देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में शुक्रवार को सचिवालय में आयोजित होने वाली मंत्रिमंडल (कैबिनेट) बैठक में कई ऐसे अहम प्रस्तावों पर चर्चा और निर्णय होने की संभावना है, जिनका सीधा असर हजारों कर्मचारियों, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ेगा। दोपहर 12:30 बजे से शुरू होने वाली इस बैठक को आगामी विधानसभा मानसून सत्र से पहले की सबसे महत्वपूर्ण बैठकों में से एक माना जा रहा है।
सबसे अधिक चर्चा उपनल (UPNL) कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने के प्रस्ताव को लेकर है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हजारों उपनल कर्मचारियों को इस बैठक से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार, सरकार द्वारा गठित उप समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि 1 मार्च 2026 से समान कार्य, समान वेतन का लाभ लागू किया जाए। यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो 15 अक्टूबर 2024 तक विभिन्न विभागों में नियुक्त लगभग 22 हजार उपनल कर्मचारी इसका लाभ प्राप्त कर सकेंगे। यह फैसला प्रदेश के संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
इसके अलावा बैठक में प्रदेश के संविदा कर्मियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी उठ सकता है। लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे संविदा कर्मचारियों की निगाहें भी इस कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई हैं। यदि सरकार इस दिशा में कोई सकारात्मक निर्णय लेती है तो हजारों कर्मचारियों को भविष्य की नौकरी सुरक्षा और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सकता है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी कैबिनेट के एजेंडे में शामिल माना जा रहा है। वर्तमान में राजकीय मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले कई डॉक्टर बॉन्ड सेवा पूरी किए बिना ही पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) के लिए आवेदन कर देते हैं, जिससे राज्य के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी लगातार बनी रहती है। इसी समस्या के समाधान के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को कम से कम तीन वर्ष तक अनिवार्य सेवा देनी होगी। इसके बाद ही उन्हें पीजी में प्रवेश के लिए अनुमति मिलेगी। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो राज्य के सरकारी अस्पतालों, विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
आज की बैठक का एक और महत्वपूर्ण पहलू उत्तराखंड विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से जुड़ा हुआ है। संभावना है कि कैबिनेट में मानसून सत्र की तिथियों और आयोजन स्थल को लेकर भी अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सरकार इस सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत फैसले सदन में प्रस्तुत कर सकती है। ऐसे में आज की बैठक आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति तय करने के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार विभिन्न विभागों से जुड़े कई अन्य प्रस्ताव भी मंत्रिमंडल के सामने रखे जाएंगे। इनमें प्रशासनिक सुधार, विकास योजनाएं, वित्तीय स्वीकृतियां और जनहित से जुड़े कई विषय शामिल हो सकते हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के विकास कार्यों में तेजी लाई जाए और कर्मचारियों तथा आम जनता से जुड़े लंबित मामलों का समाधान किया जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उपनल कर्मचारियों के समान वेतन, संविदा कर्मियों के नियमितीकरण और स्वास्थ्य विभाग के प्रस्तावों पर सकारात्मक निर्णय होता है, तो इसका व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। खासकर कर्मचारियों के बीच सरकार के प्रति सकारात्मक संदेश जाएगा, वहीं स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।
अब पूरे उत्तराखंड की नजर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में होने वाली इस कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई है। बैठक समाप्त होने के बाद लिए गए फैसलों की आधिकारिक घोषणा से यह स्पष्ट होगा कि सरकार किन बड़े मुद्दों पर मुहर लगाती है और प्रदेश की जनता तथा कर्मचारियों को कौन-कौन सी नई सौगातें मिलने वाली हैं।
