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रुड़की में स्वास्थ्य विभाग का बड़ा एक्शन, तीन निजी स्वास्थ्य संस्थान सील; डॉक्टरों की गैरमौजूदगी और नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई से मचा हड़कंप

The Hill India News
Last updated: September 11, 2026 5:20 am
The Hill India News
Published: September 11, 2026
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रुड़की: हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र में निजी स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्षेत्र में संचालित नर्सिंग होम और क्लीनिकों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान सामने आई अनियमितताओं और पंजीकरण से जुड़े नियमों के पालन में कमी मिलने के बाद विभाग ने ममता नर्सिंग होम, जनता क्लीनिक और शुक्ला क्लीनिक को सील कर दिया। स्वास्थ्य विभाग की अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद निजी अस्पतालों और क्लीनिक संचालकों में हड़कंप की स्थिति है।

Contents
अचानक पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम, शुरू हुआ निरीक्षणतीन संस्थानों पर गिरी कार्रवाई की गाज‘नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं’रिकॉर्ड और व्यवस्थाओं की भी होगी जांचअन्य निजी अस्पतालों में भी बढ़ी बेचैनीनिरीक्षण टीम में ये अधिकारी रहे शामिल

यह कार्रवाई निजी स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्थाओं, पंजीकरण संबंधी दस्तावेजों और निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच के लिए चलाए गए अभियान के तहत की गई। अभियान मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हरिद्वार के निर्देश और पंजीकरण प्राधिकरण कार्यालय के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. रमेश कुंवर के निर्देशन में चलाया गया।

अचानक पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम, शुरू हुआ निरीक्षण

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रुड़की क्षेत्र में विभिन्न निजी स्वास्थ्य संस्थानों का मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। टीम ने संस्थानों की वास्तविक व्यवस्थाओं का जायजा लेने के साथ-साथ विभाग के पास उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड और पंजीकरण से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की।

निरीक्षण के दौरान विभागीय टीम को कुछ संस्थानों में ऐसी स्थिति मिली, जिस पर अधिकारियों ने गंभीरता दिखाई। विभाग के अनुसार कुछ स्वास्थ्य संस्थानों में पंजीकरण के समय उपलब्ध कराई गई चिकित्सकों की सूची में जिन डॉक्टरों के नाम दर्ज थे, वे निरीक्षण के दौरान मौके पर मौजूद नहीं मिले।

चिकित्सकों की उपलब्धता स्वास्थ्य संस्थान के संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण मानकों में शामिल है। ऐसे में मौके पर संबंधित चिकित्सकों की अनुपस्थिति को विभाग ने गंभीरता से लिया और संस्थानों की अन्य व्यवस्थाओं की भी जांच की।

तीन संस्थानों पर गिरी कार्रवाई की गाज

निरीक्षण के दौरान सामने आई अनियमितताओं और नियमों के अनुपालन में कमी के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तीन संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की। इनमें ममता नर्सिंग होम, जनता क्लीनिक और शुक्ला क्लीनिक शामिल हैं।

विभाग ने इन तीनों संस्थानों को सील कर दिया। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में निजी स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वहीं, अन्य अस्पताल और क्लीनिक संचालक भी अपने-अपने रिकॉर्ड और व्यवस्थाओं को लेकर सतर्क हो गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को निजी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि पंजीकरण के आधार पर स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने वाले संस्थानों को निर्धारित नियमों और मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा।

‘नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं’

एसीएमओ राजेश कुंवर ने कहा कि पंजीकरण के आधार पर संचालित होने वाले स्वास्थ्य संस्थानों में नियमों का पालन, चिकित्सकों की उपलब्धता और निर्धारित मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाया जा रहा निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेगा। इसका उद्देश्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों की व्यवस्थाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करना और मरीजों को बेहतर एवं सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

विभाग की इस चेतावनी के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में अन्य नर्सिंग होम, क्लीनिक और निजी स्वास्थ्य संस्थानों का भी निरीक्षण किया जा सकता है।

रिकॉर्ड और व्यवस्थाओं की भी होगी जांच

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई सिर्फ चिकित्सकों की उपलब्धता तक सीमित नहीं है। अभियान के तहत निजी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध व्यवस्थाओं, पंजीकरण से संबंधित रिकॉर्ड और संस्थान के संचालन के लिए निर्धारित मानकों की भी जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य संस्थानों को विभाग के सामने उपलब्ध कराई गई जानकारी और मौके पर मौजूद वास्तविक व्यवस्थाओं में समानता बनाए रखनी होगी। यदि रिकॉर्ड में किसी चिकित्सक का नाम दर्ज है तो संबंधित चिकित्सक की उपलब्धता और भूमिका भी निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।

विभाग द्वारा की जा रही इस तरह की जांच का सीधा उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

अन्य निजी अस्पतालों में भी बढ़ी बेचैनी

गुरुवार को हुई कार्रवाई के बाद रुड़की क्षेत्र के अन्य निजी अस्पतालों और क्लीनिक संचालकों में भी बेचैनी बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम किसी भी संस्थान का अचानक निरीक्षण कर सकती है, ऐसे में संचालकों को अपने पंजीकरण दस्तावेज, चिकित्सकों से संबंधित रिकॉर्ड और संस्थान की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

माना जा रहा है कि विभाग आने वाले दिनों में भी इस अभियान को आगे बढ़ा सकता है। यदि निरीक्षण के दौरान किसी अन्य संस्थान में भी नियमों का उल्लंघन या निर्धारित मानकों की अनदेखी पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

निरीक्षण टीम में ये अधिकारी रहे शामिल

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई में कई अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे। निरीक्षण टीम में डॉ. राव, सहायक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी अंशु तोमर और जूनियर असिस्टेंट सोहेल शामिल थे। टीम ने मौके पर पहुंचकर संस्थानों की व्यवस्थाओं और दस्तावेजों का निरीक्षण किया।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को सुरक्षित और मानक के अनुरूप उपचार उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। पंजीकरण और निर्धारित नियमों का पालन न होने की स्थिति में मरीजों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल तीन संस्थानों को सील किए जाने के बाद रुड़की क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। विभाग की ओर से साफ संकेत दिए गए हैं कि निजी स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन में नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग का यह अभियान और तेज हो सकता है और अन्य निजी नर्सिंग होम व क्लीनिक भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से जहां नियमों का पालन करने वाले संस्थानों को व्यवस्था बनाए रखने का संदेश मिला है, वहीं नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों के लिए यह कार्रवाई एक सख्त चेतावनी के तौर पर देखी जा रही है।

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