उत्तराखंड के सीमांत चमोली में अतिवृष्टि से मचा हाहाकार, ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक नाले का उफान बना आफत; पुल बहने से मलारी और सीमांत गांवों की आवाजाही प्रभावित, SDRF-NDRF की टीमें रेस्क्यू के लिए रवाना
चमोली: उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली में बारिश ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। भारत-चीन सीमा से सटी नीती घाटी में अचानक आए भीषण जलसैलाब ने भारी तबाही मचा दी। ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक नाले में अचानक पानी का प्रवाह बढ़ने से वैली ब्रिज पूरी तरह बह गया। तेज बहाव की चपेट में कई वाहन भी आ गए। वहीं, एक BRO कर्मी के लापता होने की सूचना सामने आई है। घटना के बाद पूरे सीमांत क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
अचानक आई बाढ़ जैसी स्थिति के कारण नीती घाटी की ओर जाने वाला सड़क संपर्क बाधित हो गया है। मलारी से आगे आवाजाही रोक दी गई है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और जलप्रवाह वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। वहीं, लापता BRO कर्मी की तलाश के लिए राहत और बचाव दलों को सक्रिय किया गया है। भारी बारिश, अंधेरा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां रेस्क्यू अभियान के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
तमक नाले में अचानक बढ़ा पानी, देखते ही देखते बह गया पुल
जानकारी के मुताबिक, यह घटना ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर शाम करीब साढ़े पांच बजे के आसपास हुई। तमक इलाके में अचानक तेज बारिश के बाद नाले का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में एक के बाद एक तीन बार अतिवृष्टि हुई, जिसके बाद तमक नाले में पानी का प्रवाह बेहद तेज हो गया।
पानी और मलबे का बहाव इतना शक्तिशाली था कि नाले पर बनाया गया वैली ब्रिज कुछ ही पलों में इसकी चपेट में आकर बह गया। जिस समय पानी का बहाव बढ़ा, उस दौरान आसपास मौजूद वाहनों को भी खतरा पैदा हो गया। देखते ही देखते पूरा इलाका पानी और मलबे की चपेट में आ गया।
घटना के वीडियो में पानी का भयावह रूप साफ दिखाई दे रहा है। तेज बहाव के बीच एक वाहन बहता हुआ नजर आ रहा है, जबकि सड़क पर मौजूद पोकलैंड मशीन भी पानी के बीच फंसी दिखाई देती है। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति की आवाज में भी घटना की भयावहता साफ महसूस की जा सकती है।
वैली ब्रिज के साथ वाहन भी आए चपेट में
तमक नाले में आए जलसैलाब ने सिर्फ सड़क मार्ग को ही नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि वहां मौजूद वाहनों को भी अपनी चपेट में ले लिया। जानकारी के अनुसार 123 बीआरटीएफ सुराईथोटा की ओर से निर्मित वैली ब्रिज तेज जलप्रवाह के कारण पूरी तरह बह गया।
घटना के दौरान GREF का स्कॉर्पियो वाहन संख्या 24 BE 16058, बोलेरो कैंपर संख्या 23 B 15947 समेत अन्य वाहन भी प्रभावित हुए। स्कॉर्पियो चालक नायक पंकज कुमार के तेज बहाव में बहने की सूचना सामने आई है। हालांकि वाहन को सुरक्षित साइड किए जाने की जानकारी भी दी गई है, लेकिन संबंधित कर्मी का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
प्रशासन और BRO की ओर से मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के दौरान कितने लोग प्रभावित हुए, इसकी पूरी जानकारी राहत एवं बचाव दलों के मौके पर पहुंचने और स्थिति का विस्तृत आकलन करने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
BRO का एक कर्मी लापता, तलाश में जुटीं रेस्क्यू टीमें
जलसैलाब के बाद सबसे बड़ी चिंता BRO के एक कर्मचारी के लापता होने को लेकर है। ज्योतिर्मठ के उप जिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि उनकी BRO के मेजर से टेलीफोन पर बातचीत हुई है। मेजर की ओर से एक कर्मचारी के लापता होने की जानकारी दी गई है।
आशंका जताई जा रही है कि अचानक बढ़े पानी के तेज बहाव के दौरान कर्मचारी उसकी चपेट में आ गया। उसकी तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया जा रहा है। हालांकि घटनास्थल पर भारी बारिश और अंधेरा होने के कारण तत्काल बड़े स्तर पर अभियान चलाने में कठिनाई आ रही है।
प्रशासन के मुताबिक मौसम और परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। जैसे ही परिस्थितियां अनुकूल होंगी, लापता कर्मी की तलाश के लिए व्यापक स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जाएगा।
चमोली के डीएम ने दी स्थिति की जानकारी
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार के मुताबिक, प्रारंभिक सूचना में एक ब्रिज, एक वाहन, एक ट्रक और हवलदार रैंक के एक कर्मचारी के बहने की सूचना मिली है। बाकी कर्मचारियों और प्रभावित लोगों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
प्रशासन की टीमें लगातार घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों से सूचनाएं जुटा रही हैं। सीमांत क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए किसी भी अफवाह के बजाय आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई है।
मलारी की ओर आवाजाही पूरी तरह रोकी गई
वैली ब्रिज बहने के बाद नीती घाटी और सीमांत क्षेत्र की ओर जाने वाला सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सुरक्षा के मद्देनजर सुराईथोटा से तमक और मलारी की ओर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।
प्रशासन ने साफ किया है कि जब तक मार्ग की स्थिति का आकलन नहीं कर लिया जाता और आवाजाही सुरक्षित घोषित नहीं होती, तब तक लोगों को इस मार्ग पर जाने से बचना चाहिए।
यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि नीती घाटी भारत-चीन सीमा के निकट स्थित है। इसके अलावा सीमांत गांवों और स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही भी इसी सड़क नेटवर्क पर काफी हद तक निर्भर रहती है। ऐसे में पुल के बह जाने से आने वाले समय में क्षेत्र में आवागमन और जरूरी सामान की आपूर्ति को लेकर भी चुनौती पैदा हो सकती है।
धौलीगंगा और अलकनंदा नदी के जलस्तर को लेकर भी सतर्कता
तमक नाले में जलसैलाब के बाद प्रशासन ने आसपास की नदियों और जलधाराओं को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी है। धौलीगंगा नदी के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधान किया गया है।
वहीं, नीती घाटी में भारी बारिश के कारण अलकनंदा नदी का जलस्तर भी बढ़ने की जानकारी सामने आई है। पुलिस और प्रशासन की ओर से नदी किनारे रहने वाले लोगों को लाउडस्पीकर और अनाउंसमेंट के जरिए सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।
लोगों से कहा गया है कि वे नदी, नाले, गदेरों और अन्य जलप्रवाह वाले क्षेत्रों के आसपास जाने से बचें। बारिश के दौरान पहाड़ों में जलधाराओं का स्वरूप अचानक बदल सकता है। ऐसे में सामान्य दिखाई देने वाला नाला भी कुछ ही मिनटों में बेहद खतरनाक हो सकता है।
जल विद्युत परियोजनाओं को भी किया गया अलर्ट
घटना के बाद आसपास संचालित जल विद्युत परियोजनाओं में कार्यरत संबंधित कंपनियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को जलस्तर में होने वाले बदलाव पर लगातार नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
पुलिस बल को भी घटनास्थल और आसपास के क्षेत्रों में तैनात किया गया है, ताकि लोगों को जोखिम वाले क्षेत्रों में जाने से रोका जा सके और जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
SDRF और NDRF की टीमें मौके के लिए रवाना
तमक नाले में जलसैलाब और पुल बहने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन विभाग के साथ SDRF और NDRF की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना की गई हैं।
रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती घटनास्थल की भौगोलिक स्थिति और खराब मौसम है। सीमांत क्षेत्र में सड़क संपर्क बाधित होने के कारण बचाव दलों को घटनास्थल तक पहुंचने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
मौके पर पहुंचने के बाद टीमें सबसे पहले स्थिति का आकलन करेंगी। इसके बाद लापता BRO कर्मी की तलाश, प्रभावित वाहनों की स्थिति और आसपास फंसे लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बचाव दल और संसाधनों को भी सक्रिय किया जाएगा।
मुख्यमंत्री धामी ने लिया तत्काल संज्ञान
चमोली में वैली ब्रिज बहने की घटना का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से घटना की जानकारी ली और अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निचले क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती कदम उठाने, संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्थिति सामान्य होने तक प्रभावित मार्ग पर आवाजाही प्रतिबंधित रखने को कहा है।
सीएम धामी ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि वैली ब्रिज बहने के कारण आसपास के गांवों में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। यदि सड़क संपर्क लंबे समय तक बाधित रहता है तो वैकल्पिक मार्गों के माध्यम से जरूरी सामान ग्रामीणों तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
नदी-नालों के पास रहने वालों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने नदी-नालों और जलप्रवाह वाले क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रखने के निर्देश दिए हैं। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को कहा गया है।
उत्तराखंड में मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक अतिवृष्टि और तेज जलप्रवाह की घटनाएं चुनौती बनती हैं। ऐसे में प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी संभावित खतरे को पहले ही भांपकर लोगों को सुरक्षित किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय बनाए रखने और राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रखने के निर्देश दिए हैं।
SEOC से 24 घंटे निगरानी, अधिकारियों से लगातार संपर्क
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से चमोली समेत प्रदेश के सभी संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर 24×7 निगरानी रखी जा रही है।
जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारियों से लगातार समन्वय किया जा रहा है। किसी भी क्षेत्र में आवश्यकता सामने आने पर राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक नाले में 123 बीआरटीएफ सुराईथोटा की ओर से निर्मित वैली ब्रिज अत्यधिक जलप्रवाह के कारण पूरी तरह बह गया है। प्रारंभिक सूचना के अनुसार नाले में अचानक बढ़े पानी की चपेट में आने से एक व्यक्ति और एक वाहन के बहने की सूचना मिली है।
सीमांत गांवों के सामने संपर्क और जरूरी सामान की चुनौती
नीती घाटी का इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ दुर्गम भी है। ऐसे में सड़क संपर्क बाधित होने का सीधा असर सीमांत गांवों पर पड़ सकता है। यदि मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो ग्रामीणों के लिए राशन, दवाइयां और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति चुनौती बन सकती है।
इसी वजह से मुख्यमंत्री ने प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का फोकस केवल रेस्क्यू तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित क्षेत्र में सामान्य जनजीवन को बनाए रखने पर भी है।
बारिश के बीच पहाड़ों में बढ़ा खतरा
चमोली में तमक नाले की यह घटना एक बार फिर बताती है कि मानसून के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम कितनी तेजी से अपना रूप बदल सकता है। कुछ समय पहले तक सामान्य दिखाई देने वाला नाला अचानक उफान पर आ सकता है और कुछ ही मिनटों में सड़क, पुल और वाहनों को अपनी चपेट में ले सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश के दौरान नदियों और नालों के आसपास जाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। प्रशासन भी लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि मौसम खराब होने की स्थिति में अनावश्यक यात्रा न करें और संवेदनशील मार्गों पर जाने से बचें।
प्रशासन की अपील—अफवाहों से बचें, आधिकारिक सूचना पर करें भरोसा
चमोली में घटना के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की सूचनाएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट खबरों और अफवाहों पर भरोसा न करें। प्रभावित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और लापता कर्मी के संबंध में आधिकारिक जानकारी का इंतजार करें।
प्रशासन की प्राथमिकता इस समय लापता व्यक्ति की तलाश, प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और सड़क संपर्क बहाल करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करना है।
चमोली की घटना ने फिर बढ़ाई चिंता
नीती घाटी में तमक नाले का अचानक उफान और वैली ब्रिज का बह जाना उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून की चुनौती को एक बार फिर सामने लाता है। एक तरफ पुल और वाहनों के बहने से सीमांत क्षेत्र का संपर्क प्रभावित हुआ है, तो दूसरी तरफ BRO के एक कर्मचारी के लापता होने की सूचना ने चिंता बढ़ा दी है।
भारी बारिश और अंधेरे के कारण शुरुआती रेस्क्यू अभियान में मुश्किलें जरूर हैं, लेकिन SDRF, NDRF, प्रशासन, पुलिस, BRO और अन्य संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुबह मौसम और परिस्थितियां अनुकूल होने पर व्यापक स्तर पर तलाश और राहत अभियान चलाए जाने की तैयारी है।
फिलहाल तमक से मलारी और नीती घाटी की ओर आवाजाही रोक दी गई है। नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है और संभावित जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।
उत्तराखंड में मानसून अभी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में चमोली की यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है कि सीमांत और संवेदनशील इलाकों में मौसम की हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जाए। अब सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता BRO कर्मी की तलाश, प्रभावित लोगों की सुरक्षा और सीमांत गांवों तक जरूरी सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
