China Rocket Failure: चीन के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम को सोमवार रात बड़ा झटका लगा, जब उसका लॉन्ग मार्च-7A रॉकेट लॉन्च के महज करीब 85 सेकेंड बाद उड़ान के दौरान नष्ट हो गया। रॉकेट के साथ चीन का ChinaSat-4B (Zhongxing-4B) संचार उपग्रह भी कक्षा तक नहीं पहुंच सका। घटना के बाद चीन ने मिशन को असफल घोषित करते हुए तकनीकी गड़बड़ी की जांच शुरू कर दी है।
सोमवार, 10 अगस्त 2026 की रात चीन के दक्षिणी प्रांत हैनान स्थित वेनचांग स्पेस लॉन्च साइट से लॉन्ग मार्च-7A ने उड़ान भरी थी। लॉन्च का समय स्थानीय समय के अनुसार रात करीब 8 बजकर 2 मिनट था। शुरुआती क्षणों में रॉकेट सामान्य तरीके से ऊपर बढ़ता दिखाई दिया, लेकिन लगभग 85 सेकेंड बाद स्थिति अचानक बदल गई। सामने आए वीडियो में रॉकेट के एक हिस्से में असामान्य गतिविधि दिखाई देती है और इसके बाद पूरा रॉकेट हवा में टूटकर आग के बड़े गोले में तब्दील होता नजर आया।
हवा में ही टूट गया रॉकेट, चारों तरफ दिखाई दी आग
लॉन्च के दौरान मौजूद लोगों ने आसमान में अचानक चमकता हुआ बड़ा आग का गोला देखा। इसके बाद धुएं का घना गुबार फैल गया और रॉकेट के मलबे के नीचे की ओर गिरने के दृश्य सामने आए। अंतरिक्ष विशेषज्ञों द्वारा लॉन्च फुटेज के शुरुआती विश्लेषण के अनुसार रॉकेट अपेक्षाकृत कम ऊंचाई और कम गति पर ही नष्ट हो गया था। इस वजह से उसका पेलोड निर्धारित कक्षा तक पहुंच ही नहीं सका।
हालांकि सोशल मीडिया पर रॉकेट के फटने को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ ने आधिकारिक तौर पर इसे उड़ान के दौरान आई ‘असामान्यता’ (flight anomaly) बताया है। इस तकनीकी गड़बड़ी की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी जांच की जा रही है। इसलिए फिलहाल किसी खास इंजन, ईंधन प्रणाली या दूसरे उपकरण को हादसे के लिए जिम्मेदार बताना जल्दबाजी होगी।
ChinaSat-4B भी नहीं पहुंच सका अंतरिक्ष में
इस मिशन का मकसद ChinaSat-4B संचार उपग्रह को उच्च कक्षा में स्थापित करना था। यह उपग्रह चीन के संचार और प्रसारण से जुड़े अंतरिक्ष कार्यक्रम का हिस्सा माना जा रहा है। लेकिन रॉकेट के उड़ान के शुरुआती चरण में ही नष्ट हो जाने के कारण उपग्रह भी अपने निर्धारित ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया।
यह चीन के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण झटका है क्योंकि लॉन्ग मार्च-7A का इस्तेमाल मुख्य रूप से उच्च कक्षा में उपग्रह पहुंचाने वाले मिशनों के लिए किया जाता है। चीन पिछले कई वर्षों से अपने लॉन्ग मार्च रॉकेट परिवार के जरिए अलग-अलग तरह के उपग्रहों और अंतरिक्ष अभियानों को अंजाम देता रहा है।
2020 में भी पहली उड़ान रही थी नाकाम
लॉन्ग मार्च-7A की कहानी में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इसकी पहली उड़ान मार्च 2020 में विफल हुई थी। इसके बाद रॉकेट ने लगातार कई सफल मिशन पूरे किए और चीन के भरोसेमंद लॉन्च वाहनों में अपनी जगह बनाई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 2020 की पहली विफलता के बाद इस रॉकेट ने एक दर्जन से अधिक सफल उड़ानें पूरी की थीं। इसलिए सोमवार की दुर्घटना को उसकी लंबी सफल श्रृंखला के बाद आया महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है।
यानी चीन के लिए यह केवल एक रॉकेट की असफलता नहीं है, बल्कि अब इंजीनियरों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि लंबे समय से सफल रहे लॉन्च सिस्टम में अचानक ऐसी गड़बड़ी क्यों आई।
चीन के अंतरिक्ष सपने के बीच बड़ा सवाल
चीन पिछले कुछ वर्षों में अंतरिक्ष क्षेत्र में तेजी से अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। बीजिंग का लक्ष्य केवल उपग्रह लॉन्च करने तक सीमित नहीं है। वह मानव अंतरिक्ष उड़ान, चंद्र मिशन, पुन: इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट और बड़े सैटेलाइट नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इसी साल जुलाई में चीन ने पुन: इस्तेमाल योग्य रॉकेट तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की थी। 10 जुलाई 2026 को लॉन्ग मार्च-10B के पहले चरण को समुद्र में एक प्लेटफॉर्म पर नेट-कैप्चर सिस्टम के जरिए सफलतापूर्वक वापस हासिल किया गया था। चीन ने इसे अपनी रॉकेट-रीयूजेबिलिटी तकनीक में बड़ी सफलता बताया था।
ऐसे में अगस्त की यह घटना दिखाती है कि अंतरिक्ष तकनीक में तेजी से प्रगति के बावजूद हर लॉन्च अपने साथ बड़ा तकनीकी जोखिम लेकर आता है। एक सफल रॉकेट रिकवरी के बाद कुछ ही सप्ताह में एक अलग रॉकेट का विफल होना चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम की जटिलता को भी दर्शाता है।
क्या चंद्र मिशन पर पड़ेगा असर?
चीन का एक बड़ा लक्ष्य आने वाले वर्षों में अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाना है। इसके लिए वह चांग’ई-7 समेत कई मिशनों की तैयारी कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक सोमवार की लॉन्ग मार्च-7A दुर्घटना का सीधा असर चंद्र मिशन पर पड़ने की संभावना सीमित है, क्योंकि चंद्र मिशन में इस्तेमाल होने वाला लॉन्च वाहन अलग तकनीकी परिवार का है। चांग’ई-7 के लिए लॉन्ग मार्च-5 का इस्तेमाल किया जाना है।
इसका मतलब यह है कि एक रॉकेट की विफलता को चीन के पूरे अंतरिक्ष कार्यक्रम की नाकामी के तौर पर देखना सही नहीं होगा। हालांकि जांच में अगर किसी ऐसी तकनीकी समस्या का पता चलता है जो दूसरे रॉकेट सिस्टम से भी जुड़ी हो, तो उसका प्रभाव व्यापक हो सकता है।
अमेरिका से अंतरिक्ष की होड़ भी बनी हुई है
चीन और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा पिछले कुछ वर्षों में काफी तेज हुई है। अमेरिका के पास NASA के चंद्र अभियानों के साथ-साथ निजी कंपनियों की अत्याधुनिक लॉन्च तकनीक मौजूद है। दूसरी ओर चीन सरकारी और निजी दोनों स्तरों पर अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को तेजी से विस्तार दे रहा है।
विशेष रूप से रीयूजेबल रॉकेट तकनीक में चीन की कोशिशों को अमेरिका की SpaceX जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखा जाता है। जुलाई में लॉन्ग मार्च-10B के पहले चरण की सफल रिकवरी को चीन के लिए इसी दिशा में बड़ी उपलब्धि माना गया था।
ऐसे में सोमवार की दुर्घटना चीन के लिए एक याद दिलाने वाली घटना है कि अंतरिक्ष की दौड़ में केवल बड़े लक्ष्य तय करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर चरण में अत्यधिक विश्वसनीय तकनीक और सुरक्षा जरूरी है।
एलन मस्क ने भी दी प्रतिक्रिया
रॉकेट की विफलता पर SpaceX के प्रमुख एलन मस्क ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लॉन्च से जुड़ी पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रॉकेट बनाना बेहद मुश्किल काम है और उम्मीद जताई कि चीन जल्द ही इस स्थिति से बाहर निकल जाएगा।
मस्क की प्रतिक्रिया इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि SpaceX खुद रॉकेट लॉन्च की कई असफलताओं और परीक्षणों से गुजरने के बाद आज पुन: इस्तेमाल योग्य रॉकेट तकनीक में अग्रणी कंपनियों में शामिल है।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि लॉन्ग मार्च-7A उड़ान के सिर्फ 85 सेकेंड बाद आखिर क्यों नष्ट हुआ? क्या यह संरचनात्मक समस्या थी, इंजन से जुड़ी गड़बड़ी, नियंत्रण प्रणाली की खराबी या किसी दूसरे तकनीकी सिस्टम में समस्या आई—इसका जवाब विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।
चीन के लिए आने वाले दिनों में इस जांच के नतीजे बेहद महत्वपूर्ण होंगे। अगर समस्या किसी एक रॉकेट या एक विशेष घटक तक सीमित रहती है, तो सुधार के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ सकता है। लेकिन यदि कोई व्यापक तकनीकी खामी सामने आती है, तो दूसरे संबंधित मिशनों की भी अतिरिक्त जांच करनी पड़ सकती है।
कुल मिलाकर, आसमान में 85 सेकेंड बाद बना आग का यह विशाल गोला चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए निश्चित तौर पर एक बड़ा झटका है, लेकिन इसे उसकी पूरी अंतरिक्ष महत्वाकांक्षा पर विराम के तौर पर देखना फिलहाल उचित नहीं होगा। चीन के पास सफल मिशनों का लंबा अनुभव है और वह रॉकेट, चंद्र अभियान तथा पुन: इस्तेमाल योग्य लॉन्च सिस्टम पर लगातार काम कर रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि बीजिंग इस विफलता से क्या सबक निकालता है और लॉन्ग मार्च-7A की अगली उड़ान कितनी जल्दी और कितनी सफलता के साथ होती है।
