रामनगर / देहरादून: उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे के विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से रविवार का दिन बेहद ऐतिहासिक साबित हुआ। लंबे इंतजार और सालों की दुश्वारियों के बाद आखिरकार रामनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग-309 (NH-309) पर स्थित कुख्यात धनगढ़ी नाले के ऊपर बने नए पुल की सौगात जनता को मिल गई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक भव्य समारोह के दौरान 220.90 मीटर लंबे ‘प्रीस्ट्रेस बॉक्स गर्डर सेतु’ का विधि-विधान से लोकार्पण कर इसे राष्ट्र को समर्पित किया।
ताजा Uttarakhand News के मुताबिक, लगभग 29.65 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हुआ यह पुल सिर्फ कंक्रीट का एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह कुमाऊं और गढ़वाल मंडल को आपस में जोड़ने वाली लाइफलाइन है। इस बहुप्रतीक्षित पुल के चालू हो जाने से दोनों क्षेत्रों के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित, सुगम और निर्बाध हो जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों के चेहरों पर खुशी साफ देखी जा सकती है।
बरसात का खौफ और हादसों का दौर अब बीती बात
रामनगर का धनगढ़ी नाला सालों से मानसून के दौरान स्थानीय जनता और पर्यटकों के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था। हल्की सी बारिश होते ही पहाड़ों से आने वाला बरसाती पानी इस नाले को रौद्र रूप दे देता था, जिससे कुमाऊं और गढ़वाल का संपर्क पूरी तरह कट जाता था। कई बार इस उफनते नाले को पार करने के चक्कर में गाड़ियां बह जाती थीं और जनहानि जैसी अत्यंत दुखद घटनाएं सामने आती थीं।
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए भावुक स्वर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “यह केवल एक पुल नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तराखंड की अंतरात्मा और कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण सेतु है। धनगढ़ी पुल और इसके समीप ही तैयार हुए पनोद पुल के निर्माण से अब इस क्षेत्र में बरसात के समय होने वाली जानलेवा परेशानियों का स्थायी समाधान हो गया है।”
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि पहले जब बारिश के दौरान मार्ग महीनों तक बाधित रहते थे, तो बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब जनता को इन सभी समस्याओं से हमेशा के लिए निजात मिल गई है।
डबल इंजन सरकार की नीति और नीयत: केवल शिलान्यास नहीं, लोकार्पण भी
अपने संबोधन के दौरान सीएम धामी ने केंद्र सरकार के सहयोग की जमकर सराहना की। उन्होंने इस ऐतिहासिक परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जिन विकास कार्यों को दशकों पहले पूरा हो जाना चाहिए था, उन्हें पूर्ववर्ती सरकारों की ढुलमुल नीतियों के कारण लटका कर रखा गया। उन्होंने जोर देकर कहा:
“हमारी सरकार केवल शिलान्यास करने या पत्थरों पर नाम लिखवाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हम जिस काम की शुरुआत करते हैं, उसकी एक्सपायरी डेट यानी उसे समय पर पूरा करने की प्रतिबद्धता भी तय करते हैं। चाहे धनगढ़ी और पनोद पुल का निर्माण हो, जमरानी बांध परियोजना हो, सोंग बांध हो या फिर लखवार बहुउद्देशीय परियोजना—सभी कार्य हमारी स्पष्ट नीति, साफ नीयत और जनता के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखकर तेज गति से आगे बढ़ाए जा रहे हैं।”
परियोजना के प्रमुख बिंदु और लागत का विवरण
इस आधुनिक प्रीस्ट्रेस बॉक्स गर्डर सेतु की तकनीकी और वित्तीय विशेषताएं इस प्रकार हैं:
| परियोजना का विवरण | मुख्य आंकड़े / जानकारी |
| पुल की कुल लंबाई | 220.90 मीटर |
| कुल निर्माण लागत | लगभग 29.65 करोड़ रुपये |
| संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग | राष्ट्रीय राजमार्ग-309 (NH-309) |
| तकनीकी प्रकार | प्रीस्ट्रेस बॉक्स गर्डर सेतु (Prestressed Box Girder Bridge) |
| मुख्य लाभ | कुमाऊं और गढ़वाल के बीच बारहमासी व सुरक्षित कनेक्टिविटी |
अनिल बलूनी के प्रयासों को जनता ने किया याद
इस पुल के निर्माण के पीछे एक लंबा संघर्ष और राजनीतिक इच्छाशक्ति भी रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2020 में इस पुल के निर्माण कार्य की नींव तत्कालीन राज्यसभा सांसद और वर्तमान पौड़ी लोकसभा सीट से सांसद अनिल बलूनी के भगीरथ प्रयासों के बाद पड़ी थी। उन्होंने केंद्रीय मंत्रालयों से समन्वय स्थापित कर इस पुल की फाइल को क्लीयरेंस दिलाई थी।
यद्यपि अपरिहार्य कारणों से लोकार्पण समारोह में सांसद अनिल बलूनी साक्षात मौजूद नहीं रह सके, लेकिन समारोह में शामिल स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों ने मुक्त कंठ से माना कि इस मृतप्राय परियोजना में जान फूंकने और इसे इस मुकाम तक पहुंचाने में बलूनी का योगदान अविस्मरणीय रहा है।
पर्यटन, व्यापार और आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई उड़ान
धनगढ़ी नाले पर इस ऊंचे और मजबूत पुल के बन जाने का सीधा सकारात्मक असर उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग पर पड़ेगा। रामनगर को कॉर्बेट नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार माना जाता है, जहाँ देश-विदेश से लाखों पर्यटक आते हैं। मानसून में मार्ग बंद होने से पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह ठप हो जाता था, लेकिन अब पर्यटकों को निर्बाध मार्ग मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, सामरिक दृष्टि से भी यह पुल बेहद महत्वपूर्ण है। आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों (Rescue Operations) को इसके माध्यम से नई गति मिलेगी। गढ़वाल और कुमाऊं के व्यापारी अब बिना किसी डर के बारह महीने अपने माल की आवाजाही कर सकेंगे, जिससे क्षेत्रीय व्यापार को काफी बढ़ावा मिलेगा।
समारोह में दिग्गजों का जमावड़ा, सीएम ने खुद पैदल चलकर परखा काम
इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए उत्तराखंड के कई वरिष्ठ राजनेता रामनगर पहुंचे थे। समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, रामनगर के लोकप्रिय विधायक दिवान सिंह बिष्ट, रानीखेत के विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, और सल्ट के विधायक महेश जीना सहित भारी संख्या में भाजपा के पदाधिकारी व हजारों की तादाद में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पारंपरिक रूप से फीता काटकर पुल का विधिवत उद्घाटन किया। उद्घाटन के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने एक सजग लोकसेवक की भूमिका निभाते हुए स्वयं पुल पर काफी दूर तक पैदल चलकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता का बारीकी से निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। क्षेत्रवासियों ने इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों (ढोल-दमाऊ) के साथ नाचते-गाते हुए पुल के लोकार्पण पर अपनी खुशी का इजहार किया और इसे देवभूमि के विकास का एक नया स्वर्णिम अध्याय बताया।
