देहरादून: उत्तराखंड में जमीन की खरीद-फरोख्त, अवैध प्लॉटिंग और रियल एस्टेट सेक्टर में जारी मनमानी पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. सूबे में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ उत्तराखंड रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के ढांचे और कार्यप्रणाली में व्यापक एवं ऐतिहासिक सुधारों की पटकथा तैयार कर ली गई है. शासन स्तर पर हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में साफ कर दिया गया है कि देवभूमि में अब निवेशकों और आम घर-खरीदारों के हितों से खिलवाड़ करने वाले बिल्डरों और अवैध कॉलोनाइजरों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.
राष्ट्रीय स्तर की तर्ज पर बदलेगा ढांचा: अन्य राज्यों के मॉडल का अध्ययन
देहरादून में सचिव आवास एवं राज्य सम्पत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित रेरा की समीक्षा बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि उत्तराखंड को रियल एस्टेट के क्षेत्र में देश के अग्रणी और सबसे सुरक्षित राज्यों में शामिल किया जाए. इसके लिए सचिव आवास ने अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, असम और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में लागू सफल रेरा मॉडल्स (Best Practices) का एक तुलनात्मक और विस्तृत अध्ययन करें.
इस अध्ययन के आधार पर एक व्यापक ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा, जिससे अन्य राज्यों की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं को उत्तराखंड की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप ढाला जा सके. इस नीतिगत बदलाव का मुख्य उद्देश्य राज्य में रियल एस्टेट परियोजनाओं की प्रभावी निगरानी करना, निवेशकों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण करना और पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाना है.
खरीदारों के अधिकारों की रक्षा: नक्शा बदलने के लिए 2/3 बहुमत जरूरी
अक्सर देखा जाता है कि बिल्डर्स और प्रमोटर्स प्रोजेक्ट की बुकिंग के समय ग्राहकों को जो नक्शा या ले-आउट दिखाते हैं, बाद में उसमें गुपचुप तरीके से बदलाव कर देते हैं. धामी सरकार ने इस गड़बड़ी को रोकने के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच तैयार किया है. नए प्रस्ताव के मुताबिक, रेरा पंजीकरण के बाद जारी होने वाले आधिकारिक प्रमाण पत्र में अब यह शर्त स्पष्ट रूप से दर्ज होगी कि यदि प्रमोटर स्वीकृत मानचित्र (Approved Map) में किसी भी प्रकार का आंशिक या पूर्ण संशोधन करना चाहता है, तो उसे उस परियोजना के कम से कम दो-तिहाई (Two-Third) आवंटित खरीदारों की कानूनी सहमति लेना अनिवार्य होगा.
इसके साथ ही, राज्य में बिल्डर और प्रमोटर पंजीकरण व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने के लिए डेवलपर के ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ को सार्वजनिक किया जाएगा. प्रमोटरों को अपनी पूर्व की सभी परियोजनाओं का पूरा विवरण और इतिहास पोर्टल पर देना होगा, जिससे कोई भी आम नागरिक निवेश करने से पहले डेवलपर की क्रेडिबिलिटी और बाजार में उसकी साख को आसानी से परख सके.
अवैध प्लॉटिंग पर ‘डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक’: प्राधिकरणों के साथ साझा होगा डेटा
राज्य के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह उग रहीं अवैध कॉलोनियों और बिना स्वीकृत ले-आउट के हो रही प्लॉटिंग पर सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने गंभीर चिंता व्यक्त की. इस अवैध नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए रेरा और विभिन्न स्थानीय विकास प्राधिकरणों (जैसे MDDA, HRDA आदि) के बीच एक मजबूत रीयल-टाइम सूचना तंत्र विकसित करने का निर्णय लिया गया है.
अब नियम यह होगा कि यदि किसी विकास प्राधिकरण द्वारा किसी अवैध निर्माण या अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ सीलिंग, ध्वस्तीकरण या कुर्की की कार्रवाई की जाती है, तो उसकी समस्त सूचना तुरंत रेरा के साथ साझा की जाएगी. रेरा इस डेटा को अपने ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक करेगा. इससे आम खरीदार किसी भी विवादित या जोखिम भरी प्रॉपर्टी में अपनी गाढ़ी कमाई फंसाने से बच सकेंगे.
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और तय टाइमलाइन: निवेशकों को राहत
एक तरफ जहां सरकार अवैध काम करने वालों पर शिकंजा कस रही है, वहीं ईमानदारी से काम करने वाले डेवलपर्स के लिए प्रक्रियाओं को बेहद सुगम बनाया जा रहा है. रेरा के ऑनलाइन पोर्टल को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) के केंद्रीय ढांचे से पूरी तरह एकीकृत (Integrate) किया जाएगा.
बैठक में मौजूद रेरा के वर्तमान प्रभारी अध्यक्ष नरेश मठपाल ने स्पष्ट किया कि 500 वर्ग मीटर से अधिक के भूखंड या आठ से अधिक निर्मित इकाइयों वाली सभी आवासीय व व्यावसायिक परियोजनाओं के लिए विज्ञापन जारी करने, बुकिंग करने या बिक्री करने से पहले रेरा में पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है. इन आवेदनों के निपटारे के लिए 30 कार्य दिवस (Working Days) की सख्त समय-सीमा तय की गई है, जिससे निवेशकों को लालफीताशाही और अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े.
रिकॉर्ड प्रदर्शन: हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड का दबदबा
समीक्षा बैठक के दौरान उत्तराखंड रेरा की अब तक की उपलब्धियों का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया गया. आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017 में गठन के बाद से अब तक राज्य में कुल 689 रियल एस्टेट परियोजनाएं सफलतापूर्वक पंजीकृत हो चुकी हैं, जिसके साथ उत्तराखंड समस्त हिमालयी राज्यों में दूसरे स्थान पर काबिज है. वहीं, 510 पंजीकृत रियल एस्टेट एजेंटों के साथ उत्तराखंड इस सूची में पहले पायदान पर है.
शिकायतों के निपटारे के मामले में भी उत्तराखंड रेरा का ग्राफ राष्ट्रीय औसत से बेहतर है. प्राधिकरण को अब तक प्राप्त कुल 1342 शिकायतों में से 86 प्रतिशत का शत-प्रतिशत निस्तारण किया जा चुका है. इसके अतिरिक्त, सीएम हेल्पलाइन और केंद्र सरकार के सीपीग्राम्स (CPGRAMS) पोर्टल से प्राप्त होने वाली जन-शिकायतों का निपटारा 100 फ़ीसदी रहा है. वित्तीय पारदर्शिता के लिए बैठक में ‘बैंक अकाउंट डायरेक्शन-2025’ के कड़ाई से अनुपालन पर भी मुहर लगाई गई, जिसके तहत हर प्रोजेक्ट के लिए तीन अलग-अलग बैंक खाते रखना अनिवार्य होगा ताकि पैसों की हेराफेरी रोकी जा सके.
उपभोक्ता हितों की सुरक्षा सर्वोपरि: डॉ. आर. राजेश कुमार
बैठक के अंत में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर को पूरी तरह जवाबदेह और जनहितकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. हमारा उद्देश्य नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और आम नागरिकों को सुरक्षित एवं भरोसेमंद निवेश का माहौल देना है. इसके लिए रेरा की तमाम प्रक्रियाओं को आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से और अधिक सरल, डिजिटल और समयबद्ध बनाया जाएगा.
