पहाड़ी दरकने से सरकारी आवास की दीवार टूटी, कमरे में जा घुसा भारी पत्थर; गनीमत रही कि हादसे के वक्त कमरे में कोई नहीं था, वरना हो सकता था बड़ा हादसा—ऊपर बना पानी का टैंक भी बना चिंता का कारण
मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। लगातार बारिश के बीच पहाड़ियों के दरकने और जगह-जगह भूस्खलन की घटनाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार सुबह मसूरी एसडीएम कार्यालय परिसर स्थित सरकारी कर्मचारी आवासों में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया और भारी-भरकम बोल्डर एक सरकारी आवास की दीवार तोड़ते हुए कमरे के अंदर जा घुसा। हादसे के वक्त कमरे में कोई मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
बोल्डर के कमरे में घुसने की घटना ने पूरे कर्मचारी परिसर में दहशत पैदा कर दी। घटना के बाद आसपास रहने वाले कर्मचारी और उनके परिवार तत्काल अपने घरों से बाहर निकल आए। कर्मचारियों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार पहाड़ी से पत्थर गिर रहे हैं और बारिश के दौरान स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है। ऐसे में परिवार के साथ सरकारी आवास में रहना अब उनके लिए बेहद जोखिम भरा हो गया है।
कमरे में घुसा विशाल बोल्डर, दीवार हुई क्षतिग्रस्त
बताया जा रहा है कि सुबह अचानक पहाड़ी का एक हिस्सा खिसका और उसके साथ बड़े-बड़े पत्थर नीचे की ओर आने लगे। इनमें से एक भारी बोल्डर सीधे सरकारी आवास की ओर आया और दीवार को तोड़ते हुए कमरे के अंदर जा घुसा। बोल्डर की टक्कर से आवास को नुकसान पहुंचा है।
सबसे राहत की बात यह रही कि जिस कमरे में बोल्डर गिरा, उस समय वहां कोई कर्मचारी या परिवार का सदस्य मौजूद नहीं था। अगर उस समय कमरे में कोई व्यक्ति होता तो उसकी जान पर बन सकती थी। हादसे के बाद कर्मचारियों के बीच भय का माहौल है और उन्हें आशंका है कि लगातार बारिश के कारण पहाड़ी का और हिस्सा भी कभी भी खिसक सकता है।
कर्मचारियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके में पत्थर गिरने की समस्या सामने आई हो। बारिश के दौरान पहाड़ी से लगातार मलबा और छोटे-बड़े पत्थर गिरते रहते हैं। अब बड़े बोल्डर के आवास में घुसने की घटना ने खतरे की गंभीरता को सामने ला दिया है।
‘परिवार की सुरक्षा से बड़ी नौकरी नहीं’, कर्मचारियों में गुस्सा और डर
एसडीएम कार्यालय परिसर में रहने वाले करीब पांच कर्मचारियों और उनके परिवारों ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी ड्यूटी पूरी जिम्मेदारी से निभाना चाहते हैं, लेकिन अपने परिवार की जान जोखिम में डालकर सरकारी आवास में रहना संभव नहीं है।
कुछ कर्मचारियों ने बेहद चिंता जताते हुए कहा कि उनकी नौकरी के कुछ ही वर्ष बाकी हैं, लेकिन यदि आवास में रहना उनके परिवार के लिए खतरा बन गया है तो वे ऐसी स्थिति में नौकरी छोड़ने तक का फैसला लेने को मजबूर हो सकते हैं।
उनका कहना है कि नौकरी दोबारा मिलना या नौकरी का नुकसान सहना संभव हो सकता है, लेकिन परिवार के किसी सदस्य की जान जाने के बाद उसकी भरपाई नहीं की जा सकती। यही वजह है कि कर्मचारी प्रशासन से जल्द से जल्द वैकल्पिक आवास या सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं।
ऊपर बना पानी का टैंक बना बड़ी चिंता
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चिंता सिर्फ भूस्खलन या बोल्डर गिरने की नहीं है। कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने सरकारी आवासों के ऊपर पहाड़ी पर बने जल संस्थान के बड़े पानी के टैंक को लेकर भी चिंता जताई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक इस टैंक में बड़ी मात्रा में पानी जमा रहता है। लगातार बारिश के कारण अगर पहाड़ी और कमजोर होती है और भूस्खलन के कारण टैंक की संरचना प्रभावित होती है, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल क्षतिग्रस्त आवास की मरम्मत तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरे क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए। यह भी जांच जरूरी है कि पहाड़ी की स्थिरता कितनी है और ऊपर मौजूद जल टैंक, निर्माण कार्य तथा अन्य संरचनाओं का भूस्खलन के खतरे पर कितना असर पड़ रहा है।
पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में निर्माण कार्य पर भी सवाल
स्थानीय लोगों ने पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में कथित तौर पर चल रहे निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि क्षेत्र में खुदाई और अन्य निर्माण गतिविधियां चल रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि संवेदनशील पहाड़ी पर लगातार खुदाई की जा रही है तो इससे जमीन की स्थिरता प्रभावित हो सकती है और बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य की अनुमति, पहाड़ी की स्थिति और वहां की गई खुदाई की तकनीकी जांच कराई जाए। यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे एसडीएम
हादसे की जानकारी मिलते ही मसूरी एसडीएम राहुल आनंद मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित सरकारी आवास का निरीक्षण किया और कर्मचारियों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली। एसडीएम ने प्रभावित कर्मचारियों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
प्रशासन की ओर से क्षेत्र की निगरानी बढ़ाने और आवश्यक सुरक्षा कदम उठाने की बात कही गई है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, क्योंकि बारिश के बीच दोबारा भूस्खलन या पत्थर गिरने की आशंका बनी हुई है।
पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी भी मौके पर पहुंचीं
घटना की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मीरा सकलानी भी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और एसडीएम से दूरभाष पर बातचीत कर प्रभावित कर्मचारियों तथा उनके परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की मांग की।
पालिकाध्यक्ष ने भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अब बेहद संवेदनशील हो चुका है और प्रशासन को प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
मीरा सकलानी ने इस घटना को एक गंभीर विडंबना बताते हुए कहा कि जो प्रशासनिक कर्मचारी हर आपदा के समय आम लोगों की मदद के लिए सबसे पहले आगे आते हैं, आज वही कर्मचारी खुद आपदा के खतरे के बीच रहने को मजबूर हैं। ऐसे में सभी संबंधित विभागों को संवेदनशीलता के साथ काम करते हुए तत्काल सुरक्षित व्यवस्था करनी चाहिए।
लगातार बारिश ने बढ़ाया पहाड़ों में खतरा
मसूरी और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा लगातार बना रहता है। पहाड़ी इलाकों में लंबे समय तक होने वाली बारिश जमीन के भीतर पानी की मात्रा बढ़ा देती है, जिससे कई स्थानों पर मिट्टी और चट्टानों की पकड़ कमजोर पड़ सकती है। इसके बाद अचानक मलबा और बोल्डर नीचे की ओर आने का खतरा बढ़ जाता है।
मसूरी एसडीएम कार्यालय परिसर की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में बने सरकारी और निजी आवासों की नियमित सुरक्षा जांच हो रही है?
विशेषज्ञों की सलाह रहती है कि लगातार बारिश के दौरान ऐसी ढलानों और पहाड़ियों के बिल्कुल नीचे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि किसी स्थान पर पहले से दरारें दिखाई दे रही हों, पत्थर गिर रहे हों या जमीन खिसकने के संकेत मिल रहे हों, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती
मसूरी की इस घटना के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित कर्मचारियों और उनके परिवारों को सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की है। इसके साथ ही उस पहाड़ी का तकनीकी और भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाना भी बेहद जरूरी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भूस्खलन का वास्तविक कारण क्या है और भविष्य में यहां दोबारा ऐसी घटना होने की कितनी संभावना है।
जल संस्थान के पानी के टैंक, आसपास चल रहे निर्माण कार्य, पहाड़ी की ढलान और सरकारी आवासों की स्थिति की भी जांच की आवश्यकता है। यदि खतरा गंभीर पाया जाता है तो स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए।
फिलहाल मसूरी में एक सरकारी कर्मचारी के आवास में घुसा यह विशाल बोल्डर सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बढ़ते भूस्खलन के खतरे की गंभीर चेतावनी है। गनीमत रही कि हादसे के वक्त कमरे में कोई मौजूद नहीं था और एक बड़ा जानलेवा हादसा टल गया। लेकिन कर्मचारियों का डर पूरी तरह जायज है—अगर अगली बार बोल्डर गिरने के वक्त कमरे में कोई मौजूद हुआ तो क्या होगा?
इसी सवाल का जवाब प्रशासन को समय रहते तलाशना होगा। क्योंकि आपदा के बाद राहत पहुंचाने से बेहतर है कि आपदा आने से पहले खतरे की पहचान कर लोगों को सुरक्षित कर दिया जाए। मसूरी के इस संवेदनशील इलाके में अब यही सबसे बड़ी जरूरत है।
