
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पांच देशों के विदेश दौरे का सफल समापन कर लिया है और अंतिम पड़ाव के रूप में इटली से भारत के लिए रवाना हो गए हैं। इस व्यापक विदेश यात्रा का उद्देश्य भारत के वैश्विक संबंधों को मजबूत करना, रणनीतिक साझेदारियों को विस्तार देना और प्रमुख आर्थिक व सुरक्षा सहयोग को नई दिशा प्रदान करना था। इटली यात्रा के समापन के साथ ही यह दौरा भारत की विदेश नीति के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिसने यूरोप सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारत की उपस्थिति को और मजबूत किया है।
Narendra Modi का यह दौरा कई दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रधानमंत्री का अंतिम पड़ाव इटली था, जहां भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को और अधिक गहराई देने पर सहमति बनी। इस दौरे के बाद विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी करते हुए कहा कि भारत-इटली संबंधों को “नई गति” मिली है और दोनों देशों के बीच सहयोग के कई क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा सफल रही और इस यात्रा ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत और इटली के बीच उच्च स्तरीय राजनीतिक संवाद और संस्थागत सहयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते नए आयाम छू रहे हैं।
इटली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। दोनों देशों ने उन्नत विनिर्माण, रक्षा उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, सेमीकंडक्टर तकनीक और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री सुरक्षा और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी को मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
भारत और इटली के संबंध पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से विकसित हुए हैं। विशेष रूप से वर्ष 2023 में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के भारत दौरे के बाद दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया था। तब से दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय बैठकें, द्विपक्षीय वार्ताएं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संवाद लगातार जारी है। इस बढ़ते सहयोग ने दोनों देशों के बीच विश्वास और आर्थिक साझेदारी को और अधिक मजबूत किया है।
इस यात्रा के दौरान यह भी चर्चा का विषय रहा कि भारत और इटली मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर संयुक्त रूप से काम कर सकते हैं। दोनों देशों ने रूस-यूक्रेन संघर्ष, वैश्विक ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक अस्थिरता जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया।
विदेश नीति विशेषज्ञों के अनुसार यह दौरा भारत की “मल्टी-अलाइनमेंट” रणनीति का हिस्सा है, जिसमें देश विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ समान रूप से मजबूत संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। यूरोप में इटली भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार माना जाता है, और दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। इटली की कई कंपनियां भारत में इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, फैशन, नवीकरणीय ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादन जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जिससे आर्थिक सहयोग को और गति मिली है।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को भारत की विदेश नीति में एक सफल कूटनीतिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिसने न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को भी और सुदृढ़ किया है। इटली यात्रा के साथ समाप्त हुआ यह पांच देशों का दौरा आने वाले समय में भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर यह दौरा भारत-इटली विशेष रणनीतिक साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुले हैं। विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में इस साझेदारी को और विस्तार देने के लिए उच्च स्तरीय बातचीत और संयुक्त परियोजनाएं जारी रहेंगी।



