देहरादून: उत्तराखंड प्रीमियर लीग (UPL) के सीजन-3 के ग्रैंड फिनाले और क्लोजिंग सेरेमनी से पहले हरियाणवी गायक मासूम शर्मा की प्रस्तावित परफॉर्मेंस को लेकर विवाद सड़क तक पहुंच गया। रायपुर स्थित राजीव गांधी इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होने वाले कार्यक्रम को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) समेत कुछ सामाजिक संगठनों ने पहले ही आपत्ति जताई थी। अब प्रदर्शनकारियों ने स्टेडियम के बाहर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। इससे क्रिकेट के इस बड़े आयोजन से पहले माहौल चर्चा में आ गया।
मासूम शर्मा को UPL की क्लोजिंग सेरेमनी में प्रस्तुति के लिए बुलाए जाने के बाद से ही विरोध के स्वर उठ रहे थे। विरोध करने वाले संगठनों ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड (CAU) से कार्यक्रम पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। इससे पहले संगठनों के प्रतिनिधियों ने CAU कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन भी दिया था और कहा था कि यदि कार्यक्रम रद्द नहीं किया गया तो फाइनल के दिन स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।
आखिर मासूम शर्मा के कार्यक्रम का विरोध क्यों?
विरोध की सबसे बड़ी वजह अप्रैल 2026 में देहरादून के DAV पीजी कॉलेज में आयोजित छात्रसंघ कार्यक्रम से जुड़ा विवाद बताया जा रहा है। उस कार्यक्रम में मासूम शर्मा की प्रस्तुति के दौरान मंच से कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र भाषा के इस्तेमाल का मामला सामने आया था। इसके बाद देहरादून पुलिस की ओर से उन्हें नोटिस भेजे जाने की खबर आई और उनके खिलाफ शिकायत तथा एफआईआर दर्ज होने की रिपोर्ट भी सामने आई थी।
उस समय सामने आए विवाद के बाद मासूम शर्मा ने अपनी ओर से सफाई भी दी थी। उन्होंने कहा था कि एक संदिग्ध व्यक्ति द्वारा परेशान किए जाने के तनाव का असर मंच पर दिखाई दिया और यदि उनके शब्दों से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्होंने माफी मांगी।
इसी पुराने प्रकरण को आधार बनाकर अब विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि जिस कलाकार की प्रस्तुति को लेकर पहले ही देहरादून में विवाद हो चुका है, उसे इतने बड़े सार्वजनिक खेल आयोजन की क्लोजिंग सेरेमनी में मंच देना उचित नहीं है।
CAU कार्यालय तक पहुंचा था विरोध
UPL में मासूम शर्मा की प्रस्तुति के विरोध की शुरुआत स्टेडियम से पहले CAU कार्यालय से हुई। विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने CAU के अधिकारियों से मुलाकात कर कार्यक्रम रद्द करने की मांग रखी थी। रिपोर्टों के मुताबिक, संगठन की ओर से यह भी कहा गया था कि मांग पर विचार नहीं हुआ तो फाइनल के दिन स्टेडियम में प्रदर्शन किया जाएगा। CAU की ओर से ज्ञापन को संबंधित स्तर पर रखने की बात कही गई थी।
UKD ने भी इस मामले में विरोध का ऐलान किया। संगठन से जुड़े नेताओं ने मासूम शर्मा के कुछ गीतों और उनकी सार्वजनिक प्रस्तुतियों की शैली पर सवाल उठाते हुए आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों की ओर से इसे कथित तौर पर ‘गन कल्चर’ और अभद्र भाषा से जोड़कर देखा गया। हालांकि, ये प्रदर्शनकारियों के आरोप और राजनीतिक/सामाजिक संगठनों की आपत्तियां हैं, जिन्हें इसी रूप में देखा जाना चाहिए।
स्टेडियम के बाहर नारेबाजी, पुलिस भी रही मौजूद
UPL फाइनल के दौरान जब मैदान के भीतर मुकाबला चल रहा था और क्लोजिंग सेरेमनी की तैयारियां की जा रही थीं, उसी दौरान विरोध करने वाले कार्यकर्ता स्टेडियम के बाहर पहुंच गए। यहां मासूम शर्मा के खिलाफ नारेबाजी की गई और उनके पुराने DAV कॉलेज विवाद का हवाला देते हुए कार्यक्रम का विरोध किया गया।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल की मौजूदगी भी रही। मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने स्थिति पर नजर रखी। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जबकि मीडिया रिपोर्टों में कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात भी सामने आई है।
इस विरोध ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में कलाकारों के चयन के दौरान उनके पुराने विवादों और सार्वजनिक छवि से जुड़े मामलों को किस तरह ध्यान में रखा जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री धामी के पोस्टर को लेकर भी हुआ विवाद
मासूम शर्मा के कार्यक्रम के विरोध के बीच आयोजन स्थल पर लगे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पोस्टर और बैनर भी चर्चा का विषय बन गए। प्रदर्शनकारियों के सामने आयोजन से जुड़े पोस्टरों में मुख्यमंत्री की तस्वीर और नाम दिखाई दे रहे थे। इसके बाद विरोध के दौरान कुछ नारे सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ भी सुनाई दिए।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के UPL क्लोजिंग सेरेमनी में शामिल होने की बात पहले ही स्पष्ट नहीं होने की स्थिति से अलग, उनके कार्यालय की ओर से यह बताया गया था कि वे क्लोजिंग समारोह में शामिल नहीं होंगे। इसलिए आयोजन स्थल पर मुख्यमंत्री के पोस्टर दिखाई देना उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
विरोध करने वाले लोगों का कहना था कि उनका मूल मुद्दा मासूम शर्मा की प्रस्तुति था। वहीं, आयोजन स्थल पर मुख्यमंत्री के नाम और तस्वीर वाले पोस्टर होने के कारण प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी नारे भी सुनाई दिए। यही पहलू बाद में सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया।
DAV कॉलेज विवाद फिर बना केंद्र में
मासूम शर्मा के खिलाफ उठे ताजा विरोध को समझने के लिए अप्रैल के DAV कॉलेज विवाद को देखना जरूरी है। अप्रैल में सामने आए वीडियो और रिपोर्टों के बाद उनके मंचीय व्यवहार को लेकर विवाद हुआ था। देहरादून पुलिस ने मामले में कार्रवाई की थी और उनके खिलाफ शिकायत/एफआईआर की रिपोर्ट सामने आई थी।
इस मामले ने उत्तराखंड के कई सामाजिक संगठनों को भी प्रतिक्रिया देने के लिए प्रेरित किया था। कुछ संगठनों ने इसे सार्वजनिक मंच की मर्यादा से जोड़ते हुए विरोध किया था। दूसरी ओर, मासूम शर्मा की ओर से सफाई और माफी की बात भी सामने आई थी।
अब करीब छह महीने बाद जब वही कलाकार UPL जैसे बड़े सार्वजनिक खेल आयोजन की क्लोजिंग सेरेमनी में प्रस्तुति देने पहुंचे, तो पुराना विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया।
UPL का मंच और कलाकारों के चयन पर बहस
UPL उत्तराखंड में क्रिकेट को बढ़ावा देने वाले प्रमुख आयोजनों में शामिल है। ऐसे आयोजन केवल खेल तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनकी क्लोजिंग सेरेमनी और मनोरंजन कार्यक्रम भी बड़ी संख्या में दर्शकों का ध्यान आकर्षित करते हैं। ऐसे में कलाकारों के चयन को लेकर होने वाला विवाद भी स्वाभाविक रूप से व्यापक चर्चा का विषय बन जाता है।
मासूम शर्मा के मामले में एक ओर आयोजकों के पास उनका कार्यक्रम तय करने का निर्णय है, वहीं दूसरी ओर विरोध करने वाले संगठनों ने सार्वजनिक मंच पर उनकी प्रस्तुति को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इस पूरे विवाद में कलाकार की ओर से पुराने मामले में दी गई सफाई और माफी का पक्ष भी मौजूद है।
यानी मामला केवल एक संगीत कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है। यह सार्वजनिक आयोजनों में कलाकारों की प्रस्तुति, मंचीय भाषा, स्थानीय भावनाओं और आयोजकों की जिम्मेदारी जैसे सवालों से भी जुड़ गया है।
विरोध के बीच कार्यक्रम पर टिकी नजरें
मासूम शर्मा ने UPL कार्यक्रम से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश भी जारी किया था, जिसमें उन्होंने देहरादून आने और कार्यक्रम में प्रस्तुति देने की बात कही। वहीं, विरोध करने वाले संगठनों ने भी अपना रुख स्पष्ट रखा।
अब पूरे विवाद का अगला पहलू यह है कि आयोजक और प्रशासन इस तरह के विरोध के बीच कार्यक्रम को किस तरह संचालित करते हैं। फिलहाल UPL के खेल आयोजन और उससे जुड़ी क्लोजिंग सेरेमनी को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हो गई है।
क्रिकेट के मंच पर संगीत से ज्यादा विवाद क्यों?
UPL का फाइनल जहां मैदान पर क्रिकेट के रोमांच के लिए चर्चा में होना था, वहीं क्लोजिंग सेरेमनी में प्रस्तावित एक कलाकार की परफॉर्मेंस ने आयोजन से पहले ही बहस को जन्म दे दिया। UKD और अन्य संगठनों का विरोध, CAU को दिए गए ज्ञापन, पुराने DAV कॉलेज प्रकरण और स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन—इन सभी घटनाक्रमों ने मामले को लगातार सुर्खियों में बनाए रखा है।
अब यह विवाद आने वाले दिनों में किस दिशा में जाता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आयोजक, प्रशासन और विरोध करने वाले संगठन आगे क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल इतना साफ है कि UPL की क्लोजिंग सेरेमनी में मासूम शर्मा की प्रस्तुति सिर्फ एक म्यूजिक शो नहीं रही, बल्कि इसके साथ पुराने विवाद, कलाकारों के चयन और सार्वजनिक आयोजनों की मर्यादा को लेकर एक व्यापक बहस भी जुड़ गई है।
