ब्रुकलिन की अमेरिकी अदालत ने DOJ की याचिका मंजूर कर आपराधिक आरोपों को किया खारिज; जज निकोलस गराउफिस ने केस वापस लेने के तरीके पर चिंता भी जताई, अदाणी ने फैसले का सम्मान करते हुए राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराया
नई दिल्ली: उद्योगपति गौतम अदाणी को अमेरिका में चल रहे एक बड़े आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है। न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला अदालत ने अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की मांग स्वीकार करते हुए अदाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। यह मामला कथित रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों से संबंधित था। अमेरिकी जिला जज निकोलस गराउफिस ने अभियोजन पक्ष की केस खत्म करने की मांग को मंजूरी दी।
इस फैसले के बाद गौतम अदाणी ने न्यायपालिका और कानून के प्रति अपना भरोसा जताया है। उन्होंने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उनका कानून के शासन, सत्य और निष्पक्षता में विश्वास बना हुआ है। अदाणी ने उन लोगों के प्रति भी आभार जताया, जिन्होंने मुश्किल दौर में उनका और समूह का विश्वास बनाए रखा।
क्या था पूरा मामला?
अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने वर्ष 2024 में गौतम अदाणी समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोपों का संबंध भारत में सौर ऊर्जा से जुड़े अनुबंध हासिल करने के लिए कथित तौर पर भारतीय अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर से अधिक की रिश्वत देने की योजना से था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि इस कथित योजना से जुड़े तथ्यों को अमेरिकी निवेशकों और वित्तीय संस्थानों से छिपाया गया। अदाणी और अन्य आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया था।
यह मामला सामने आने के बाद अदाणी समूह के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी कानूनी और कारोबारी चुनौती पैदा हो गई थी। अमेरिकी अदालत में मामला चलने के कारण वैश्विक निवेशकों और बाजारों की भी इस पर नजर थी।
हालांकि अब अमेरिकी न्याय विभाग ने मामले को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया और अदालत से आरोपों को खारिज करने की मांग की। जज गराउफिस ने अंततः इस मांग को मंजूरी दे दी। रिपोर्टों के अनुसार यह आपराधिक मामला अब समाप्त हो गया है।
जज ने पहले DOJ से मांगा था जवाब
इस मामले में एक अहम मोड़ तब आया था, जब अमेरिकी न्याय विभाग ने केस को खारिज करने की मांग की थी। जज निकोलस गराउफिस ने शुरुआत में अभियोजन पक्ष की दलीलों को पर्याप्त विस्तार वाला नहीं माना था और DOJ से यह स्पष्ट करने को कहा था कि आखिर वह इतने महत्वपूर्ण मामले को क्यों समाप्त करना चाहता है।
अदालत ने अभियोजन पक्ष से केस खारिज करने के आधार और उनके समर्थन में पर्याप्त तथ्य पेश करने को कहा था। कोर्ट के दस्तावेज में सरकार की शुरुआती मांग को संक्षिप्त और अपर्याप्त बताया गया था।
इसके बाद न्याय विभाग ने अदालत को विस्तृत जवाब दिया और मामले को आगे न बढ़ाने के पीछे कानूनी और व्यावहारिक कारण बताए। DOJ ने अपनी स्थिति में कहा कि अभियोजन पक्ष अब इन आपराधिक आरोपों पर आगे संसाधन खर्च नहीं करना चाहता।
फैसला सुनाते समय जज ने जताई चिंता
हालांकि अदालत ने केस खारिज करने की अनुमति दे दी, लेकिन जज गराउफिस ने न्याय विभाग की प्रक्रिया को लेकर चिंता भी जताई। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने वरिष्ठ DOJ अधिकारी ट्रेंट मैककॉट्टर के मामले को संभालने के तरीके की आलोचना की और इसे असामान्य बताया।
जज ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके सामने यह सवाल था कि सरकार द्वारा मामला वापस लेने के फैसले की न्यायिक समीक्षा की सीमा कितनी है। अदालत ने यह संकेत दिया कि अभियोजन संबंधी फैसलों में न्यायाधीशों की भूमिका सीमित होती है।
एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जज ने इस बात को स्वीकार नहीं किया कि अदाणी समूह की अमेरिका में निवेश संबंधी घोषणाओं का केस खारिज करने के फैसले पर प्रभाव पड़ा। यानी अदालत के फैसले में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया कि किसी निवेश प्रस्ताव के बदले आपराधिक मामला खत्म किया गया।
अदाणी बोले- न्याय प्रक्रिया का सम्मान करता हूं
फैसले के बाद गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करने की बात कही। उन्होंने कानून में अपने अटूट विश्वास को दोहराया और उन सभी लोगों का आभार जताया जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उनका समर्थन किया।
अदाणी की प्रतिक्रिया को उनके लिए लंबे समय से चले आ रहे अमेरिकी आपराधिक मामले के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब दो साल से यह मामला उनके कारोबारी समूह के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ था।
अदाणी ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि वह आगे भी देश के विकास और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहते हैं।
अदाणी समूह के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
अदाणी समूह के लिए अमेरिकी आपराधिक मामले का खत्म होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय कारोबार करने वाले किसी भी बड़े कॉरपोरेट समूह के लिए कानूनी मामलों का असर निवेशकों के भरोसे, कारोबारी विस्तार और वैश्विक प्रतिष्ठा पर पड़ सकता है।
ऐसे में अमेरिकी अदालत से आपराधिक मामले के खारिज होने को समूह के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस फैसले को सभी कानूनी विवादों के पूरी तरह खत्म होने के रूप में देखना सही नहीं होगा।
अदाणी से जुड़े कुछ अलग सिविल और नियामकीय मामले अमेरिकी स्तर पर अलग प्रक्रियाओं के तहत रहे हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिकी SEC से संबंधित सिविल कार्रवाई आपराधिक मामले से अलग है। मई 2026 में SEC ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी से संबंधित दावों के निपटारे के लिए प्रस्तावित अंतिम आदेश अदालत में दाखिल किए थे।
इसलिए मौजूदा फैसला विशेष रूप से DOJ द्वारा चलाए गए आपराधिक मामले के संदर्भ में बड़ी राहत है।
2024 में शुरू हुआ था मामला
गौतम अदाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ अमेरिकी अभियोग अक्टूबर 2024 में सामने आया था। अभियोजन पक्ष ने कथित तौर पर भारत में सौर ऊर्जा आपूर्ति अनुबंध हासिल करने के लिए रिश्वत की योजना और उससे जुड़े अमेरिकी निवेशकों को कथित रूप से गुमराह करने के आरोप लगाए थे।
उस समय इस मामले ने भारत और अमेरिका दोनों में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अदाणी समूह ने लगातार आरोपों से इनकार किया और कानूनी प्रक्रिया का सामना करने की बात कही थी।
अब अमेरिकी अदालत द्वारा आपराधिक मामले को खारिज किए जाने के बाद इस मामले में अदाणी समूह को बड़ी राहत मिली है।
निवेश और राष्ट्र निर्माण पर अदाणी का जोर
फैसले के बाद गौतम अदाणी का बयान केवल कानूनी राहत तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भविष्य में भी राष्ट्र निर्माण और विकास से जुड़े कार्यों को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।
अदाणी समूह ऊर्जा, बंदरगाह, हवाईअड्डे, बुनियादी ढांचे और अन्य क्षेत्रों में बड़े स्तर पर कारोबार करता है। ऐसे में समूह के लिए वैश्विक कानूनी अनिश्चितता कम होना कारोबारी दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
हालांकि अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद भी निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजर समूह से जुड़े अन्य मामलों और आगे की कानूनी प्रक्रियाओं पर बनी रहेगी।
अमेरिकी कोर्ट का फैसला अदाणी के लिए बड़ी राहत, लेकिन जज की टिप्पणी भी चर्चा में
कुल मिलाकर अमेरिकी अदालत का यह फैसला गौतम अदाणी के लिए एक बड़ी कानूनी राहत है। DOJ की मांग को स्वीकार करते हुए अदालत ने रिश्वत और धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक मामले को समाप्त कर दिया है।
हालांकि, इस फैसले के साथ जज निकोलस गराउफिस की टिप्पणियां भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने मामला वापस लेने की सरकारी प्रक्रिया और उसके पीछे अपनाए गए तरीके को लेकर सवाल और चिंता जाहिर की। फिर भी अदालत ने अंततः अभियोजन पक्ष की मांग स्वीकार कर केस को खत्म करने की अनुमति दे दी।
गौतम अदाणी के लिए यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी आपराधिक मामला लंबे समय से उनके वैश्विक कारोबारी समूह पर मंडरा रही एक बड़ी कानूनी चुनौती था। अब इस मामले के खारिज होने के बाद अदाणी समूह के लिए आगे की कारोबारी रणनीति पर ध्यान केंद्रित करने की राह अपेक्षाकृत साफ हुई है।
अदाणी ने भी साफ संदेश दिया है कि वह अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, कानून के शासन में उनका भरोसा कायम है और राष्ट्र निर्माण की दिशा में उनका काम आगे भी जारी रहेगा।
