ग्रेटर नोएडा/नोएडा। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार को एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया। जेवर क्षेत्र में कश्मीरी गेट दिल्ली से महोबा जा रही एक स्लीपर टूरिस्ट बस में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भयावह था कि बस के अंदर फंसे 9 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्री घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में एक महिला और आठ पुरुष शामिल हैं।
हादसे के वक्त बस में करीब 30 से अधिक यात्रियों के सवार होने की जानकारी सामने आई है। आग लगते ही बस के भीतर चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। कुछ यात्रियों ने किसी तरह बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, जबकि कई यात्री धुएं और आग के बीच अंदर ही फंस गए। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान शुरू किया। रेस्क्यू के दौरान बस के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला गया।
जेवर कार्गो एयरपोर्ट के पास हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, यह हादसा यमुना एक्सप्रेसवे पर जेवर कार्गो एयरपोर्ट के पास, नोएडा से करीब 33 किलोमीटर आगे हुआ। बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से यात्रियों को लेकर महोबा की तरफ जा रही थी। इसी दौरान चलती बस में अचानक आग लग गई।
आग लगने के बाद कुछ ही क्षणों में बस के भीतर धुआं भरने लगा। यात्रियों को संभलने और बाहर निकलने का ज्यादा समय नहीं मिल सका। बताया जा रहा है कि कई यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए चलती बस से छलांग लगा दी। बस के ऊपरी स्लीपर हिस्से में मौजूद यात्रियों के लिए बाहर निकलना और भी मुश्किल हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही समय में पूरी बस आग की लपटों से घिर गई। सड़क पर मौजूद अन्य लोगों ने भी यात्रियों को बचाने में मदद की और घटना की सूचना पुलिस तथा फायर विभाग को दी।
20 से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया
हादसे की सूचना मिलते ही जेवर पुलिस और फायर सर्विस की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। पुलिस और दमकल कर्मियों ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
पुलिस टीम ने आग और धुएं के बीच बस के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। बस के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश की गई। पुलिस के अनुसार, 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
हालांकि, जब राहतकर्मी बस के अंदर पहुंचे तो उन्हें नौ लोग मृत अवस्था में मिले। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यात्रियों की मौत जलने और दम घुटने के कारण हुई।
हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों में भी दहशत का माहौल रहा। जली हुई बस को देखकर घटना की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता था।
आग कैसे लगी? प्रारंभिक जांच में सामने आई यह वजह
पुलिस की प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह बस के एसी सिस्टम में स्पार्क या ब्लास्ट होना बताई जा रही है। बताया गया है कि एसी से निकली चिंगारी के बाद आग इंजन के लुब्रिकेंट ऑयल तक पहुंची और देखते ही देखते तेजी से फैल गई।
हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी। पुलिस के साथ फॉरेंसिक टीम भी मामले की जांच कर रही है। फॉरेंसिक टीम घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटा रही है ताकि आग की शुरुआत और उसके तेजी से फैलने की वास्तविक वजह का पता लगाया जा सके।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि बस की तकनीकी स्थिति कैसी थी, उसके एसी और इंजन सिस्टम में कोई खराबी थी या नहीं और हादसे के समय बस में सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं।
यात्रियों ने सुनाई हादसे की खौफनाक कहानी
हादसे से सुरक्षित बाहर निकले यात्रियों ने उस भयावह रात की पूरी कहानी बताई। एक यात्री ने बताया कि वह बस में सो रहा था। अचानक किसी ने उसे जगाकर बताया कि बस में आग लग गई है। इसके बाद सभी लोग बाहर निकलने के लिए भागने लगे।
यात्री के मुताबिक, बस के भीतर बहुत ज्यादा धुआं भर चुका था, जिसके कारण सांस लेना और कुछ देख पाना मुश्किल हो गया था। लोगों के बीच बाहर निकलने के लिए अफरा-तफरी मच गई थी। किसी तरह रास्ता बनाकर वह बस से बाहर निकल सका।
एक अन्य यात्री ने बताया कि वह भी सो रहा था। तभी किसी ने बस का दरवाजा खटखटाकर उसे जगाया। जब उसने आंखें खोलीं तो वहां पहले से ही यात्रियों की भारी भीड़ थी। उसने अपना सामान तक नहीं उठाया और सिर्फ अपना मोबाइल लेकर बाहर निकलने की कोशिश की।
उस यात्री ने बताया कि उसने जूते तक नहीं पहने और किसी तरह बस से बाहर आया। अंदर इतनी भीड़ और धुआं था कि लोगों को एक-दूसरे को धक्का देकर रास्ता बनाना पड़ रहा था। बाहर निकलने के दौरान उसे भी कई लोगों के धक्के लगे। आखिरकार किसी व्यक्ति ने उसे खींचकर बस से बाहर निकाला।
यात्री के मुताबिक, बाहर निकलने के बाद भी उसे कुछ समय तक कुछ समझ नहीं आया। चारों तरफ धुआं था और लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे।
ऊपरी स्लीपर में फंसे यात्रियों को नहीं मिला पर्याप्त समय
हादसे में सबसे गंभीर स्थिति उन यात्रियों की बताई जा रही है जो बस के स्लीपर हिस्से में मौजूद थे। आग तेजी से फैलने और धुएं के कारण उन्हें बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका।
स्लीपर बसों में यात्रियों के सोने की व्यवस्था होने के कारण कई लोग हादसे के वक्त गहरी नींद में थे। ऐसे में आग की जानकारी मिलने के बाद अचानक बाहर निकलने की कोशिश में भारी अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस के मुताबिक, रेस्क्यू टीम ने धुएं के बीच बस के अंदर प्रवेश कर फंसे यात्रियों को निकालने का प्रयास किया। लेकिन आग की तीव्रता के कारण राहत अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
चालक और परिचालक हिरासत में
हादसे के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। बस के चालक और परिचालक को हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने मामले में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हादसे के समय बस कौन चला रहा था, बस की तकनीकी स्थिति क्या थी और आग लगने के बाद यात्रियों को बाहर निकालने के लिए चालक और परिचालक की ओर से क्या कदम उठाए गए।
इसके साथ ही बस के संचालन और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर यातायात नियंत्रित
हादसे के बाद यमुना एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस ने मौके पर यातायात को नियंत्रित किया ताकि राहत एवं बचाव कार्य में किसी तरह की बाधा न आए।
जली हुई बस को सड़क से हटाने की कार्रवाई भी शुरू की गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद रहीं।
घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। वहीं मृतकों की पहचान और उनके परिजनों से संपर्क करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
CM योगी आदित्यनाथ ने लिया हादसे का संज्ञान
ग्रेटर नोएडा में हुए इस दर्दनाक हादसे का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने हादसे में हुई जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हादसे में घायल सभी लोगों को उचित और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य में किसी तरह की कमी नहीं रहने देने और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
हादसे ने फिर खड़े किए सुरक्षा से जुड़े सवाल
यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए इस हादसे ने लंबी दूरी की स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। खासकर ऐसी बसों में जहां यात्री रात के समय सो रहे होते हैं, वहां आग जैसी आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए पर्याप्त और सुगम रास्ता कितना महत्वपूर्ण है, यह हादसा इसकी गंभीरता को सामने लाता है।
हालांकि, इस घटना के आधार पर किसी विशेष सुरक्षा नियम या तकनीकी कारण के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। पुलिस और फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आग वास्तव में किस वजह से लगी और इतनी तेजी से क्यों फैली।
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान घायलों के उपचार, मृतकों की पहचान, उनके परिजनों को सूचना देने और हादसे की विस्तृत जांच पर है।
एक हादसा, कई परिवारों पर टूटा दुख का पहाड़
यमुना एक्सप्रेसवे पर कुछ ही मिनटों में हुआ यह हादसा कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया। जो यात्री दिल्ली से महोबा की यात्रा पर निकले थे, उनके सफर का अंत बेहद दर्दनाक हादसे में हुआ।
बस में लगी आग ने देखते ही देखते पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ यात्रियों ने अपनी जान बचाने के लिए छलांग लगाई, कुछ को स्थानीय लोगों और पुलिस ने बाहर निकाला, लेकिन नौ यात्रियों की जिंदगी नहीं बचाई जा सकी।
अब पुलिस की जांच यह तय करेगी कि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी, इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन सुरक्षा पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
फिलहाल ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी आग की यह घटना पूरे इलाके में शोक और चिंता का विषय बनी हुई है। पुलिस, फायर विभाग और प्रशासन की टीमें मामले की जांच में जुटी हैं, जबकि हादसे में घायल यात्रियों का इलाज जारी है।
