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WhatsApp Username Feature: लॉन्च से पहले ही वॉट्सऐप के यूजरनेम फीचर पर भारी बवाल, भारत सरकार के सख्त रुख के बाद मेटा ने दी ये बड़ी दलीलें

The Hill India News
Last updated: July 2, 2026 1:43 am
The Hill India News
Published: July 2, 2026
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नई दिल्ली। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप (WhatsApp) का एक नया सुरक्षा और प्राइवेसी फीचर रोलआउट होने से पहले ही बड़े नीतिगत और सुरक्षा विवाद में फंस गया है। कंपनी जिस बहुप्रतीक्षित ‘यूज़रनेम फीचर’ (Username Feature) को लाने की तैयारी कर रही है, उसे लेकर भारत सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सरकार की चिंताओं और सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के बाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) को एक कड़ा नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में सरकार ने तीन दिनों के भीतर कंपनी से जवाब मांगा है और स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब तक सुरक्षा से जुड़े सभी संशय दूर नहीं हो जाते, तब तक इस फीचर को भारत में लॉन्च न किया जाए।

Contents
सरकार की चिंता और तीन दिन का अल्टीमेटममेटा की दलील: ‘अभी शुरू नहीं हुआ फीचर, सुरक्षा के हैं पुख्ता इंतजाम’इम्पर्सनेशन (Impersonation) को रोकने के लिए क्या है मास्टरप्लान?सुरक्षा की मल्टी-लेयर व्यवस्था: स्कैमर्स पर ऐसे कषेगा शिकंजा1. फोन नंबर की अनिवार्यता बरकरार2. गेस-वर्क (Guessing Attack) पर रोक3. नए लोगों से संपर्क करने की सीमा (Rate Limiting)4. बिहेवियरल पैटर्न डिटेक्शनमैसेज एक्सेप्ट करने से पहले यूज़र को मिलेगी ‘पूरी कुंडली’सुरक्षा और तकनीक के बीच संतुलन की चुनौती

इस बीच, सरकारी नोटिस और चौतरफा दबाव के बाद वॉट्सऐप ने आज अपनी खामोशी तोड़ी है। कंपनी ने सरकार की चिंताओं को दूर करने के लिए अपनी दलीलें और सुरक्षा ब्लूप्रिंट को सामने रखा है। मेटा का दावा है कि इस फीचर को इस तरह डिज़ाइन किया गया है जिससे यूज़र्स की गोपनीयता बढ़ेगी, न कि साइबर अपराध।

सरकार की चिंता और तीन दिन का अल्टीमेटम

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और सरकार का मानना है कि वॉट्सऐप पर यूजरनेम फीचर आने से फेक अकाउंट्स, साइबर फ्रॉड, और वित्तीय घोटालों (Cyber Scams) में अचानक बाढ़ आ सकती है। वर्तमान में, वॉट्सऐप का इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर अनिवार्य होता है, जिससे किसी भी संदिग्ध एक्टिविटी के बाद आरोपी को ट्रैक करना कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए आसान होता है।

सरकार का मुख्य संशय: अगर टेलीग्राम (Telegram) की तर्ज पर वॉट्सऐप पर भी बिना मोबाइल नंबर उजागर किए सिर्फ यूजरनेम के जरिए चैट करने की सुविधा मिल गई, तो स्कैमर्स इसका गलत फायदा उठा सकते हैं। वे मशहूर हस्तियों, ब्रांड्स या सरकारी विभागों के नाम पर फर्जी यूजरनेम बनाकर आम नागरिकों को धोखा दे सकते हैं। इसी वजह से सरकार ने मामले के पूरी तरह साफ होने तक इस फीचर की लॉन्चिंग पर रोक लगाने को कहा है।

मेटा की दलील: ‘अभी शुरू नहीं हुआ फीचर, सुरक्षा के हैं पुख्ता इंतजाम’

सरकार के इस सख्त रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए वॉट्सऐप के आधिकारिक प्रवक्ता ने स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। कंपनी ने कहा है कि इस फीचर को लेकर जो पैनिक या डर का माहौल है, वह निराधार है क्योंकि यह टूल अभी लाइव ही नहीं हुआ है।

वॉट्सऐप के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा:

“हमने लोगों के लिए वॉट्सऐप पर अपना पसंदीदा यूज़रनेम रिज़र्व करने का ऑप्शन अनाउंस किया है। यूज़रनेम इस्तेमाल करने की सुविधा अभी शुरू नहीं हुई है और इसे इस साल के आखिर में धीरे-धीरे (Phased Manner) रोल आउट किया जाएगा।”

कंपनी का कहना है कि वे इस फीचर को लेकर किसी जल्दबाजी में नहीं हैं और इसे पूरी तरह से सुरक्षित बनाने के बाद ही यूज़र्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

इम्पर्सनेशन (Impersonation) को रोकने के लिए क्या है मास्टरप्लान?

इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी जड़ पहचान की चोरी या किसी दूसरे का रूप धरकर (Impersonation) ठगी करना है। इस पर वॉट्सऐप ने साफ किया है कि उन्होंने पहले से ही एक बेहद सुरक्षित रिजर्वेशन सिस्टम तैयार किया है।

मेटा के अनुसार, किसी भी बड़े नाम का गलत इस्तेमाल न हो, इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील नामों को पहले ही ब्लॉक या रिजर्व श्रेणी में डाल दिया गया है। कंपनी ने बताया कि:

  • मशहूर हस्तियां और सेलिब्रिटीज़: बॉलीवुड, स्पोर्ट्स और वैश्विक स्तर के बड़े चेहरों के नाम आम यूज़र्स क्लेम नहीं कर पाएंगे।

  • सरकारी संस्थाएं और विभाग: भारत सरकार और राज्य सरकारों के आधिकारिक विभागों के नामों को सुरक्षित रखा गया है।

  • वेरिफाइड मेटा अकाउंट्स: जिन ब्रांड्स या व्यक्तियों के पास पहले से मेटा पर वेरिफाइड टिक हैं, उनके यूजरनेम सिर्फ उनके असली मालिक ही क्लेम कर सकेंगे।

  • मिलते-जुलते नाम (Phishing Protection): जाने-माने नामों से मिलते-जुलते या भ्रामक स्पेलिंग वाले नामों को भी रिजर्व रखा गया है ताकि कोई ‘Typo-Squatting’ के जरिए लोगों को गुमराह न कर सके।

सुरक्षा की मल्टी-लेयर व्यवस्था: स्कैमर्स पर ऐसे कषेगा शिकंजा

वॉट्सऐप ने स्पष्ट किया है कि भले ही यूजरनेम आ जाए, लेकिन बैकएंड पर सुरक्षा का मूल ढांचा नहीं बदलेगा। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कंपनी ने निम्नलिखित तकनीकी उपायों का उल्लेख किया है:

1. फोन नंबर की अनिवार्यता बरकरार

कंपनी ने साफ किया है कि टेलीग्राम की तरह यह कोई पूरी तरह से अज्ञात (Anonymous) नेटवर्क नहीं बनेगा। वॉट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए यूज़र्स को अभी भी अपने वैध फ़ोन नंबर की ज़रूरत होगी। यूजरनेम सिर्फ एक ऊपरी लेयर होगी ताकि यूज़र्स को अपना नंबर हर किसी के साथ शेयर न करना पड़े।

2. गेस-वर्क (Guessing Attack) पर रोक

स्कैमर्स अक्सर हिट-एंड-ट्रायल मेथड का इस्तेमाल करके रैंडम यूजरनेम सर्च करते हैं। वॉट्सऐप ऐसे सिस्टम पर काम कर रहा है जो किसी के यूज़रनेम का अंदाज़ा लगाने की बार-बार की कोशिशों (Brute Force or Guessing Attempts) को भांपकर उस अकाउंट को तुरंत ब्लॉक कर देगा।

3. नए लोगों से संपर्क करने की सीमा (Rate Limiting)

अक्सर बॉट्स या स्कैमर्स एक साथ हजारों लोगों को मैसेज भेजते हैं। नए नियमों के तहत, वॉट्सऐप इस बात की सीमा (Limit) तय करेगा कि कोई भी नया अकाउंट एक निश्चित समय में कितने नए लोगों से कॉन्टैक्ट कर सकता है। इससे थोक में होने वाले स्पैम मैसेजेस पर लगाम लगेगी।

4. बिहेवियरल पैटर्न डिटेक्शन

मेटा अपनी एडवांस्ड मशीन लर्निंग और एआई सिस्टम का इस्तेमाल करेगी जो आम तौर पर होने वाले इंपर्सनेशन और गलत इस्तेमाल के पैटर्न का पता लगाकर उन्हें शुरुआती स्टेज में ही रोक देंगे।

मैसेज एक्सेप्ट करने से पहले यूज़र को मिलेगी ‘पूरी कुंडली’

डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वॉट्सऐप ने एक और बड़े फीचर का खुलासा किया है। कंपनी ने भरोसा दिया है कि जब यह फ़ीचर लाइव होगा, तब अनजान यूजरनेम से मैसेज आने पर यूज़र को पूरी चेतावनी और संदर्भ (Context) दिया जाएगा।

जब कोई आपके यूज़रनेम के ज़रिए आपको पहली बार मैसेज भेजेगा, तो चैट स्क्रीन पर एक विशेष अलर्ट बॉक्स दिखेगा, जिसमें निम्नलिखित जानकारियां होंगी:

  • अकाउंट की उम्र (Account Age): क्या वह अकाउंट बिल्कुल नया है? (अक्सर स्कैमर नए अकाउंट्स का इस्तेमाल करते हैं)।

  • कॉन्टैक्ट स्टेटस: क्या वह व्यक्ति आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में शामिल है?

  • कॉमन ग्रुप्स (Common Groups): क्या आपके और उस भेजने वाले के बीच कोई कॉमन ग्रुप है?

  • भौगोलिक स्थिति (Country Origin): क्या वह मैसेज किसी दूसरे देश के कंट्री कोड या लोकेशन से आ रहा है?

इन जानकारियों के आधार पर यूज़र खुद यह तय कर सकेगा कि उसे उस मैसेज का जवाब देना है, उसे ब्लॉक करना है या रिपोर्ट करना है।

सुरक्षा और तकनीक के बीच संतुलन की चुनौती

WhatsApp Username Feature Controversy ने एक बार फिर टेक कंपनियों की प्राइवेसी नीतियों और सरकारों की सुरक्षा चिंताओं के बीच के टकराव को उजागर कर दिया है। एक तरफ जहां वॉट्सऐप इसे यूज़र्स की प्राइवेसी (बिना नंबर शेयर किए बात करने की सुविधा) के लिए बड़ा कदम मान रहा है, वहीं भारत सरकार देश के नागरिकों को साइबर ठगी से बचाने के लिए सख्त रुख अपनाए हुए है।

अब सबकी नजरें मेटा द्वारा भारत सरकार को भेजे जाने वाले आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार वॉट्सऐप की इन दलीलों और सुरक्षा लेयर्स से संतुष्ट होती है, या फिर इस फीचर को भारत में लॉन्च करने के लिए मेटा को अपने नियमों में कुछ और कड़े बदलाव करने पड़ेंगे।

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