर्ण, 23 रजत और 33 कांस्य पदक शामिल हैं। पदक तालिका में भारत सातवें स्थान पर है।
एशियन गेम्स के 13वें दिन की शुरुआत ही स्वर्ण पदक से होने के बाद भारतीय खिलाड़ियों से अन्य खेलों में भी शानदार प्रदर्शन की उम्मीदें बढ़ गई हैं। महिला रिकर्व टीम की यह जीत भारत के लिए सिर्फ एक और पदक नहीं, बल्कि बड़े मंच पर आत्मविश्वास और निरंतर बेहतर होते प्रदर्शन की कहानी भी है।
