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भारतीय छात्रों के लिए बड़ा झटका! अमेरिका में पढ़ाई के बाद नौकरी करना पड़ सकता है बेहद महंगा, ट्रंप के नए प्रस्ताव से मचेगी हलचल

The Hill India News
Last updated: July 31, 2026 4:16 am
The Hill India News
Published: July 31, 2026
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नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका में उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले लाखों भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके लागू होने पर अमेरिकी विश्वविद्यालयों से पढ़ाई पूरी करने वाले विदेशी छात्रों को वहां नौकरी करने के लिए 1 लाख डॉलर (करीब 96 लाख से 1 करोड़ रुपये) तक का शुल्क देना पड़ सकता है। इस प्रस्ताव का सबसे अधिक असर भारतीय छात्रों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि वर्तमान समय में अमेरिका में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है।

Contents
क्या है ट्रंप सरकार का नया प्रस्ताव?क्यों महत्वपूर्ण है OPT?सबसे ज्यादा असर भारतीय छात्रों पर क्यों पड़ेगा?अमेरिकी विश्वविद्यालयों को भी हो सकता है नुकसानटेक कंपनियां भी कर सकती हैं विरोधH-1B वीजा पर पहले भी हो चुका है विवादसोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहसअभी अंतिम फैसला नहीं

हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिकी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के बाद दुनियाभर के छात्रों, शिक्षा विशेषज्ञों और टेक कंपनियों के बीच इस विषय पर तीखी बहस शुरू हो गई है। यदि यह नियम लागू होता है तो अमेरिका में पढ़ाई के बाद करियर बनाने का सपना लाखों छात्रों के लिए पहले से कहीं अधिक महंगा और कठिन हो सकता है।

क्या है ट्रंप सरकार का नया प्रस्ताव?

रिपोर्ट के अनुसार यह प्रस्ताव ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है। OPT एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने वाले विदेशी छात्रों को अपनी डिग्री के अनुरूप अमेरिका में काम करने की अनुमति मिलती है। सामान्य तौर पर छात्र 12 महीने तक काम कर सकते हैं, जबकि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) विषयों के छात्रों को अतिरिक्त अवधि मिलाकर अधिकतम तीन वर्ष तक काम करने का अवसर मिलता है।

अब चर्चा है कि इसी OPT सुविधा का लाभ लेने वाले विदेशी छात्रों से करीब 1 लाख डॉलर की फीस वसूली जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह विदेशी छात्रों के लिए अब तक का सबसे महंगा रोजगार शुल्क साबित होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है OPT?

OPT केवल नौकरी करने की अनुमति भर नहीं है, बल्कि विदेशी छात्रों के लिए अमेरिका में स्थायी करियर बनाने की पहली सीढ़ी माना जाता है। बड़ी टेक कंपनियां, वित्तीय संस्थान और बहुराष्ट्रीय कंपनियां पहले छात्रों को OPT के तहत नियुक्त करती हैं और बाद में उनके लिए H-1B वीजा स्पॉन्सर करती हैं।

यही कारण है कि अधिकांश भारतीय छात्र अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद OPT के जरिए अपने करियर की शुरुआत करते हैं। यदि इस योजना पर भारी शुल्क लगाया जाता है तो हजारों छात्रों के लिए अमेरिका में रुककर काम करना आर्थिक रूप से लगभग असंभव हो सकता है।

सबसे ज्यादा असर भारतीय छात्रों पर क्यों पड़ेगा?

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय छात्रों ने अमेरिका में पढ़ाई के मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। वर्तमान में अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में लगभग एक-तिहाई छात्र भारत से हैं।

आंकड़ों के अनुसार करीब 3.3 लाख भारतीय छात्र अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या उन छात्रों की है जिन्होंने शिक्षा के लिए करोड़ों रुपये का शिक्षा ऋण (Education Loan) लिया है। ऐसे छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में नौकरी करके अपनी फीस और लोन चुकाने की योजना बनाते हैं।

अगर नौकरी शुरू करने से पहले ही लगभग एक करोड़ रुपये का अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा, तो अधिकांश छात्रों के लिए यह संभव नहीं होगा। इससे हजारों परिवारों की आर्थिक योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

अमेरिकी विश्वविद्यालयों को भी हो सकता है नुकसान

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो नुकसान केवल विदेशी छात्रों को ही नहीं बल्कि अमेरिकी विश्वविद्यालयों को भी उठाना पड़ सकता है।

अमेरिका के कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों की फीस पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं। अंतरराष्ट्रीय छात्र घरेलू छात्रों की तुलना में अधिक फीस देते हैं, जिससे विश्वविद्यालयों की आय का बड़ा हिस्सा आता है। यदि भारी शुल्क के कारण विदेशी छात्र अमेरिका जाने से बचने लगते हैं, तो विश्वविद्यालयों के दाखिलों और आय दोनों पर असर पड़ सकता है।

टेक कंपनियां भी कर सकती हैं विरोध

अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां लंबे समय से विदेशी प्रतिभाओं पर निर्भर रही हैं। Google, Microsoft, Amazon, Apple, Meta और कई अन्य कंपनियां हर वर्ष हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्रों को नौकरी देती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि OPT के तहत इतनी बड़ी फीस लागू होती है तो कंपनियों के लिए प्रतिभाशाली विदेशी युवाओं को नियुक्त करना कठिन हो जाएगा। इससे अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा पर भी असर पड़ सकता है और कई छात्र कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया तथा यूरोप जैसे देशों का रुख कर सकते हैं।

H-1B वीजा पर पहले भी हो चुका है विवाद

यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब H-1B वीजा को लेकर भी ट्रंप प्रशासन को कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ा था।

रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन पहले कुछ H-1B वीजा आवेदकों पर भी 1 लाख डॉलर तक का अतिरिक्त शुल्क लगाने की योजना बना रहा था। लेकिन बोस्टन की एक संघीय अपील अदालत ने इस प्रस्ताव को लागू होने से रोक दिया। इसके बाद सरकार को अपने प्रस्ताव में बदलाव करना पड़ा।

अब माना जा रहा है कि सरकार का ध्यान OPT कार्यक्रम की ओर केंद्रित हो सकता है, हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

सोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहस

इस खबर के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई शिक्षा विशेषज्ञों और उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने इस प्रस्ताव को अव्यावहारिक बताया है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका विदेशी छात्रों के लिए रोजगार का रास्ता इतना महंगा बना देगा, तो दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली छात्र दूसरे देशों का चयन कर सकते हैं।

दूसरी ओर, ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि इस तरह के कदम से अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं और इमिग्रेशन पर नियंत्रण मजबूत होगा।

अभी अंतिम फैसला नहीं

फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन बताया जा रहा है और अमेरिकी सरकार की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में विदेशी छात्रों और उनके परिवारों को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

हालांकि यदि भविष्य में यह नियम लागू होता है, तो इसका सबसे बड़ा प्रभाव भारतीय छात्रों, अमेरिकी विश्वविद्यालयों और वैश्विक शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है। विदेश में पढ़ाई और करियर बनाने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए आने वाले महीनों में अमेरिका की इमिग्रेशन और शिक्षा नीति पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

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