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अमेरिका के टैरिफ पर कनाडा का करारा पलटवार, अमेरिकी सामानों पर 50% तक जवाबी टैक्स; 8 सितंबर से लागू होगा नया नियम

The Hill India News
Last updated: August 26, 2026 4:57 am
The Hill India News
Published: August 26, 2026
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ओटावा: अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहा व्यापारिक तनाव अब एक नए और गंभीर दौर में पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता टूटने के बाद कनाडा ने अमेरिका के खिलाफ बड़ा जवाबी कदम उठाने का ऐलान किया है। कनाडा सरकार ने अमेरिकी सामानों पर 50 प्रतिशत तक का जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह नया शुल्क 8 सितंबर 2026 से लागू होने की बात कही गई है। इस फैसले के तहत अमेरिका से कनाडा आने वाले अरबों डॉलर मूल्य के सामान प्रभावित होंगे।

Contents
कैसे बढ़ा अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ विवाद?किन अमेरिकी सामानों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?उद्योगों और कर्मचारियों के लिए बड़ा राहत पैकेजआम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है असर

कनाडा का यह कदम अमेरिका की ओर से कनाडाई उत्पादों पर लगाए गए भारी शुल्क के जवाब में आया है। कनाडा सरकार का कहना है कि उसने यह फैसला अपने घरेलू उद्योग, कंपनियों और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए लिया है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अमेरिकी टैरिफ का जवाब उसी अनुपात में देने की नीति पर आगे बढ़ रही है।

कैसे बढ़ा अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ विवाद?

अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्ते बेहद महत्वपूर्ण हैं। दोनों देश एक-दूसरे के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं और दोनों अर्थव्यवस्थाएं आपूर्ति श्रृंखला के स्तर पर भी एक-दूसरे से काफी जुड़ी हुई हैं। ऐसे में किसी एक देश द्वारा बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाए जाने का असर दूसरे देश के उद्योगों और उपभोक्ताओं पर भी पड़ता है।

बताया गया है कि 22 अगस्त 2026 को अमेरिका ने कनाडा से आने वाले सामानों पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैक्स लगाया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की गई, लेकिन बातचीत किसी ठोस समझौते तक नहीं पहुंच सकी। कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांसिस-फिलीप शैंपेन के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका की मांगें काफी अधिक थीं और कनाडा को उसके बदले पर्याप्त राहत नहीं मिल रही थी। इसके बाद कनाडा ने अमेरिकी सामानों पर जवाबी कार्रवाई करने का फैसला किया।

कनाडा सरकार का तर्क है कि यह कदम किसी व्यापार युद्ध को बढ़ावा देने के लिए नहीं, बल्कि कनाडाई कंपनियों और श्रमिकों को अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव से बचाने के लिए उठाया गया है। कनाडा ने अपनी नीति को ‘जैसे को तैसा’ जवाब के तौर पर पेश किया है।

किन अमेरिकी सामानों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

कनाडा ने अमेरिकी उत्पादों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उन पर अलग-अलग दरों से जवाबी शुल्क लगाने का फैसला किया है। इनमें सबसे अधिक प्रभाव स्टील, एल्युमीनियम, रेडीमेड कपड़ों और घरेलू फर्नीचर जैसे उत्पादों पर पड़ सकता है।

50 प्रतिशत टैरिफ वाली श्रेणी में स्टील और एल्युमीनियम के अलावा रेडीमेड कपड़े तथा घरेलू फर्नीचर शामिल हैं। इन उत्पादों पर भारी शुल्क लगने से अमेरिका से कनाडा को होने वाला निर्यात प्रभावित हो सकता है।

25 प्रतिशत टैरिफ वाली श्रेणी में फ्रिज, वॉशिंग मशीन जैसे घरेलू उपकरण, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद, मछली तथा समुद्री खाद्य पदार्थ शामिल हैं। इन वस्तुओं की कीमतों पर भी शुल्क बढ़ने का सीधा असर पड़ सकता है।

वहीं 15 प्रतिशत टैरिफ वाली श्रेणी में खेती के उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, कागज और पल्प जैसे उत्पाद रखे गए हैं। हालांकि, कारों समेत कुछ अन्य अमेरिकी सामानों पर पहले से लागू शुल्क अपनी मौजूदा व्यवस्था के तहत जारी रहने की बात कही गई है।

उद्योगों और कर्मचारियों के लिए बड़ा राहत पैकेज

टैरिफ विवाद का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे, इसके लिए कनाडा सरकार ने घरेलू उद्योगों और कर्मचारियों की सहायता के लिए लगभग 7.5 अरब कनाडाई डॉलर का पैकेज घोषित किया है। भारतीय मुद्रा में इसकी राशि करीब 62,500 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

सरकार ने कर्मचारियों की मदद के लिए लगभग 29,000 करोड़ रुपये के बराबर राशि रखने की बात कही है। इसका उद्देश्य कंपनियों को आर्थिक दबाव के बावजूद कर्मचारियों की नौकरी और वेतन सुरक्षित रखने में मदद करना है। साथ ही कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के लिए भी सहायता उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि व्यापारिक तनाव के कारण बड़े पैमाने पर छंटनी की स्थिति न बने।

छोटे कारोबारों को भी इस पैकेज के तहत सहायता देने की योजना है। क्षेत्रीय टैरिफ प्रतिक्रिया कार्यक्रम के माध्यम से छोटे उद्योगों को लगभग 12,500 करोड़ रुपये के बराबर मदद उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य उन व्यवसायों को तत्काल राहत देना है, जो अमेरिका से होने वाले व्यापार पर काफी हद तक निर्भर हैं।

इसके अलावा कंपनियों को तत्काल नकदी उपलब्ध कराने के लिए बिजनेस डेवलपमेंट बैंक ऑफ कनाडा के माध्यम से आपातकालीन वित्तीय सहायता देने की योजना भी बनाई गई है। सरकार ने पात्रता नियमों में भी बदलाव किया है, जिससे अपेक्षाकृत छोटी कंपनियां भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगी।

आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है असर

अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्ते बेहद बड़े हैं। दोनों देशों के उद्योग एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण टैरिफ बढ़ने का असर केवल निर्यातकों और आयातकों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। कंपनियों की उत्पादन लागत और आयात लागत बढ़ने पर उसका बोझ आगे चलकर उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।

घरेलू उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, कपड़े और कुछ खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना बन सकती है। इसके अलावा व्यापारिक तनाव लंबा खिंचने पर कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव करने के लिए मजबूर हो सकती हैं। इससे उत्पादन, रोजगार और निवेश पर भी असर पड़ सकता है।

कनाडा का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही व्यापारिक अनिश्चितताओं का सामना कर रही है। अगर अमेरिका और कनाडा के बीच टैरिफ को लेकर तनाव आगे भी बढ़ता है, तो इसका असर दोनों देशों की कंपनियों के साथ-साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी देखने को मिल सकता है।

फिलहाल कनाडा ने अमेरिकी टैरिफ के जवाब में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अमेरिका कनाडा के इस जवाबी कदम पर क्या प्रतिक्रिया देता है। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत दोबारा शुरू नहीं होती और शुल्क बढ़ाने का सिलसिला जारी रहता है, तो दुनिया के दो महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और गंभीर आर्थिक चुनौती बन सकता है।

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