नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गुरुवार को अपने सात अलग-अलग मोर्चों के नए प्रभारियों के नामों का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने युवा, महिला, किसान, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यक मोर्चों की जिम्मेदारी अनुभवी नेताओं को सौंपी है। बीजेपी के इस फैसले को संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पार्टी की ओर से जारी सूची के अनुसार बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। वहीं राजस्थान के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया को एसटी मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकीं डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चा का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
सात मोर्चों के लिए तय किए गए प्रभारी
बीजेपी ने जिन सात मोर्चों के लिए प्रभारियों की घोषणा की है, उनमें अलग-अलग सामाजिक और संगठनात्मक वर्गों को ध्यान में रखा गया है।
- युवा मोर्चा – हरीश द्विवेदी
- महिला मोर्चा – डी. पुरंदेश्वरी
- एससी मोर्चा – संजय भाटिया
- ओबीसी मोर्चा – वैजयंत पांडा
- किसान मोर्चा – लाल सिंह आर्या
- एसटी मोर्चा – सतीश पूनिया
- अल्पसंख्यक मोर्चा – गजेंद्र पटेल
युवा मोर्चे की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी को
बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चे का प्रभारी बनाए जाने को पार्टी के लिए अहम जिम्मेदारी माना जा रहा है। युवा मोर्चा बीजेपी के संगठन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके माध्यम से पार्टी युवाओं के बीच अपनी पहुंच मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें संगठन से जोड़ने का काम करती है। ऐसे में हरीश द्विवेदी के सामने युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी होगी।
सतीश पूनिया को ST मोर्चे की जिम्मेदारी
राजस्थान के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया को अनुसूचित जनजाति (ST) मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। आदिवासी और जनजातीय क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की दृष्टि से यह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी की कोशिश होगी कि एसटी मोर्चे के माध्यम से जनजातीय समुदाय के बीच संगठन की गतिविधियों को और मजबूत किया जाए।
महिला मोर्चे की कमान डी. पुरंदेश्वरी को
आंध्र प्रदेश बीजेपी की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकीं डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। महिला मोर्चा पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। महिलाओं को संगठन से जोड़ने, महिला कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और विभिन्न अभियानों को मजबूत करने की जिम्मेदारी इस मोर्चे की होती है।
वहीं एससी मोर्चे की जिम्मेदारी संजय भाटिया, ओबीसी मोर्चे का प्रभार वैजयंत पांडा, किसान मोर्चे की जिम्मेदारी लाल सिंह आर्या और अल्पसंख्यक मोर्चे का प्रभार गजेंद्र पटेल को दिया गया है।
बीजेपी के इस नए संगठनात्मक ऐलान से साफ है कि पार्टी विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच अपनी संगठनात्मक पकड़ को और मजबूत करने पर जोर दे रही है। सातों मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति के बाद अब इन नेताओं के सामने संबंधित मोर्चों की गतिविधियों को तेज करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने की चुनौती होगी। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का असर बीजेपी के संगठनात्मक अभियानों और विभिन्न राज्यों में पार्टी की रणनीति में भी दिखाई दे सकता है।
