किशनगंज: कहते हैं कि सात फेरों के बंधन में बंधी पत्नी ही संकट के समय पति की सबसे बड़ी ढाल होती है, लेकिन बिहार के किशनगंज जिले से विश्वासघात और बेरहमी की एक ऐसी दास्तां सामने आई है जिसने पवित्र वैवाहिक रिश्ते को शर्मसार कर दिया है। किशनगंज के विशनपुर थाना क्षेत्र में हुए चर्चित रिजवान आलम हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस ने एक ऐसे सनसनीखेज सच से पर्दा उठाया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। जिस पत्नी ने पति की वीभत्स हत्या के बाद घर में सबसे ऊंचा विलाप किया, जिसने पुलिस के सामने फूट-फूटकर रोते हुए डकैती और चोरी की झूठी कहानी गढ़ी, असल में वही इस पूरे कत्ल की मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) निकली। उसने अपने से उम्र में करीब 10 साल छोटे प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही सुहाग को हमेशा के लिए सुला दिया।
लोहे की रॉड से सोते हुए पति पर ताबड़तोड़ वार
दिल को झकझोर देने वाली यह वारदात बीते 4 जुलाई की रात को अंजाम दी गई थी। विशनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घर में रिजवान आलम अपने कमरे में गहरी नींद में सो रहे थे। तभी आधी रात के सन्नाटे में उन पर लोहे की भारी रॉड से ताबड़तोड़ कई वार किए गए। सिर और शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर हुए इस अचानक और घातक हमले के कारण रिजवान को संभलने तक का मौका नहीं मिला और मौके पर ही तड़प-तड़पकर उनकी मौत हो गई। अगली सुबह जब खून से लथपथ शव मिला, तो इलाके में कोहराम मच गया। घटना के बाद मृतक के लाचार पिता के आंसुओं से भीगे बयान के आधार पर विशनपुर थाने में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई थी।
कुवैत से वापसी बनी मौत का कारण: 9 साल पुराना वो ‘खूनी’ राज
पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद जब आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ हुई, तो जो कहानी निकलकर सामने आई वह किसी थ्रिलर सिनेमा की स्क्रिप्ट जैसी थी। मृतक रिजवान आलम अपनी आजीविका चलाने और परिवार के बेहतर भविष्य के सपने संजोकर खाड़ी देश कुवैत में नौकरी करते थे। वह करीब दो महीने पहले ही अपने वतन और घर वापस लौटे थे। लेकिन रिजवान को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी यही वतन वापसी उनके लिए काल बन जाएगी।
दरअसल, रिजवान की पत्नी डेजी परवीन का गांव के ही अनवर हुसैन नामक युवक से पिछले 9 सालों से बेहद करीबी और अवैध प्रेम संबंध चल रहा था। आरोपी अनवर हुसैन उम्र में डेजी परवीन से करीब 10 साल छोटा है। रिजवान जब तक कुवैत में थे, तब तक इन दोनों के प्रेम की राह में कोई रोड़ा नहीं था। लेकिन दो महीने पहले जैसे ही रिजवान वापस घर आए, दोनों प्रेमियों का मिलना-जुलना और बातचीत करना लगभग बंद हो गया। रिजवान की मौजूदगी दोनों की बेबाक मुलाकातों में सबसे बड़ी बाधा बन चुकी थी।
प्रेमी पर बनाया कत्ल का दबाव: ‘उसे रास्ते से हटा दो’
गिरफ्तार आरोपी प्रेमी अनवर हुसैन ने पुलिसिया पूछताछ में कबूल किया कि रिजवान के आने के बाद डेजी परवीन पागलों की तरह व्यवहार करने लगी थी। उसने ही अनवर पर लगातार यह दबाव बनाना शुरू किया कि वह रिजवान को हमेशा-हमेशा के लिए रास्ते से हटा दे, ताकि वे दोनों बिना किसी डर के एक साथ रह सकें।
साजिश के तहत, 4 जुलाई की खौफनाक रात को डेजी परवीन ने योजना के अनुसार अपने घर का मुख्य दरवाजा अंदर से खुला छोड़ दिया। जब रिजवान गहरी नींद के आगोश में समा गए, तब तय वक्त पर अनवर हाथ में लोहे की रॉड लेकर दबे पांव घर के भीतर दाखिल हुआ। डेजी ने इशारा किया और अनवर ने सोई हुई अवस्था में ही रिजवान के सिर पर लोहे की रॉड से प्राणघातक हमला कर दिया।
चोरी का रूप देने की कोशिश और पुलिस को गुमराह करने का ड्रामा
कत्ल की इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों शातिर आरोपियों ने कानून की आंखों में धूल झोंकने की पूरी तैयारी कर रखी थी। रिजवान की सांसें थमते ही उन्होंने पूरे कमरे के सामान को बिखेर दिया, अलमारियों और बक्सों को अस्त-व्यस्त कर दिया, ताकि सुबह देखने वालों को यह लगे कि घर में चोर या डकैत घुसे थे और विरोध करने पर उन्होंने गृहस्वामी की हत्या कर दी। साक्ष्यों को मिटाने के उद्देश्य से आरोपियों ने मृतक का मोबाइल फोन और कत्ल में इस्तेमाल की गई खून से सनी लोहे की रॉड को दूर ले जाकर छिपा दिया। सुबह होते ही डेजी परवीन ने रोना-बिलखना शुरू कर दिया ताकि किसी को उस पर रत्ती भर भी शक न हो।
कॉल डिटेल्स (CDR) ने खोला राज, पुलिस कप्तान के निर्देश पर दबोचे गए हत्यारे
इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए किशनगंज के पुलिस अधीक्षक (SP) संतोष कुमार ने तुरंत संज्ञान लिया और उनके निर्देश पर एसडीपीओ खुसरू शिराज के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया।
जांच टीम ने जब घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया, तो उन्हें थ्योरी में कई झोल नजर आए। सबसे बड़ा संदेह तब पैदा हुआ जब पुलिस के तीखे सवालों के सामने डेजी परवीन बार-बार अपने बयान बदलने लगी। इसके बाद पुलिस ने वैज्ञानिक अनुसंधान का सहारा लेते हुए डेजी के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को खंगाला। CDR रिपोर्ट सामने आते ही पुलिस के होश उड़ गए; कत्ल वाली रात और उससे पहले डेजी और अनवर के बीच दर्जनों बार लंबी बातचीत हुई थी। शक पुख्ता होते ही पुलिस ने अनवर और डेजी को हिरासत में ले लिया।
हथियार और मोबाइल बरामद, सलाखों के पीछे पहुंचे गुनाहगार
मामले का आधिकारिक तौर पर भंडाफोड़ करते हुए प्रभारी पुलिस अधीक्षक हरिमोहन शुक्ला ने मीडिया को बताया कि पुलिस की सूझबूझ से रिजवान आलम हत्याकांड का पूरी तरह पर्दाफाश हो चुका है। पुलिस ने दोनों आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त आला-ए-कत्ल (लोहे की भारी रॉड) और वारदात के बाद गायब किए गए दोनों मोबाइल फोन को सफलता पूर्वक बरामद कर लिया है। दोनों ही आरोपियों ने पुलिस के इकबालिया बयान में अपना गुनाह पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। बहरहाल, कानून की धज्जियां उड़ाने वाले इन दोनों प्रेमियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है, लेकिन इस घटना ने समाज में रिश्तों के खोखलेपन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
