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The Hill India > Blog > देश > JPSC-JSSC आंदोलन बना झारखंड की सबसे बड़ी युवा लड़ाई! सरकार से वार्ता के लिए 11 सदस्यीय टीम तैयार, आज विधानसभा घेराव; परीक्षा रद्द, निष्पक्ष जांच और भर्ती सुधार पर अड़े छात्र
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JPSC-JSSC आंदोलन बना झारखंड की सबसे बड़ी युवा लड़ाई! सरकार से वार्ता के लिए 11 सदस्यीय टीम तैयार, आज विधानसभा घेराव; परीक्षा रद्द, निष्पक्ष जांच और भर्ती सुधार पर अड़े छात्र

The Hill India News
Last updated: August 7, 2026 4:47 am
The Hill India News
Published: August 7, 2026
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रांची: झारखंड में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन अब अपने सबसे निर्णायक चरण में पहुंच गया है। पिछले दो सप्ताह से राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों अभ्यर्थी लगातार धरना देकर परीक्षा रद्द करने, उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और पूरी भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। गुरुवार को जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात और सरकार के साथ संभावित वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के गठन के बाद उम्मीदें बढ़ी हैं कि गतिरोध समाप्त करने की दिशा में कोई ठोस पहल हो सकती है।

Contents
14वें दिन भी जारी रहा आंदोलन, सरकार से बातचीत पर टिकी सबकी नजरप्रशासन ने बढ़ाया संवाद का हाथ, SDM और ADM पहुंचे धरना स्थलसरकार से वार्ता के लिए बना 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडलआज विधानसभा घेराव, बड़ी संख्या में जुटेंगे छात्र संगठनछात्रों का आरोप—सरकार पहले भी कर चुकी है भरोसा तोड़ने की कोशिशराहुल गांधी ने फोन पर की छात्रों से बातचीतबीजेपी का पलटवार—’हबीबी राहुल तुम कब आओगे?’विधानसभा के बाहर भाजपा का प्रदर्शनदेवेंद्र नाथ महतो के अनशन पर भी बनी चर्चासरकार का पक्ष—19 गिरफ्तारियां, जांच जारीयुवाओं के भविष्य से जुड़ा अहम मोड़

हालांकि दूसरी ओर छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा। इसी क्रम में आज विधानसभा घेराव का भी ऐलान किया गया है, जिससे राज्य की राजनीति और प्रशासन दोनों की निगाहें इस आंदोलन पर टिक गई हैं।

14वें दिन भी जारी रहा आंदोलन, सरकार से बातचीत पर टिकी सबकी नजर

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी धरना अब अपने 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है। लगातार बारिश, कठिन परिस्थितियों और लंबे इंतजार के बावजूद छात्रों का उत्साह कम नहीं हुआ है। हजारों युवा दिन-रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

आज का दिन आंदोलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच औपचारिक वार्ता होने की संभावना है। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो समाधान का रास्ता निकल सकता है, लेकिन यदि वार्ता विफल होती है तो आंदोलन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

प्रशासन ने बढ़ाया संवाद का हाथ, SDM और ADM पहुंचे धरना स्थल

बढ़ते जनसमर्थन और आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने पहली बार सीधे छात्रों के बीच पहुंचकर बातचीत की पहल की। रांची सदर एसडीएम रजत कुमार और एडीएम धनंजय कुमार जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों से विस्तार से चर्चा की।

एसडीएम रजत कुमार ने कहा कि प्रशासन छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से समझना चाहता है और सरकार तक उनकी मांगों को पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बातचीत के जरिए समाधान निकालना ही सबसे बेहतर रास्ता है ताकि युवाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके।

प्रशासनिक अधिकारियों की इस पहल को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, हालांकि छात्रों का कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस निर्णय की आवश्यकता है।

सरकार से वार्ता के लिए बना 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच ने सरकार के साथ बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है। इस टीम में आठ छात्र प्रतिनिधि, एक वरिष्ठ अधिवक्ता और दो तकनीकी विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख छात्र नेताओं में पीयूष कुमार सिंह, रविंद्र पासवान, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, रविंद्र, अंकित कुमार और शालू सिंह शामिल हैं।

छात्रों ने स्पष्ट किया है कि इस बार किसी बंद कमरे में बातचीत स्वीकार नहीं होगी। उनकी मांग है कि पूरी वार्ता मीडिया की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से हो ताकि किसी भी प्रकार के भ्रम या विवाद की स्थिति पैदा न हो।

आज विधानसभा घेराव, बड़ी संख्या में जुटेंगे छात्र संगठन

छात्र आंदोलन को अब विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों का भी व्यापक समर्थन मिलने लगा है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने 7 अगस्त को विधानसभा घेराव का आह्वान किया है।

सुबह 11 बजे AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोड़ा आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात करेंगी। इसके बाद दोपहर एक बजे बिरसा मुंडा चौक से विधानसभा तक विशाल विरोध मार्च निकाला जाएगा।

इस मार्च में AISA के अलावा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) सहित कई वामपंथी छात्र संगठन संयुक्त रूप से भाग लेंगे।

आयोजकों का दावा है कि इस विरोध मार्च में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

छात्रों का आरोप—सरकार पहले भी कर चुकी है भरोसा तोड़ने की कोशिश

धरना स्थल पर मौजूद कई छात्रों ने सरकार पर अविश्वास जताते हुए कहा कि पहले भी प्रतिनिधियों को बंद कमरे में बुलाकर बातचीत की गई थी लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।

प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं सार्वजनिक मंच पर आकर छात्रों से संवाद करें और स्पष्ट घोषणा करें तभी समाधान की दिशा में भरोसा कायम होगा।

छात्रों का यह भी आरोप है कि सीमित प्रतिनिधिमंडल बनाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा सकती है, इसलिए वे पूरी पारदर्शिता चाहते हैं।

राहुल गांधी ने फोन पर की छात्रों से बातचीत

इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर तब और अधिक चर्चा मिली जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आंदोलनकारी छात्रों से फोन पर बातचीत की।

छात्र नेता पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने राहुल गांधी के सामने परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग रखी।

राहुल गांधी ने छात्रों की चिंताओं को गंभीर बताते हुए कहा कि युवाओं के साथ न्याय होना चाहिए और उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

बीजेपी का पलटवार—’हबीबी राहुल तुम कब आओगे?’

राहुल गांधी की फोन पर हुई बातचीत के बाद झारखंड भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि छात्रों को केवल वर्चुअल सहानुभूति नहीं बल्कि जमीन पर समर्थन चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राहुल गांधी युवाओं के मुद्दे पर गंभीर हैं तो वे झारखंड आकर आंदोलन में शामिल क्यों नहीं होते।

उन्होंने कहा कि जो नेता केंद्र सरकार से शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगते हैं, वे झारखंड में शिक्षा विभाग संभाल रहे मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग क्यों नहीं करते। भाजपा नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि छात्र पूछ रहे हैं—“हबीबी राहुल, तुम कब आओगे?”

विधानसभा के बाहर भाजपा का प्रदर्शन

छात्र आंदोलन के मुद्दे पर झारखंड विधानसभा के बाहर भाजपा विधायकों ने भी प्रदर्शन किया।

भाजपा विधायक आलोक चौरसिया ने कहा कि उनकी पार्टी JPSC, JSSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों के साथ खड़ी है। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

देवेंद्र नाथ महतो के अनशन पर भी बनी चर्चा

आंदोलन के दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का आमरण अनशन भी चर्चा का विषय बना रहा।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनके साथ वीडियो बातचीत के बाद महतो ने केवल पानी ग्रहण किया था, लेकिन उन्होंने अपना अनशन समाप्त नहीं किया है।

वांगचुक ने उन खबरों का भी खंडन किया जिनमें दावा किया गया था कि देवेंद्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल खत्म कर दी है।

सरकार का पक्ष—19 गिरफ्तारियां, जांच जारी

झारखंड सरकार की ओर से मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि JPSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं को सरकार बेहद गंभीरता से ले रही है।

उन्होंने बताया कि अब तक इस मामले में 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं। सरकार का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा तथा यदि जांच में और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी।

युवाओं के भविष्य से जुड़ा अहम मोड़

झारखंड का यह आंदोलन अब केवल JPSC और JSSC परीक्षाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राज्य में भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता, युवाओं के भविष्य और सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा जनआंदोलन बन चुका है। सरकार और छात्रों के बीच प्रस्तावित वार्ता से समाधान की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन यदि छात्रों की प्रमुख मांगों—परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार—पर ठोस फैसला नहीं होता, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है। पूरे राज्य की नजर अब सरकार के अगले कदम और छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ होने वाली बातचीत पर टिकी हुई है।

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