उत्तराखंडपर्यटनफीचर्ड

आदि कैलाश और ऊं पर्वत यात्रा शुरू, 200 श्रद्धालुओं को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

उत्तराखंड के सीमांत जिला पिथौरागढ़ में प्रसिद्ध आदि कैलाश और ऊं पर्वत यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। धारचूला से प्रशासन की ओर से करीब 200 श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यात्रा शुरू होते ही पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और पर्यटन गतिविधियों में तेजी देखने को मिल रही है। शिवभक्तों के “हर-हर महादेव” के जयघोष से धारचूला का माहौल भक्तिमय हो उठा।

धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने यात्रा को रवाना करते हुए बताया कि इस वर्ष अब तक करीब 500 यात्रियों ने आवेदन किया है, जिनमें से 350 लोगों को इनर लाइन परमिट जारी किए जा चुके हैं। प्रशासन ने यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। यात्रियों को स्वास्थ्य जांच, सुरक्षा निर्देश और मौसम संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई जा रही है।

यह यात्रा धारचूला से शुरू होकर करीब 140 किलोमीटर लंबे पहाड़ी मार्ग से गुजरती है। यात्री गुंजी, कुटी और ज्योलिंगकांग पहुंचकर पार्वती सरोवर के पास स्थित आदि कैलाश के दर्शन करेंगे। इसके बाद श्रद्धालु नाभिढांग जाकर प्रसिद्ध ऊं पर्वत के दर्शन करेंगे, जहां प्राकृतिक रूप से बर्फ की आकृति “ॐ” के स्वरूप में दिखाई देती है। यही दृश्य इस पर्वत को विशेष धार्मिक पहचान देता है।

यात्रा के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पुलिस उपाधीक्षक धारचूला कुंवर सिंह रावत और एसओ हरेंद्र सिंह नेगी ने यात्रियों और वाहन चालकों से पहाड़ी मार्गों पर सावधानीपूर्वक यात्रा करने की अपील की है। प्रशासन ने कहा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए यात्रियों को निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

आदि कैलाश यात्रा को पिछले कुछ वर्षों में बड़ी पहचान मिली है। खासकर अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन तेजी से बढ़ा है। पहले जहां हर साल दो हजार से भी कम लोग यहां पहुंचते थे, वहीं अब पर्यटकों की संख्या 30 हजार के पार पहुंच चुकी है। इस साल प्रशासन को उम्मीद है कि करीब एक लाख श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंच सकते हैं।

आदि कैलाश को अब कैलाश मानसरोवर यात्रा के विकल्प के रूप में भी देखा जा रहा है। चीन सीमा से जुड़े कारणों और सीमित पहुंच की वजह से जहां कैलाश मानसरोवर यात्रा कठिन मानी जाती है, वहीं आदि कैलाश यात्रा अपेक्षाकृत कम समय और कम खर्च में पूरी हो जाती है। चारधाम यात्रा में जहां 5 से 11 दिन का समय लग सकता है, वहीं आदि कैलाश यात्रा लगभग 5 से 7 दिनों में पूरी हो जाती है। यही कारण है कि युवा और एडवेंचर पसंद पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं।

हालांकि यह यात्रा आसान नहीं मानी जाती। यात्रा मार्ग 3,000 से 5,500 मीटर की ऊंचाई तक जाता है, जहां ऑक्सीजन की कमी और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा बना रहता है। इसी वजह से प्रशासन ने मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और इनर लाइन परमिट को अनिवार्य किया है। यात्रियों को पर्याप्त गर्म कपड़े, दवाइयां और जरूरी सुरक्षा सामग्री साथ रखने की सलाह दी गई है।

यात्रा शुरू होने के साथ ही स्थानीय कारोबारियों में भी उत्साह बढ़ गया है। धारचूला, गुंजी, कुटी और ज्योलिंगकांग क्षेत्र में होटल, होमस्टे और टूर ऑपरेटरों के व्यवसाय को नया सहारा मिला है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक पर्यटन बढ़ने से रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़े हैं। यात्रा पैकेज 25 हजार रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक उपलब्ध हैं, जिनमें यात्रा, ठहरने, भोजन और परमिट जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

हालांकि बढ़ती पर्यटक संख्या के बीच पर्यावरण को लेकर चिंताएं भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हेलीकॉप्टर सेवाओं और बढ़ती मानवीय गतिविधियों से ग्लेशियर क्षेत्रों और प्राकृतिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन को विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी।

रणनीतिक दृष्टि से भी यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह भारत-चीन सीमा के पास स्थित है। सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से सेना और आईटीबीपी की गतिविधियां भी मजबूत हुई हैं। धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और सामरिक महत्व के कारण आदि कैलाश और ऊं पर्वत यात्रा लगातार देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनती जा रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button