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उत्तराखंड में शिक्षा की बड़ी सौगात: 42 राजकीय विद्यालय होंगे अपग्रेड, 448 पदों को मंजूरी; जानिए शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का वेतनमान

The Hill India News
Last updated: August 26, 2026 4:03 am
The Hill India News
Published: August 26, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 42 राजकीय विद्यालयों के उच्चीकरण को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के तहत सात राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर तक और 35 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को इंटरमीडिएट स्तर तक अपग्रेड किया जाएगा। इन उच्चीकृत विद्यालयों के सुचारु संचालन के लिए शासन ने कुल 448 अस्थायी पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान कर दी है।

Contents
7 उच्च प्राथमिक विद्यालय बनेंगे हाईस्कूल35 विद्यालयों में अब होगी इंटरमीडिएट तक पढ़ाई448 अस्थायी पदों को मंजूरी, रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगेइंटरमीडिएट विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रवक्ताओं के पद28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे अस्थायी पदपुराने पदों पर कार्यरत शिक्षकों का होगा समायोजनदूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों के लिए बड़ी राहत

शासन के इस फैसले से प्रदेश के दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। अब कई छात्रों को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए दूर-दराज के विद्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी कर दिए गए हैं और संबंधित विद्यालयों में नई शैक्षणिक व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

7 उच्च प्राथमिक विद्यालय बनेंगे हाईस्कूल

शासनादेश के अनुसार प्रदेश के सात राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों को राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय यानी हाईस्कूल स्तर तक उच्चीकृत किया जाएगा। इनमें उधमसिंह नगर जिले के पत्थरचट्टा और धीमरी ब्लॉक के विद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा उत्तरकाशी जिले का लिवाड़ी, बागेश्वर जिले के भगरतोला, वाछम और धन्यारी तथा चम्पावत जिले के धासम स्थित विद्यालयों को भी हाईस्कूल स्तर तक अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई है।

इन विद्यालयों के उच्चीकरण से स्थानीय विद्यार्थियों को कक्षा आठ के बाद आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे क्षेत्रों में जाने की मजबूरी से राहत मिल सकती है। विशेष रूप से पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों के लिए यह निर्णय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

35 विद्यालयों में अब होगी इंटरमीडिएट तक पढ़ाई

प्रदेश के 35 राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत करने का निर्णय भी लिया गया है। इनमें उधमसिंह नगर के मानपुर, शिवलालपुर, अमरझंडा, सिसौना और शहेदौरा विद्यालय शामिल हैं।

इसी तरह टिहरी जिले के मेड़, भिलंगना, टिहरी, थान, कौशल और पजैगांव, उत्तरकाशी के कफनौल, चम्पावत के सिल्ली, पल्सों और डुगरालेटी तथा पौड़ी जिले के कुटखाल, चोपताखाल, तिलधारखाल और माला विद्यालयों को इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत किया गया है।

इसके अलावा नैनीताल जिले के बड़ौन, कैंडागांव, नाईसेला और कूल रामगढ़, अल्मोड़ा के खाकर, चगेठी और काटली, रुद्रप्रयाग के बाछ्व, कालीमठ और किरोड़ा, चमोली जिले के कर्नोल, मानमती, विजयसैन और पिण्डवाली, बागेश्वर के जयड़ेरा तथा पिथौरागढ़ के पोखरी और हिमतड़ विद्यालयों को भी इंटरमीडिएट स्तर तक अपग्रेड किया जाएगा।

देहरादून जिले के सहसपुर क्षेत्र में स्थित कैंचीवाला और बिरसनी राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भी अब इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत किए जाएंगे।

448 अस्थायी पदों को मंजूरी, रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे

विद्यालयों के उच्चीकरण के साथ ही शासन ने कुल 448 अस्थायी पदों के सृजन को स्वीकृति दी है। इनमें हाईस्कूल स्तर तक उच्चीकृत सात विद्यालयों के लिए 63 पद और इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत 35 विद्यालयों के लिए 385 पद शामिल हैं।

हाईस्कूल स्तर पर उच्चीकृत प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक के साथ विभिन्न विषयों के सहायक अध्यापकों की व्यवस्था की जाएगी। इनमें हिंदी, आधुनिक भारतीय भाषा अथवा अंग्रेजी/संस्कृत, गणित, गृह विज्ञान, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, कला शिक्षा तथा छात्र संख्या के आधार पर एक अतिरिक्त विषय के शिक्षक पद शामिल होंगे।

प्रधानाध्यापक का वेतनमान 56,100 रुपये से 1,77,500 रुपये तक, लेवल-10 निर्धारित किया गया है। वहीं सहायक अध्यापक एलटी के पद पर नियुक्त शिक्षकों को 44,900 रुपये से 1,42,400 रुपये तक, लेवल-7 के अनुसार वेतनमान मिलेगा।

इंटरमीडिएट विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रवक्ताओं के पद

इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत 35 विद्यालयों के लिए कुल 385 पदों का सृजन किया गया है। प्रत्येक विद्यालय में एक प्रधानाचार्य और 10 प्रवक्ताओं के पद स्वीकृत किए गए हैं। इससे उच्चीकृत विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

प्रधानाचार्य पद के लिए 78,800 रुपये से 2,09,200 रुपये तक, लेवल-12 का वेतनमान निर्धारित किया गया है। वहीं प्रवक्ता पद पर नियुक्त शिक्षकों को 47,600 रुपये से 1,51,100 रुपये तक, लेवल-8 के अनुसार वेतनमान मिलेगा।

यह फैसला न केवल विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में पदों के सृजन के कारण रोजगार और नियुक्ति से जुड़ी संभावनाओं को भी मजबूती देगा।

28 फरवरी 2027 तक प्रभावी रहेंगे अस्थायी पद

शासनादेश के अनुसार स्वीकृत किए गए ये अस्थायी पद आदेश जारी होने की तिथि या नियुक्ति की तिथि, जो भी बाद में होगी, से प्रभावी माने जाएंगे। इन पदों की अवधि 28 फरवरी 2027 तक निर्धारित की गई है।

हालांकि शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर इन पदों को निर्धारित अवधि से पहले समाप्त करने का अधिकार सरकार के पास सुरक्षित रहेगा। इन पदों पर होने वाला व्यय वित्तीय वर्ष 2026-27 के माध्यमिक शिक्षा विभाग के बजट से वहन किया जाएगा।

पुराने पदों पर कार्यरत शिक्षकों का होगा समायोजन

विद्यालयों के उच्चीकरण के बाद पहले से कार्यरत शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के समायोजन की भी व्यवस्था की गई है। जिन जूनियर हाईस्कूलों को हाईस्कूल स्तर तक उच्चीकृत किया गया है, वहां पहले से सृजित पद समर्पित माने जाएंगे।

ऐसे विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापक और शिक्षकों को शासनादेश जारी होने की तिथि से तीन माह के भीतर अन्य स्थानों पर नियमानुसार समायोजित किया जाएगा। इसी प्रकार हाईस्कूल से इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों का भी नियमों के अनुसार समायोजन किया जाएगा।

दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों के लिए बड़ी राहत

उत्तराखंड के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में कई विद्यार्थियों को कक्षा आठ या दस के बाद उच्च शिक्षा के लिए दूसरे गांवों और कस्बों के विद्यालयों में जाना पड़ता है। लंबी दूरी, परिवहन सुविधाओं की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई छात्रों, विशेषकर छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होने की संभावना रहती है।

ऐसे में 42 राजकीय विद्यालयों के उच्चीकरण का यह निर्णय शिक्षा सुविधाओं को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर की शिक्षा गांवों और आसपास के क्षेत्रों में उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिलेंगे और विद्यालय छोड़ने की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। 42 विद्यालयों का उच्चीकरण और 448 अस्थायी पदों का सृजन न केवल शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों विद्यार्थियों के लिए बेहतर और सुलभ शिक्षा का रास्ता भी खोलेगा। अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि उच्चीकृत विद्यालयों में शिक्षकों और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था कितनी तेजी से की जाती है, ताकि शासन के इस महत्वपूर्ण निर्णय का लाभ छात्रों तक समय पर पहुंच सके।

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