मसूरी: उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल मसूरी के ‘हार्ट ऑफ द सिटी’ कहे जाने वाले मॉल रोड पर बीते दिन कानून-व्यवस्था और व्यवस्थापन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मॉल रोड की सुंदरता और सुचारू यातायात को बहाल करने के उद्देश्य से नगर पालिका परिषद द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पालिका की टीम और कुछ स्थानीय कारोबारियों के बीच तीखी नोकझोंक, धक्का-मुक्की और अभद्रता की घटना सामने आई है। पालिका प्रशासन का आरोप है कि कार्रवाई के विरोध में उतरे कुछ असामाजिक तत्वों ने न केवल सरकारी अधिकारियों का रास्ता रोका, बल्कि जब्त सामान से लदे सरकारी वाहन को भी बलपूर्वक आगे बढ़ने नहीं दिया। इस घटना के बाद से ही देवभूमि के इस शांत हिल स्टेशन के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में गरमागरमी बढ़ गई है। घटना से आक्रोशित पालिका कर्मचारी बड़ी संख्या में कोतवाली पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ तत्काल नामजद मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
देर रात की कार्रवाई और अचानक भड़का आक्रोश
प्राप्त विवरण के अनुसार, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) गौरव भसीन के नेतृत्व में पालिका की एक विशेष टास्क फोर्स मॉल रोड पर औचक निरीक्षण और कार्रवाई के लिए उतरी थी। पालिका प्रशासन को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर देर रात मॉल रोड के फुटपाथों पर अवैध रूप से पटरी (फड़) लगाकर कारोबार कर रहे हैं। इससे न केवल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को पैदल चलने में भारी असुविधा हो रही थी, बल्कि आपातकालीन वाहनों के आवागमन और स्थानीय यातायात व्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ रहा था।
इसी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए जब टीम ने सड़क किनारे लगे अवैध स्टॉलों और पटरियों को हटाना और सामान जब्त करना शुरू किया, तभी वहां मौजूद कुछ लोगों और महिलाओं ने टीम को चारों तरफ से घेर लिया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन ने उग्र रूप धारण कर लिया।
सरकारी वाहन को बंधक बनाने का प्रयास और ऑडियो रिकॉर्डिंग का खुलासा
नगर पालिका द्वारा कोतवाली पुलिस को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व संजय टम्टा नामक व्यक्ति और उसके साथ आई कुछ महिलाएं कर रही थीं। आरोप है कि इन लोगों ने पालिका के सफाई नायकों, कर्मचारियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सरेआम गाली-गलौज की और अभद्र व्यवहार किया। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने जब्त किए गए सामान को ले जा रहे पालिका के मुख्य सरकारी वाहन के आगे खड़े होकर उसे जबरन रोक दिया। मौके पर दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा, जिससे पूरे मॉल रोड क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इस मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब नगर पालिका प्रशासन ने दावा किया कि यह विवाद अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे सोची-समझी साजिश थी। पालिका के अनुसार, घटना से पहले ही आरोपी संजय टम्टा ने पालिका के एक कर्मचारी को उसके मोबाइल फोन पर गंभीर परिणाम भुगतने और देख लेने की धमकी दी थी। पालिका प्रशासन के पास इस कथित धमकी की पूरी ऑडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित है, जिसे पुलिस को अकाट्य साक्ष्य (Evidence) के तौर पर सौंपने की बात कही गई है।
कर्मचारियों का फूटा गुस्सा: ‘मनोबल तोड़ने की कोशिश बर्दाश्त नहीं’
इस घटना से नगर पालिका के संविदा और नियमित कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त हो गया है। पालिका कर्मचारी संघ के बैनर तले दर्जनों कर्मचारियों ने कामकाज छोड़ सीधे मसूरी कोतवाली का रुख किया और वहां जमकर नारेबाजी की।
महामंत्री ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नामजद आरोपियों के खिलाफ तत्काल कठोर कानूनी धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया, तो संपूर्ण पालिका कर्मचारी उग्र आंदोलन और पूर्ण कार्य बहिष्कार (Strike) के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने साफ किया कि यदि कार्य बहिष्कार होता है और शहर की सफाई व अन्य आवश्यक सेवाएं ठप होती हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस और स्थानीय प्रशासन की होगी।
अधिकारियों का कड़ा रुख: शासन और जिला प्रशासन को भेजी रिपोर्ट
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने इस पूरे मामले पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने प्रभारी निरीक्षक (मसूरी कोतवाल) को भेजे गए अपने आधिकारिक पत्र में इस घटना को राजकीय कार्यों में सीधी और जानबूझकर की गई बाधा करार दिया है। उन्होंने संजय टम्टा और उनके अज्ञात साथियों के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने, लोक सेवकों को डराने-धमकाने और कानून-व्यवस्था को खतरे में डालने के आरोप में तत्काल मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पत्र की प्रतिलिपियां जिलाधिकारी (DM) देहरादून, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), उपजिलाधिकारी (SDM) मसूरी और पालिका अध्यक्ष को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई हैं।
पुलिस की प्रतिक्रिया: जांच के बाद होगी नियमानुसार कार्रवाई
इस पूरे विवाद और पालिका कर्मचारियों के हंगामे पर मसूरी के कोतवाल देवेन्द्र चौहान ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि पुलिस को नगर पालिका प्रशासन की ओर से एक लिखित शिकायत और कुछ साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कर्मचारियों को आश्वस्त करते हुए कहा, “कानून को हाथ में लेने का अधिकार किसी को भी नहीं है, चाहे वह कोई भी हो। नगर पालिका की ओर से मिली शिकायत और उपलब्ध कराए जा रहे ऑडियो साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच के आधार पर जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके अनुसार निष्पक्ष और बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।” फिलहाल पुलिस ने मॉल रोड पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गश्त बढ़ा दी है, लेकिन इस घटना ने हिल स्टेशन की आंतरिक राजनीति और रेहड़ी-पटरी संचालकों के बीच के विवाद को एक बार फिर सतह पर ला दिया है।
