ऋषिकेश। उत्तराखंड की धार्मिक नगरी ऋषिकेश में गंगा नदी पर बने अत्याधुनिक बजरंग सेतु को लेकर राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग (PWD) नई संचालन व्यवस्था लागू करने की तैयारी में हैं। आधुनिक तकनीक से निर्मित यह सस्पेंशन ब्रिज न केवल श्रद्धालुओं की आवाजाही को आसान बनाएगा, बल्कि पर्यटन के क्षेत्र में भी एक नई पहचान स्थापित करेगा। हालांकि अब इस पुल के संचालन को पूरी तरह स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत संचालित करने की योजना बनाई जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार पुल के सामान्य हिस्से पर आम लोगों की आवाजाही पहले की तरह जारी रहेगी, लेकिन दोनों ओर बने पारदर्शी कांच के फुटपाथ पर प्रवेश के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को निर्धारित शुल्क देना पड़ सकता है। वहीं कांवड़ यात्रा जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा कारणों से इस कांच वाले हिस्से को पूरी तरह बंद रखा जाएगा।
बजरंग सेतु को लक्ष्मण झूला के विकल्प के रूप में विकसित किया गया है। पुराने लक्ष्मण झूला को संरचनात्मक सुरक्षा कारणों से बंद किए जाने के बाद स्थानीय लोगों, व्यापारियों और लाखों श्रद्धालुओं के सामने गंगा पार करने की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से नए पुल का निर्माण शुरू किया गया। यह पुल केवल एक यातायात मार्ग नहीं बल्कि धार्मिक पर्यटन, आधुनिक वास्तुकला और तकनीकी उत्कृष्टता का प्रतीक माना जा रहा है।
करीब 69.20 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह पुल लगभग 132.30 मीटर लंबा और 8.60 मीटर चौड़ा है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता दोनों किनारों पर बनाया गया पारदर्शी ग्लास वॉकवे है, जहां से श्रद्धालु और पर्यटक गंगा नदी तथा आसपास के पहाड़ी प्राकृतिक दृश्य का रोमांचक अनुभव प्राप्त कर सकेंगे। यह व्यवस्था देश के चुनिंदा आधुनिक पर्यटन स्थलों की तर्ज पर विकसित की गई है, जहां पारदर्शी कांच के रास्ते पर चलना स्वयं में एक विशेष आकर्षण माना जाता है।
हालांकि इस विशेष आकर्षण के साथ सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती भी बनकर सामने आई है। निर्माण के दौरान कई बार कांच को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आने के बाद विभाग ने इसके संचालन को नियंत्रित करने का निर्णय लिया है। इसी कारण अब ऐसी SOP तैयार की जा रही है, जिसमें कांच वाले हिस्से पर प्रवेश, भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी, रखरखाव और संचालन से जुड़े सभी मानकों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार पुल का मुख्य मार्ग सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए निःशुल्क और सामान्य आवाजाही हेतु खुला रहेगा, लेकिन जो लोग गंगा के ऊपर बने पारदर्शी कांच के फुटपाथ पर चलने का अनुभव लेना चाहेंगे, उन्हें इसके लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा। विभाग का मानना है कि टिकट व्यवस्था लागू होने से एक ओर भीड़ नियंत्रित रहेगी, वहीं दूसरी ओर कांच वाले हिस्से के रखरखाव और सुरक्षा पर होने वाले खर्च की भी व्यवस्था की जा सकेगी।
सबसे महत्वपूर्ण निर्णय कांवड़ यात्रा को लेकर लिया जा रहा है। हर वर्ष सावन के दौरान लाखों शिवभक्त ऋषिकेश और हरिद्वार से गंगाजल लेकर विभिन्न राज्यों की ओर प्रस्थान करते हैं। इस दौरान पुलों और प्रमुख मार्गों पर अत्यधिक भीड़ रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का एक साथ कांच वाले हिस्से पर प्रवेश सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम पैदा कर सकता है। इसी वजह से कांवड़ यात्रा के दौरान बजरंग सेतु के ग्लास वॉकवे को पूरी तरह बंद रखने की तैयारी की जा रही है। श्रद्धालु केवल पुल के सामान्य हिस्से का उपयोग कर सकेंगे, जबकि कांच वाले हिस्से में किसी भी प्रकार की आवाजाही की अनुमति नहीं होगी।
बजरंग सेतु में लगाए गए कांच साधारण नहीं हैं। पुल के दोनों किनारों पर लगाए गए फुटपाथ में पांच परतों वाले टफेंड ग्लास का उपयोग किया गया है। प्रत्येक परत लगभग 12 मिलीमीटर मोटी है और कुल मोटाई लगभग 60 मिलीमीटर तक पहुंचती है। इस प्रकार का कांच अत्यधिक भार सहन करने में सक्षम माना जाता है और इसे विशेष सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। इसके बावजूद विभाग अतिरिक्त सावधानी बरतना चाहता है ताकि किसी भी अप्रिय घटना की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
निर्माण कार्य के दौरान कांच को नुकसान पहुंचने की कई घटनाएं भी सामने आई थीं। जनवरी 2026 में निर्माण के दौरान एक कर्मचारी के हाथ से हथौड़ा गिरने के कारण कांच की ऊपरी परत क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद अप्रैल 2026 में भी पुल के एक हिस्से में लगे कांच के क्षतिग्रस्त होने की तस्वीरें सामने आईं। राहत की बात यह रही कि दोनों मामलों में केवल ऊपरी परत प्रभावित हुई, जबकि नीचे की अन्य चार परतें पूरी तरह सुरक्षित रहीं। बाद में मई 2026 में भी कांच को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आने के बाद विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का निर्णय लिया।
इन घटनाओं के बाद पुल पर CCTV कैमरे, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, नियमित तकनीकी निरीक्षण और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष जोर दिया गया। विभाग अब ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहता है जिसमें किसी भी प्रकार की तोड़फोड़, लापरवाही या भीड़ के कारण कांच वाले हिस्से को नुकसान न पहुंचे। इसके साथ ही पुल के किनारों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए रेलिंग और अन्य संरचनात्मक सुधार भी किए जा रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे के अनुसार दुनिया के कई देशों में इस प्रकार के ग्लास ब्रिज और स्काई वॉक का संचालन टिकट प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। इससे न केवल लोगों की संख्या नियंत्रित रहती है बल्कि रखरखाव, निगरानी और संचालन का खर्च भी आसानी से पूरा किया जा सकता है। उत्तराखंड सरकार भी इसी मॉडल का अध्ययन कर रही है ताकि बजरंग सेतु का संचालन सुरक्षित, व्यवस्थित और दीर्घकालिक बनाया जा सके।
बजरंग सेतु का निर्माण वर्ष 2022 में शुरू हुआ था। शुरुआत में परियोजना को अपेक्षाकृत कम समय में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था और वर्ष 2023 तक अधिकांश निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद थी। हालांकि तकनीकी चुनौतियों, सुरक्षा मानकों और निर्माण संबंधी जटिलताओं के कारण परियोजना को पूरा होने में अधिक समय लगा। अब यह पुल लगभग तैयार है और इसे जल्द ही आम जनता के लिए पूरी तरह खोले जाने की तैयारी चल रही है।
