देहरादून, 18 जुलाई। परवादून जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने एयरपोर्ट–ऋषिकेश मार्ग स्थित सात मोड़ पर लगभग 4000 पेड़ों के प्रस्तावित कटान पर राज्य सरकार द्वारा रोक लगाए जाने का स्वागत करते हुए इसे पर्यावरण प्रेमियों के शांतिपूर्ण संघर्ष, जनदबाव और जनभावनाओं की महत्वपूर्ण जीत बताया है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 दिनों से पर्यावरण प्रेमी, स्थानीय नागरिक और युवा शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से इस कटान के विरोध में आंदोलनरत थे। ऐसे समय में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देहरादून में आयोजित “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम के उपरांत एयरपोर्ट लौटते समय आंदोलन स्थल पर पहुँचकर आंदोलनकारियों से मुलाकात की, उनकी पीड़ा, आशंकाओं और मांगों को गंभीरता से सुना तथा उनके संघर्ष के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
मोहित उनियाल ने बताया कि राहुल गांधी ने मौके पर ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को निर्देश दिए कि इस विषय को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाए तथा कांग्रेस पार्टी आंदोलनकारियों को हरसंभव सहयोग प्रदान करे। उन्होंने कहा कि यह केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनभावनाओं के प्रति राहुल गांधी की संवेदनशीलता का स्पष्ट संदेश था।
उन्होंने कहा कि जिस समय आंदोलनकारियों द्वारा पुलिस और प्रशासन के दबाव की शिकायतें सामने आ रही थीं, उस समय राहुल गांधी का उनके बीच पहुँचना लोकतांत्रिक अधिकारों और जनआंदोलनों के प्रति उनके विश्वास को दर्शाता है। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा पेड़ों के कटान पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया, जो आंदोलनकारियों की आवाज़ और जनता की भावना का सम्मान है।
मोहित उनियाल ने कहा कि कांग्रेस इस निर्णय का स्वागत करती है, लेकिन इसे संघर्ष का अंतिम पड़ाव नहीं मानती। पेड़ों के कटान पर अस्थायी रोक पर्याप्त नहीं है। जब तक प्रकृति, पर्यावरण और स्थानीय जनभावनाओं का सम्मान करते हुए ऐसा स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता जिससे हजारों पेड़ों की रक्षा सुनिश्चित हो सके, तब तक यह जनसंघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि यह सफलता किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि उन सभी पर्यावरण प्रेमियों, स्थानीय नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों की है जिन्होंने धैर्य, संयम और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ इस आंदोलन को आगे बढ़ाया।
अंत में मोहित उनियाल ने सभी आंदोलनकारियों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की पहचान उसके जंगल, जलस्रोत और प्राकृतिक धरोहर हैं। इनकी रक्षा करना हम सभी का साझा दायित्व है। आइए, हम सब मिलकर आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और हरित भविष्य के लिए एकजुट होकर अपना संघर्ष और संकल्प दोनों जारी रखें।
