नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों में एक बार फिर बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। हालिया घटनाक्रम में जांच एजेंसी ने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS), मेरठ की एडिशनल डायरेक्टर और उनके निजी सहायक (PA) को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार के एक अन्य मामले में चेन्नई में तैनात रहे 2014 बैच के आईआरएस (IRS) अधिकारी के खिलाफ भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
CGHS मेरठ में भ्रष्टाचार के खिलाफ CBI का जाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच ब्यूरो को हाल ही में भ्रष्टाचार की एक ठोस शिकायत मिली थी। इस शिकायत के आधार पर 30 अप्रैल को सीबीआई ने एक मामला दर्ज किया। आरोप था कि सीजीएचएस के एक कर्मचारी का तबादला मुरादाबाद से मेरठ कराने के एवज में एडिशनल डायरेक्टर के निजी सहायक द्वारा 80,000 रुपये की रिश्वत की मांग की जा रही थी। यह कथित रिश्वत स्वास्थ्य भवन, सीजीएचएस, मेरठ के कार्यालय से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से मांगी जा रही थी।
शिकायत मिलने के बाद, सीबीआई की विशेष टीम ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जाल बिछाया। कार्रवाई के दौरान आरोपियों ने शिकायतकर्ता से 50,000 रुपये की रिश्वत लेने पर सहमति व्यक्त की। इसके बाद, केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम ने एडिशनल डायरेक्टर की ओर से रिश्वत की यह राशि स्वीकार कर रहे निजी सहायक को रंगे हाथों पकड़ लिया। इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के बाद एडिशनल डायरेक्टर और उनके निजी सहायक दोनों को हिरासत में ले लिया गया है और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है।
आईआरएस अधिकारी विकास पाल के खिलाफ भी मामला दर्ज
केंद्रीय जांच ब्यूरो ने रिश्वतखोरी के एक अन्य मामले में सख्त कदम उठाते हुए सीमा शुल्क विभाग (Customs Department) के एक उपायुक्त के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। प्राथमिकी में 2014 बैच के आईआरएस अधिकारी विकास पाल का नाम शामिल है। घटना के समय यह अधिकारी चेन्नई में तैनात थे और वर्तमान में केंद्रीय जीएसटी, नोएडा (अपील) में उपायुक्त के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
इस मामले का खुलासा साल 2021 में आलय ज्वेल इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक एस श्रीगंथ द्वारा की गई शिकायत के बाद हुआ। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी आभूषण कंपनी के बैंक खातों को ‘डीफ्रीज’ (Unfreeze) करने के बदले में आईआरएस अधिकारी द्वारा 250 ग्राम सोने के सिक्कों की मांग की गई थी। सीबीआई ने इस मामले में विकास पाल के कथित सहयोगी मोहम्मद सबाहुद्दीन को भी सह-आरोपी बनाया है।
प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर
देशभर में सरकारी विभागों के भीतर भ्रष्टाचार को रोकने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। सीजीएचएस जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों और जीएसटी जैसे राजस्व विभागों में इस तरह की घटनाओं का सामने आना प्रशासनिक पारदर्शिता और सुशासन पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है।
सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के प्रति उनकी नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की है। चाहे वह स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हों या राजस्व सेवा के, जो भी व्यक्ति कानून का उल्लंघन करते हुए पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
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CGHS मामला: गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को जल्द ही संबंधित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ उनकी रिमांड की मांग की जा सकती है ताकि इस पूरे रैकेट में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
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IRS मामला: आलय ज्वेल इंडस्ट्रीज के मामले में सीबीआई के जांच अधिकारी कंपनी के वित्तीय दस्तावेजों और बैंक खातों के फ्रीज-डीफ्रीज होने के रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच कर रहे हैं।
इस घटना के बाद से ही सरकारी कार्यालयों में हड़कंप मच गया है और कर्मचारियों तथा अधिकारियों को अपने कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने की सख्त हिदायत दी जा रही है।



