हरकी पैड़ी से वीरभद्र शिव मंदिर तक पैदल यात्रा, गंगा पूजन के बाद शुरू हुई कांवड़ यात्रा; संतों ने कहा- खेलों के जरिए देश का गौरव बढ़ाना भी राष्ट्रसेवा
हरिद्वार: उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने सोमवार, 10 अगस्त को हरिद्वार की पवित्र हरकी पैड़ी से अपनी कांवड़ यात्रा शुरू की। गंगा पूजन और विधि-विधान के साथ मां गंगा का आशीर्वाद लेने के बाद वह गंगाजल लेकर पैदल ऋषिकेश के वीरभद्र शिव मंदिर के लिए रवाना हुईं। करीब 26 किलोमीटर लंबी इस कांवड़ यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ खेलों और देश के भविष्य से जुड़े दो बड़े संकल्प भी जुड़े हैं।
रेखा आर्या ने इस बार भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की है कि भारत को वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी का अवसर मिले और देश खेलों के क्षेत्र में विश्व की खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित हो। इन दोनों संकल्पों के साथ खेल मंत्री हरकी पैड़ी से पैदल यात्रा पर निकलीं। उनके साथ उनके पति समेत कई खेल प्रेमी, श्रद्धालु और साधु-संत भी मौजूद रहे।
गंगा पूजन के बाद शुरू हुई कांवड़ यात्रा
कांवड़ यात्रा शुरू करने से पहले रेखा आर्या ने हरकी पैड़ी पहुंचकर मां गंगा को नमन किया। उन्होंने विधि-विधान के साथ गंगा पूजन और आरती कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद जयघोष और भोलेनाथ की भक्ति के बीच उन्होंने कांवड़ उठाई और पैदल यात्रा शुरू की।
यात्रा के दौरान माहौल पूरी तरह शिवमय नजर आया। भोलेनाथ के भक्ति गीतों और जयकारों के बीच कांवड़ यात्रा आगे बढ़ी। इस दौरान बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और समर्थक भी उनके साथ दिखाई दिए। यात्रा का अंतिम पड़ाव ऋषिकेश स्थित वीरभद्र शिव मंदिर है, जहां पहुंचकर रेखा आर्या भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करेंगी।
दो संकल्पों के साथ भगवान शिव की शरण में खेल मंत्री
इस बार रेखा आर्या की कांवड़ यात्रा का सबसे खास पहलू उनके दो संकल्प हैं। पहला संकल्प भारत की 2036 ओलंपिक मेजबानी से जुड़ा है। उनका कहना है कि भारत को ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिले और इसका सफल आयोजन हो, इसके लिए वह भगवान शिव से प्रार्थना कर रही हैं।
उनका दूसरा संकल्प भारत को खेलों के क्षेत्र में दुनिया की प्रमुख खेल शक्तियों में शामिल करने का है। रेखा आर्या का मानना है कि देश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यदि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और उचित अवसर मिलें तो भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है।
उन्होंने विश्वास जताया कि भगवान भोलेनाथ के आशीर्वाद से उनके दोनों संकल्प अवश्य पूरे होंगे। उनके अनुसार खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे देश के युवाओं को अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा भी मिलती है।
संतों ने की रेखा आर्या के संकल्पों की सराहना
रेखा आर्या की कांवड़ यात्रा में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज और महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज समेत कई साधु-संत भी मौजूद रहे। संतों ने खेल मंत्री की शिव भक्ति और उनके संकल्पों की सराहना की।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि खेलों के माध्यम से देश का गौरव बढ़ाना भी राष्ट्रसेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की कि रेखा आर्या के दोनों संकल्प पूरे हों और भारत खेल जगत में नई ऊंचाइयों को हासिल करे।
संतों ने यह भी कहा कि युवाओं को खेलों से जोड़ना आज के समय की बड़ी जरूरत है। खेलों के माध्यम से युवा न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनते हैं, बल्कि उनमें अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक सोच का भी विकास होता है।
पति के साथ हरिद्वार पहुंचीं रेखा आर्या
कांवड़ यात्रा से पहले रेखा आर्या अपने पति के साथ हरिद्वार पहुंची थीं। उन्होंने सबसे पहले मां गंगा की पूजा-अर्चना की और देश तथा उत्तराखंड की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज और निरंजनी अखाड़े के सचिव रामरतन गिरि से मुलाकात की और उन्हें अपनी कांवड़ यात्रा में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
इस दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण के साथ खेलों को लेकर भी चर्चा हुई। रेखा आर्या ने कहा कि उनकी यह यात्रा आस्था के साथ-साथ देश के खेल भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देने का प्रयास है।
पिछले साल भी की थी 26 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा
रेखा आर्या के लिए कांवड़ यात्रा कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी वह पैदल कांवड़ यात्रा कर चुकी हैं। पिछले वर्ष उन्होंने हरकी पैड़ी से गंगाजल उठाकर करीब 26 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की थी और ऋषिकेश के वीरभद्र मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया था।
पिछले साल उनकी कांवड़ यात्रा का संकल्प ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से जुड़ा था। उन्होंने बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को लेकर जागरूकता का संदेश दिया था। इस बार उन्होंने अपने संकल्पों का केंद्र खेलों और भारत के अंतरराष्ट्रीय खेल भविष्य को बनाया है।
धार्मिक आस्था के साथ खेल संस्कृति का संदेश
रेखा आर्या की इस कांवड़ यात्रा को धार्मिक आस्था के साथ-साथ खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की पहल के रूप में भी देखा जा रहा है। एक ओर वह गंगाजल लेकर भगवान शिव के धाम तक पैदल यात्रा कर रही हैं, तो दूसरी ओर उनके संकल्प देश के करोड़ों युवाओं और खिलाड़ियों से जुड़े हैं।
भारत में खेलों को लेकर पिछले कुछ वर्षों में युवाओं की रुचि तेजी से बढ़ी है। ऐसे में 2036 ओलंपिक की मेजबानी और भारत को खेलों की वैश्विक शक्ति बनाने का संकल्प देश के खेल भविष्य के लिए एक बड़े लक्ष्य की ओर संकेत करता है।
हरकी पैड़ी से शुरू हुई यह 26 किलोमीटर की यात्रा अब वीरभद्र मंदिर में भगवान शिव के जलाभिषेक के साथ पूरी होगी। रेखा आर्या ने उम्मीद जताई है कि बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद देश और प्रदेश को मिलेगा और उनके दोनों संकल्प सफल होंगे।
इस तरह रेखा आर्या की कांवड़ यात्रा में आस्था, संकल्प और खेल—तीनों का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। गंगाजल लेकर भगवान शिव की शरण में पहुंचने वाली खेल मंत्री इस यात्रा के जरिए जहां सनातन आस्था का संदेश दे रही हैं, वहीं देश के युवाओं को खेलों के क्षेत्र में आगे बढ़ने और भारत को वैश्विक खेल शक्ति बनाने का संकल्प भी दोहरा रही हैं।
