सिक्योरिटी गार्ड पर छात्रा से दुष्कर्म का गंभीर आरोप, वारदात के बाद भी CCTV में सामान्य अंदाज में घूमता दिखा; गिरफ्तारी के दौरान भागने की कोशिश में पैर में लगी गोली, पुलिस के सामने गिड़गिड़ाता नजर आया आरोपी
अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद से छात्राओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। एक पीजी हॉस्टल में रहने वाली छात्रा के साथ कथित तौर पर उसी हॉस्टल के सिक्योरिटी गार्ड ने दुष्कर्म किया। आरोप है कि शनिवार रात छात्रा हॉस्टल की छत पर टहलने गई थी, तभी आरोपी भी वहां पहुंच गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने छत का दरवाजा बंद कर दिया और छात्रा को धमकाकर वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद पीड़िता की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस मामले ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा है क्योंकि पुलिस जांच के दौरान सामने आए CCTV फुटेज में आरोपी वारदात से पहले और बाद में बेहद सामान्य और बेफिक्र अंदाज में दिखाई देता है। फुटेज में वह लिफ्ट के अंदर अपने बाल और चेहरे को ठीक करता नजर आ रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने की कोशिश की और इसी दौरान पुलिस कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। गिरफ्तारी के बाद सामने आए एक वीडियो में वह पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगता दिखाई दे रहा है।
हॉस्टल की छत पर पहुंची थी छात्रा
जानकारी के मुताबिक, पीड़िता पिछले करीब एक साल से इस हॉस्टल में रह रही थी और अक्सर शाम या रात के समय हॉस्टल की छत पर टहलने जाती थी। शनिवार रात भी वह इसी तरह छत पर पहुंची थी। आरोप है कि इसी दौरान हॉस्टल में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम कर रहा आरोपी धर्म सिंह भी वहां पहुंच गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर छत का दरवाजा बंद कर दिया और छात्रा को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की। विरोध करने पर उसने छात्रा को धमकाया और उसके गले में वायर डालकर दबाव बनाया, जिसके चलते वह मदद के लिए आवाज नहीं लगा सकी। इसके बाद आरोपी ने छात्रा के साथ दुष्कर्म किया।
घटना के बाद छात्रा की हालत बिगड़ गई। मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंचने के बाद जांच शुरू की गई और पीड़िता को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जोड़ रही है।
CCTV में दिखी आरोपी की हरकतों ने चौंकाया
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने हॉस्टल में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली। इसी दौरान आरोपी की कई गतिविधियां कैमरे में कैद मिलीं।
फुटेज में आरोपी लिफ्ट में प्रवेश करता दिखाई देता है। पुलिस के मुताबिक, लिफ्ट के अंदर लगे आईने के सामने वह अपने बाल ठीक करता है और चेहरे तथा मूंछों को भी संवारता नजर आता है। बताया जा रहा है कि उसने कई बार अपने बाल ठीक किए। इसके बाद वह लिफ्ट से बाहर निकलकर छत की तरफ जाने वाली सीढ़ियों की ओर बढ़ता दिखाई देता है।
जांच एजेंसियों के लिए यह फुटेज इसलिए अहम है क्योंकि इससे आरोपी की गतिविधियों की टाइमलाइन तैयार करने में मदद मिल सकती है। पुलिस CCTV के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी कब छत की ओर गया, कितनी देर वहां रहा और घटना के बाद किस रास्ते से हॉस्टल से बाहर निकला।
घटना के बाद आरोपी का इस तरह सामान्य तरीके से हॉस्टल से निकलना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात के बाद उसने किन लोगों से संपर्क किया और क्या उसने किसी को घटना की जानकारी दी थी।
सिर्फ चार दिन पहले नौकरी पर आया था आरोपी
जांच में सामने आया है कि आरोपी धर्म सिंह इस हॉस्टल में लंबे समय से काम नहीं कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, वह घटना से महज चार दिन पहले ही यहां सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम पर आया था।
बताया गया है कि आरोपी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले का रहने वाला है। अहमदाबाद में वह पहले भी अलग-अलग कंपनियों में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम कर चुका था।
आरोपी के पिछले रोजगार और उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह इससे पहले किन-किन जगहों पर काम कर चुका है और उसके खिलाफ पहले कोई शिकायत या मामला दर्ज हुआ था या नहीं।
हेबतपुर के पास गिरफ्तारी, भागने की कोशिश का पुलिस का दावा
घटना के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को हेबतपुर के पास ट्रेस किया गया। जब पुलिस टीम उसे पकड़ने पहुंची तो उसने कथित तौर पर भागने की कोशिश की।
पुलिस के अनुसार, आरोपी को रोकने के लिए की गई कार्रवाई के दौरान उसके पैर में गोली लगी और इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। घायल आरोपी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
गिरफ्तारी के बाद सामने आए वीडियो में आरोपी पुलिसकर्मियों के सामने हाथ जोड़ता नजर आ रहा है। वह माफी मांगते हुए दोबारा ऐसा नहीं करने की बात कहता दिखाई देता है। हालांकि, किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद ही तय होती है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पीड़िता की सुरक्षा और मानसिक स्थिति सबसे महत्वपूर्ण
इस घटना ने एक बार फिर छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल तथा पीजी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खास तौर पर ऐसे स्थानों पर जहां बड़ी संख्या में छात्राएं रहती हैं, वहां सुरक्षा कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले उनका पुलिस वेरिफिकेशन, पहचान की जांच और पिछले रोजगार की जानकारी की पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इसके अलावा हॉस्टल की छत, सीढ़ियों, लिफ्ट और अन्य संवेदनशील स्थानों पर CCTV कैमरों की निगरानी, आपातकालीन अलार्म और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी सुरक्षा का अहम हिस्सा हैं। इस मामले में CCTV फुटेज जांच में महत्वपूर्ण साबित हुआ है, लेकिन सवाल यह भी है कि अगर छत तक पहुंचने वाले रास्ते पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती तो क्या घटना को रोका जा सकता था?
हॉस्टल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद हॉस्टल और पीजी संचालकों की जिम्मेदारी को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। छात्राएं अक्सर पढ़ाई या नौकरी के लिए घर से दूर शहरों में रहती हैं और हॉस्टल को अपना सुरक्षित स्थान मानती हैं। ऐसे में वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और अन्य कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच में किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों और महिला सुरक्षा से जुड़े लोगों का लंबे समय से कहना रहा है कि केवल CCTV कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं है। कैमरों की नियमित निगरानी, प्रवेश और निकास का रिकॉर्ड, कर्मचारियों का सत्यापन तथा आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी जरूरी है।
जांच में इन सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस
पुलिस अब कई अहम बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ा रही है। इनमें आरोपी की पूरी पृष्ठभूमि, हॉस्टल में उसकी नियुक्ति की प्रक्रिया, घटना के समय उसकी गतिविधियां, CCTV फुटेज, मौके से मिले संभावित साक्ष्य और पीड़िता के बयान शामिल हैं।
इसके साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय हॉस्टल में कौन-कौन से कर्मचारी मौजूद थे और आरोपी को छत तक पहुंचने का मौका कैसे मिला। CCTV फुटेज के अलावा मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच भी मामले को स्पष्ट करने में मदद कर सकती है।
अहमदाबाद की यह घटना केवल एक आपराधिक मामले की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है जो पढ़ाई और करियर के लिए घर से दूर हॉस्टल या पीजी में रहती हैं। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच निष्पक्ष और साक्ष्य आधारित तरीके से पूरी हो, पीड़िता को आवश्यक चिकित्सा एवं मानसिक सहायता मिले और दोष साबित होने पर कानून के तहत कड़ी कार्रवाई हो।
