उत्तराखंड में मानसून का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरे प्रदेश में हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक भूस्खलन, सड़क धंसने, जलभराव और नदियों के उफान ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई जिलों में लोगों का संपर्क टूट गया है, जबकि चारधाम यात्रा भी मौसम की मार से अछूती नहीं रही। लगातार खराब मौसम और भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 28 और 29 जुलाई के लिए चारधाम यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) की मंगलवार सुबह जारी रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में इस समय कुल 158 सड़कें बंद हैं। इनमें राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, ग्रामीण सड़कें और संपर्क मार्ग शामिल हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिला देहरादून है, जहां अकेले 35 सड़कें बाधित हैं। प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, बीआरओ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमें लगातार मलबा हटाने और यातायात बहाल करने के प्रयासों में जुटी हुई हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मानसून ने बढ़ाई मुश्किलें, 28 लोगों की गई जान
इस वर्ष 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए मानसून सीजन में प्राकृतिक आपदाओं ने प्रदेश में भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 30 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं में 26 बड़े और 768 छोटे पशुओं की भी मौत हो चुकी है। नुकसान केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि सैकड़ों परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार 246 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त, 12 मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त, 4 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। इसके अलावा एक गौशाला भी क्षतिग्रस्त हुई है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की आवश्यकता पड़ रही है।
देहरादून में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त
राजधानी देहरादून में सोमवार रात से मंगलवार सुबह तक हुई भारी बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति बन गई। नेहरू ग्राम, गणेश एन्क्लेव, नीलकंठ एन्क्लेव, गढ़वाली कॉलोनी, डालनवाला, रायपुर, प्रेमनगर और इंदुपुरी फार्म सहित कई क्षेत्रों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। कई घरों में पानी घुस गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जल निकासी के लिए नगर निगम, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें पूरी रात सक्रिय रहीं। पंपों की मदद से पानी निकालने और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने का काम लगातार जारी रहा।
टोंस नदी में युवक बहा, तलाश जारी
बारिश के बीच राजधानी देहरादून से एक दुखद घटना भी सामने आई। सोमवार रात टोंस नदी में एक युवक के बह जाने की सूचना मिली। इसके बाद एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। तेज बहाव और खराब मौसम के कारण राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रशासन लगातार युवक की तलाश में जुटा है।
पहाड़ों में भूस्खलन ने रोकी रफ्तार
भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर पर्वतीय जिलों में देखने को मिला है। जगह-जगह पहाड़ियों से मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर गिरने के कारण सड़कें बंद हो गई हैं। मसूरी-चकराता मार्ग, देहरादून-मसूरी रोड, रायपुर-थानों मार्ग, मीनस-अटल मोटर मार्ग सहित कई प्रमुख सड़कें भूस्खलन के कारण बाधित हैं।
लगातार मलबा गिरने के कारण मशीनों से सड़कें साफ करने का काम भी धीमा पड़ रहा है। कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया है, जिससे स्थानीय लोगों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ सबसे ज्यादा प्रभावित
प्रदेश के पर्वतीय जिलों में रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ की स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
रुद्रप्रयाग जिले में 21 ग्रामीण मोटर मार्ग बंद हैं। कई गांवों में बिजली और पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। उखीमठ क्षेत्र के अनेक गांवों में बिजली गुल है, जबकि पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने से लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर पालीगढ़ के पास भारी मलबा आने से यातायात पूरी तरह प्रभावित हुआ। वहीं जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे यात्रियों की आवाजाही बाधित हुई है। प्रशासन ने सुरक्षा बलों की तैनाती करते हुए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है। इसके अलावा हर्षिल क्षेत्र में भागीरथी नदी के किनारे कटाव रोकने का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में भी हालात सामान्य नहीं हैं। जिले में दो बीआरओ सड़कें, एक बॉर्डर रोड, एक राज्य मार्ग और 18 ग्रामीण सड़कें बंद हैं। मुनस्यारी क्षेत्र में लगातार बोल्डर गिरने की घटनाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने और यातायात बहाल करने का प्रयास कर रहा है।
चारधाम यात्रा पर मौसम की मार
प्रदेश में जारी खराब मौसम का असर चारधाम यात्रा पर भी साफ दिखाई दे रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बाद गढ़वाल मंडल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर 28 और 29 जुलाई के लिए चारधाम यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी है।
प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम सामान्य होने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी। अब तक चारधाम यात्रा में 45.48 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण यात्रा की रफ्तार पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।
राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी
प्रदेशभर में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, लोक निर्माण विभाग, बीआरओ और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं। जहां सड़कें बंद हैं, वहां जेसीबी और अन्य भारी मशीनों के जरिए मलबा हटाया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति है, वहां पानी निकासी का कार्य किया जा रहा है। संवेदनशील इलाकों पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है और अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत दलों को पहले से तैयार रखा गया है।
मौसम विभाग की चेतावनी, लोगों से सतर्क रहने की अपील
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने अगले कुछ घंटों और आगामी दिनों में प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा जिला प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।
विशेष रूप से चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं से कहा गया है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और प्रशासन द्वारा जारी ताजा निर्देशों की जानकारी अवश्य लें। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी रात के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
प्राकृतिक आपदा ने बढ़ाई चिंता
उत्तराखंड हर वर्ष मानसून के दौरान भूस्खलन, बादल फटने और सड़क धंसने जैसी घटनाओं का सामना करता है, लेकिन इस बार लगातार हो रही भारी बारिश ने हालात और अधिक गंभीर बना दिए हैं। मौतों का बढ़ता आंकड़ा, सैकड़ों सड़कें बंद होना, मकानों का क्षतिग्रस्त होना और चारधाम यात्रा पर रोक यह संकेत दे रही है कि इस बार मानसून प्रदेश के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।
फिलहाल पूरा प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में जुटा हुआ है, लेकिन मौसम विभाग की आगामी चेतावनियों को देखते हुए आने वाले कुछ दिन उत्तराखंड के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में नागरिकों की सतर्कता, प्रशासन के निर्देशों का पालन और समय पर राहत कार्य ही इस प्राकृतिक संकट के प्रभाव को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
