नई दिल्ली / देहरादून: देवभूमि उत्तराखण्ड में कनेक्टिविटी की एक नई क्रांति का सूत्रपात होने जा रहा है। राज्य के सुदूर सीमांत क्षेत्रों को जोड़ने, पर्यटन को वैश्विक स्तर पर रफ्तार देने और सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सड़कों को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार ने खजाना खोल दिया है। देश की राजधानी नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभाग किया।
इस मैराथन बैठक में उत्तराखण्ड में उत्तराखण्ड सड़क अवसंरचना विकास से जुड़े तमाम लंबित और नए प्रस्तावों पर बिंदुवार विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक के बाद राज्य के लिए बेहद सुखद परिणाम सामने आए, जहां केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उत्तराखण्ड की भौगोलिक और रणनीतिक महत्ता को समझते हुए लगभग ₹7,000 करोड़ से अधिक की विभिन्न सड़क परियोजनाओं पर अपनी सैद्धांतिक और वित्तीय सहमति प्रदान कर दी है।
भौगोलिक और सामरिक चुनौतियों को रेखांकित कर सीएम धामी ने जीता केंद्र का भरोसा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवभूमि की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और उसकी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का हवाला देते हुए मजबूत सड़क तंत्र की वकालत की। सीएम धामी ने जोर देकर कहा कि उत्तराखण्ड न केवल एक प्रमुख वैश्विक पर्यटन और तीर्थाटन का केंद्र है, बल्कि यह चीन और नेपाल जैसी संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटा राज्य भी है। ऐसे में सामरिक महत्ता, पर्यटन विकास और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के कुशल प्रबंधन के लिए राज्य में एक बेहद सुदृढ़, आधुनिक और ऑल-वेदर रोड नेटवर्क का होना समय की सबसे बड़ी मांग है।
मुख्यमंत्री की इन व्यावहारिक और गंभीर दलीलों का केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पर गहरा प्रभाव पड़ा, जिसके बाद उन्होंने राज्य के लंबित पड़े प्रस्तावों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने के निर्देश अधिकारियों को जारी कर दिए।
CRIF और NHO के तहत परियोजनाओं की बौछार: जानिए कहाँ क्या बदलेगा
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के रोडमैप को अंतिम रूप देते हुए भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी गई। केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (CRIF) के अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार को लगभग ₹750 करोड़ लागत की विभिन्न छोटी-बड़ी सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति पर अंतिम सहमति बन गई है।
इसके अलावा, नेशनल हाईवे ओरिजिनल (NHO) के अंतर्गत पांच ऐसी मेगा परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है जो आने वाले समय में उत्तराखण्ड के यातायात का चेहरा पूरी तरह बदल देंगी। इन 05 प्रमुख परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹2,966 करोड़ आंकी गई है, जिनमें निम्नलिखित कार्य प्रमुख रूप से शामिल हैं:
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श्रीनगर बाईपास: पहाड़ के इस महत्वपूर्ण शहर में लगने वाले लंबे जाम से मुक्ति दिलाने के लिए श्रीनगर बाईपास के पीएमसी (Project Management Consultancy) को हरी झंडी दी गई है।
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पुरकाजी–लक्सर–हरिद्वार मार्ग: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड को जोड़ने वाले इस बेहद व्यस्ततम मार्ग को अब ‘फोर-लेन’ (चार-लेन) में तब्दील किया जाएगा।
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लोहाघाट एवं पिथौरागढ़ बाईपास: कुमाऊं मंडल के इन दोनों महत्वपूर्ण सीमांत शहरों में बाईपास के अलाइनमेंट को अंतिम मंजूरी मिल गई है, जिससे चीन सीमा तक सेना और रसद की आवाजाही सुगम होगी।
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मझोला से खटीमा खंड: मझोला से खटीमा के घनी आबादी वाले हिस्से में सड़क का ‘चार-लेन विस्तार’ किया जाएगा, जिससे स्थानीय व्यापार और सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
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रामनगर–रानीखेत (मोहन) मार्ग: कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे इस पर्यटन मार्ग के सुदृढ़ीकरण को भी मंजूरी दी गई है।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री धामी ने केंद्र से वर्ष 2025-26 तक की लंबित पड़ी ₹530.11 करोड़ की प्रतिपूर्ति राशि को भी जल्द से जल्द राज्य सरकार को अवमुक्त करने का विशेष अनुरोध किया।
अर्धकुंभ मेला 2027 और कोटद्वार बाईपास के लिए विशेष कार्ययोजना को मंजूरी
उत्तराखण्ड के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सीएम धामी ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष आगामी ‘अर्धकुंभ मेला 2027’ की तैयारियों का खाका खींचा। उन्होंने विशेष रूप से अनुरोध किया कि हरिद्वार बाईपास परियोजना को समयबद्ध और युद्धस्तर पर पूर्ण किया जाना बेहद आवश्यक है। हरिद्वार में होने वाले इस महासमागम में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचेंगे। इस बाईपास के बन जाने से मेला क्षेत्र और मुख्य हाईवे पर यातायात का दबाव नाममात्र रह जाएगा और श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन की विश्वस्तरीय सुविधा मिलेगी।
इसी क्रम में, कुमाऊं और गढ़वाल के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले कोटद्वार में लगने वाले भीषण जाम से स्थानीय जनता को मुक्ति दिलाने के लिए कोटद्वार बाईपास परियोजना के कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया गया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इन दोनों ही प्रस्तावों पर अपनी सहर्ष सहमति जताते हुए अधिकारियों को टाइमलाइन तय करने को कहा।
नेशनल हाईवे कनेक्टिविटी: टनल और Spur रूट्स के लिए ₹3,300 करोड़ की सैद्धांतिक मंजूरी
कनेक्टिविटी को एक नए आयाम पर ले जाते हुए मुख्यमंत्री ने नेशनल हाईवे (NH) पर ‘Spur’ (मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले लिंक रोड) के माध्यम से अन्य आंतरिक राज्यीय मार्गों को आपस में संयोजित करने का एक बड़ा विजन पेश किया। सीएम धामी ने इसके लिए लगभग ₹3,000 करोड़ की सैद्धांतिक सहमति का अनुरोध किया, जिसे केंद्रीय मंत्रालय ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
इसके अतिरिक्त, पर्यावरण और पहाड़ों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए अल्मोड़ा के सिकुड़ा बैंड से एनएच-309 तक एक अत्याधुनिक टनल (सुरंग) सहित मोटर मार्ग निर्माण की योजना पर गहन चर्चा हुई। लगभग ₹300 करोड़ की लागत वाली इस टनल परियोजना को भी केंद्र सरकार की ओर से सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है, जिससे अल्मोड़ा और आसपास के जिलों की दूरी काफी घट जाएगी।
भूस्खलन का स्थायी वैज्ञानिक समाधान: ULMMC और मंत्रालय के बीच होगा MoU
उत्तराखण्ड में हाल के वर्षों में आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू ऑपरेशनों में राज्य सरकार की मुस्तैदी और सफलता को केंद्र सरकार ने भी सराहा है। इसी को आधार बनाते हुए मुख्यमंत्री ने पहाड़ों में भूस्खलन (Landslide) की गंभीर समस्या के स्थायी और वैज्ञानिक समाधान की बात उठाई।
उन्होंने अनुरोध किया कि राज्य के संवेदनशील और डेंजर ज़ोन घोषित हो चुके भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के उपचारात्मक कार्यों के लिए उत्तराखण्ड लैंडस्लाइड मिटिगेशन मैनेजमेंट सेंटर (ULMMC) के माध्यम से डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार करने के लिए एक विशेष समझौता ज्ञापन (MoU) किया जाए। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस दूरगामी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले प्रस्ताव को तत्काल स्वीकृत कर लिया है।
BRO की लंबित योजनाएं और पर्वतीय क्षेत्रों के टेंडर नियमों में बदलाव की मांग
बैठक में सीमा सड़क संगठन (BRO) से जुड़े उन तमाम प्रोजेक्ट्स पर भी चर्चा की गई जो सामरिक दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील हैं। मुख्यमंत्री ने ऋषिकेश–गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के ‘हिना–तेखला–नेताला–गरमपानी’ खंड की डीपीआर और जोशीमठ बाईपास मार्ग के संशोधित प्रस्तावों (COS) को देश की सुरक्षा के मद्देनजर शीघ्र मंजूरी देने की बात कही।
साथ ही, पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण की व्यावहारिक दिक्कतों को दूर करते हुए सीएम ने एक बड़ा सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जो निविदाएं (टेंडर्स) अत्यधिक कम दरों पर प्राप्त होती हैं, उनमें अतिरिक्त परफॉर्मेंस सिक्योरिटी की वर्तमान व्यवस्था में पहाड़ों की जटिलता को देखते हुए आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि स्लोप ट्रीटमेंट और सड़क निर्माण के कार्य गुणवत्ता और समय सीमा के भीतर पूरे हो सकें।
डबल इंजन सरकार के सहयोग से संवरेगा उत्तराखण्ड का भविष्य
बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सहयोगात्मक रवैये के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार के इस भारी-भरकम सहयोग से इन सभी महा-परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद उत्तराखण्ड में ढांचागत विकास को एक नई संजीवनी मिलेगी। यह न केवल पहाड़ों से पलायन को रोकने में मददगार साबित होगा, बल्कि सीमांत क्षेत्रों की सुरक्षा, पर्यटन और राज्य की आर्थिकी को एक ऐतिहासिक छलांग देगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री अजय टम्टा, उत्तराखण्ड के लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, सड़क परिवहन सचिव बृजेश कुमार संत और स्थानिक आयुक्त अजय मिश्रा सहित केंद्र व राज्य के कई आला अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे।
