By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: कैलाश मानसरोवर झील में डुबकी पर रोक: बाल्टी से किया पवित्र स्नान, श्रद्धालुओं ने बताईं यात्रा की चुनौतियां और सुविधाओं की कमी
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > कैलाश मानसरोवर झील में डुबकी पर रोक: बाल्टी से किया पवित्र स्नान, श्रद्धालुओं ने बताईं यात्रा की चुनौतियां और सुविधाओं की कमी
उत्तराखंडपर्यटनफीचर्ड

कैलाश मानसरोवर झील में डुबकी पर रोक: बाल्टी से किया पवित्र स्नान, श्रद्धालुओं ने बताईं यात्रा की चुनौतियां और सुविधाओं की कमी

The Hill India News
Last updated: July 24, 2026 10:41 am
The Hill India News
Published: July 24, 2026
Share
SHARE

पिथौरागढ़। सनातन आस्था के सबसे पवित्र तीर्थों में शामिल कैलाश मानसरोवर यात्रा इस वर्ष भी हजारों श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव लेकर आई, लेकिन एक बार फिर उनकी सबसे बड़ी धार्मिक इच्छा अधूरी रह गई। वर्ष 2026 की यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को पवित्र मानसरोवर झील में उतरकर स्नान करने की अनुमति नहीं मिली। इसके बजाय यात्रियों ने झील से बाल्टी में जल निकालकर किनारे पर ही स्नान किया और उसी जल से अपनी धार्मिक परंपरा एवं आस्था का निर्वहन किया। श्रद्धालुओं का कहना है कि मानसरोवर में डुबकी लगाना उनके जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक सपना होता है, लेकिन सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी नियमों के कारण लगातार कई वर्षों से यह संभव नहीं हो पा रहा है।

जानकारी के अनुसार, चीन सरकार ने वर्ष 2018 से मानसरोवर झील के भीतर उतरकर स्नान करने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इस निर्णय का उद्देश्य विश्व प्रसिद्ध इस पवित्र झील को प्रदूषण से बचाना और उसके प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखना है। इसी वजह से झील के तटों पर चीनी सुरक्षा कर्मियों और गाइडों की कड़ी निगरानी रहती है तथा किसी भी श्रद्धालु को झील के पानी में उतरने की अनुमति नहीं दी जाती। हालांकि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्हें बाल्टी के माध्यम से झील का पवित्र जल लेने की अनुमति दी जाती है, जिससे वे थोड़ी दूरी पर स्नान कर अपनी धार्मिक परंपरा पूरी कर सकें।

कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे श्रद्धालुओं ने बताया कि भले ही वे झील में डुबकी नहीं लगा सके, लेकिन मानसरोवर के पवित्र जल से स्नान करने का अनुभव भी उनके लिए अत्यंत भावनात्मक और आध्यात्मिक रहा। श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान शिव की पावन नगरी में पहुंचना ही उनके लिए जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है और वहां बिताया गया हर क्षण अविस्मरणीय रहता है। इसके बावजूद मानसरोवर झील में प्रत्यक्ष डुबकी न लगा पाने का एक भावनात्मक खालीपन उनके मन में जरूर बना रहता है।

यात्रा पूरी कर लौटे कई श्रद्धालुओं ने व्यवस्था से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उनका कहना है कि कैलाश परिक्रमा के दौरान विशेष रूप से डेरापुक और झुंझुपुई क्षेत्रों में शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इस कारण यात्रियों, विशेषकर महिला श्रद्धालुओं को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। लंबे और कठिन पैदल मार्ग के दौरान स्वच्छ एवं पर्याप्त शौचालयों की कमी यात्रा को और चुनौतीपूर्ण बना देती है।

श्रद्धालुओं ने सुझाव दिया कि भारत सरकार इस मुद्दे को चीन के संबंधित अधिकारियों के समक्ष गंभीरता से उठाए, ताकि भविष्य में कैलाश परिक्रमा मार्ग पर आधुनिक और स्वच्छ शौचालयों सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा सके। उनका मानना है कि विश्वभर के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण धार्मिक मार्ग पर मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता यात्रा को अधिक सुरक्षित, सम्मानजनक और सुगम बनाएगी।

यात्रियों ने भारत की ओर से यात्रा प्रबंधन की सराहना भी की। उन्होंने बताया कि कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) द्वारा आवास, भोजन, परिवहन और अन्य व्यवस्थाएं संतोषजनक रहीं, जिससे भारतीय सीमा तक यात्रा काफी व्यवस्थित रही। हालांकि चीन की सीमा में प्रवेश करने के बाद कुछ स्थानों पर सुविधाओं की कमी स्पष्ट रूप से महसूस हुई, विशेषकर परिक्रमा मार्ग के कठिन हिस्सों में।

गौरतलब है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा दुनिया की सबसे कठिन और पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है। यह यात्रा दिल्ली से शुरू होकर लगभग 1,738 किलोमीटर की दूरी तय करती है। इसमें लगभग 1,690 किलोमीटर की यात्रा सड़क मार्ग से पूरी की जाती है, जबकि करीब 38 किलोमीटर का हिस्सा पैदल तय करना पड़ता है। वर्ष 2019 से पहले यह पैदल मार्ग लगभग 60 किलोमीटर लंबा था, लेकिन भारत और चीन की ओर से सड़क संपर्क विकसित होने के बाद अब यात्रा पहले की तुलना में कुछ अधिक सुविधाजनक हो गई है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कैलाश पर्वत भगवान शिव का दिव्य निवास माना जाता है, जबकि मानसरोवर झील को अत्यंत पवित्र और मोक्षदायिनी माना जाता है। इसी कारण हर वर्ष हजारों श्रद्धालु कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए इस यात्रा को पूरा करते हैं। श्रद्धालुओं की इच्छा है कि भविष्य में पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे झील की पवित्रता भी बनी रहे और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान हो सके। फिलहाल, मानसरोवर झील में डुबकी पर प्रतिबंध जारी है और श्रद्धालु बाल्टी से पवित्र जल लेकर ही अपनी आस्था का स्नान पूरा कर रहे हैं।

You Might Also Like

साहिबाबाद रेल हादसे से थमी रफ्तार: मालगाड़ी के 6 डिब्बे पटरी से उतरे, 53 ट्रेनें प्रभावित; यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
Uttrakhand : श्री बदरीनाथ धाम दर्शन को पहुंचे फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार
Uttarakhand: मुख्यमंत्री धामी ने किया ‘जनजातीय शोध संस्थान’ की ओर से आयोजित कार्यक्रम, ‘जनजातीय महोत्सव’ में प्रतिभाग 
पिथौरागढ़: उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कुदरत का सफेद श्रृंगार, आदि कैलाश यात्रा से पहले प्रशासन ‘अलर्ट मोड’ पर
ईरान पर दबाव बनाने की अमेरिकी रणनीति फेल? होर्मुज संकट के बीच अब समझौते की राह पर बढ़ सकते हैं दोनों देश
TAGGED:Holy BathKailash Mansarovar LakeKailash YatraPilgrimageTravel Update
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
दुर्घटनादेशफीचर्ड

हिमाचल में दर्दनाक त्रासदी: लाहौल-स्पीति में चलती टैक्सी पर गिरी विशाल चट्टान, 13 यात्रियों की मौत से मचा कोहराम

The Hill India News
The Hill India News
July 24, 2026
बागेश्वर में भ्रष्टाचार पर विजिलेंस का बड़ा प्रहार: उरेडा परियोजना अधिकारी 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
कैलाश मानसरोवर झील में डुबकी पर रोक: बाल्टी से किया पवित्र स्नान, श्रद्धालुओं ने बताईं यात्रा की चुनौतियां और सुविधाओं की कमी
नीट पेपर लीक विवाद पर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच निर्णायक वार्ता: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी, कई मुद्दों पर बनी सहमति, आज फिर होगी अहम बैठक
8वें वेतन आयोग पर बड़ी हलचल: 7 और 10 अगस्त को दिल्ली में अहम बैठकें, कर्मचारियों और पेंशनर्स की बढ़ीं उम्मीदें
पेपर लीक पर सरकार का सबसे बड़ा प्रहार: 10 साल की जेल, 10 करोड़ रुपये जुर्माना, फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए तीन महीने में फैसला
सोने में गिरावट, चांदी ने दिखाई दम: कुछ घंटों में बदली बाजार की चाल, निवेशकों की बढ़ी उलझन
26 दिन बाद टूटा सोनम वांगचुक का अनशन: संवाद की राह पर बढ़े कदम, फैसले पर छिड़ी तारीफ और आलोचना की बहस
‘मैंने ऐसा नहीं कहा था’: भ्रामक रिपोर्टिंग पर भड़के CJI सूर्यकांत, बोले- बिना याचिका कोई मामला सूचीबद्ध नहीं हो सकता
बजरंग सेतु पर बदलेगा श्रद्धालुओं का अनुभव: कांच वाले हिस्से पर शुल्क, कांवड़ यात्रा में रहेगा प्रतिबंध; सुरक्षा के लिए बनेगी मानक संचालन प्रक्रिया
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?