25 सितंबर को चुनाव आयोग के दफ्तरों तक मार्च करेगी कांग्रेस, 28 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर भी प्रदर्शन; वोटर लिस्ट में बदलावों की स्वतंत्र जांच की मांग
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर देश की राजनीति में विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोलते हुए शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को देशभर में विरोध प्रदर्शन और मार्च का ऐलान किया है। कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठनों से संबंधित चुनाव आयोग के कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने को कहा है। पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग भी उठाई गई है।
कांग्रेस का कहना है कि SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं और इनकी स्वतंत्र एवं व्यापक समीक्षा होनी चाहिए। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में लिए गए फैसलों तथा मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने से जुड़े बदलावों की जांच की मांग की है। कांग्रेस के अनुसार, यह मामला केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है।
28 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर भी होगा प्रदर्शन
कांग्रेस ने आंदोलन को केवल 25 सितंबर तक सीमित नहीं रखा है। पार्टी ने सभी District Congress Committees (DCCs) को 28 सितंबर को अपने-अपने जिला कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकालने के निर्देश दिए हैं। यानी कांग्रेस की रणनीति के तहत पहले चरण में प्रदेश स्तर पर चुनाव आयोग के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन होगा और इसके बाद दूसरे चरण में जिला स्तर पर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती। हालांकि, कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं और चुनाव आयोग ने अपनी ओर से कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचारों और चर्चाओं के बावजूद अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
SIR को लेकर आखिर विवाद क्यों बढ़ा?
दरअसल, SIR को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान कई मौकों पर कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी आपत्तियां कम से कम 14 बार दर्ज की गईं। इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता डेटा तक पहुंच और चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
इन रिपोर्टों के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। कांग्रेस ने इसी आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी है। वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए।
प्रमोद तिवारी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी और चुनाव आयोग को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव आयोग का बचाव कर रही है और दोनों के बीच राजनीतिक संबंध होने का दावा किया। तिवारी ने इसे संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताया तथा कहा कि जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
हालांकि, तिवारी के ये बयान कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के दावे और आपत्तियां सामने आ रही हैं, जबकि चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रियाओं और अंतिम निर्णयों का बचाव किया है।
पूर्व CEC एसवाई कुरैशी ने स्वतंत्र जांच की जरूरत बताई
विवाद के बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने SIR से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के आरोपों को गंभीर बताते हुए स्वतंत्र जांच की जरूरत पर जोर दिया। उनके हवाले से यह दावा सामने आया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि करीब 93 प्रतिशत ऐसे लोग, जिनके नाम हटाए गए थे और जिन्होंने अपील की, वे अपनी अपील में सफल रहे और मतदाता सूची में बहाल कर दिए गए। इसलिए SIR को लेकर सामने आ रहे आंकड़ों और दावों को उनके संदर्भ और संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड के साथ देखना महत्वपूर्ण है।
अब सड़क से संसद तक बढ़ सकता है मामला
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का विरोध अब केवल प्रदर्शन तक सीमित रहने के संकेत नहीं दे रहा है। कांग्रेस सूत्रों के हवाले से यह भी रिपोर्ट किया गया है कि विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया से संबंधित प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए विपक्षी दलों के बीच संपर्क किए जाने की बात सामने आई है।
फिलहाल, 25 सितंबर का देशव्यापी विरोध प्रदर्शन इस पूरे विवाद में अगला बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होगा। इसके बाद 28 सितंबर को जिला स्तर पर प्रस्तावित मार्च से आंदोलन का दायरा और बढ़ सकता है। एक तरफ कांग्रेस SIR, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर स्वतंत्र जांच तथा CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं चुनाव आयोग अपने निर्णयों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।
ऐसे में SIR विवाद अब मतदाता सूची की प्रक्रिया से आगे बढ़कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही पर राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया है।
