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उत्तराखंड: भाजपा विधायक के कथित वायरल पत्र से उत्तराखंड की राजनीति गरमाई, कांग्रेस ने धामी सरकार पर उठाए सवाल

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब गदरपुर से भाजपा विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे के नाम से जुड़ा एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। इस पत्र को लेकर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस मामले को लोकतंत्र, प्रशासनिक निष्पक्षता और सत्ता के दुरुपयोग से जोड़ते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।

गणेश गोदियाल ने देहरादून में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पत्र बेहद गंभीर आरोपों से भरा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि यह पत्र भाजपा विधायक अरविंद पांडे के लेटर पैड पर लिखा गया है और उस पर उनके हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। हालांकि पत्र किसे संबोधित किया गया है, उसे काले रंग से छिपा दिया गया है, लेकिन उसमें प्रयुक्त भाषा और संदर्भ यह संकेत देते हैं कि मामला बेहद संवेदनशील है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से वह एक महत्वपूर्ण विषय को लेकर राज्यपाल से समय मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें मुलाकात का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को निष्पक्ष भूमिका निभानी चाहिए, लेकिन राजनीतिक कारणों से उन्हें समय नहीं दिया गया। इसी वजह से अब यह मुद्दा सार्वजनिक रूप से सामने लाना पड़ रहा है।

गणेश गोदियाल ने वायरल पत्र की सामग्री का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्र में कथित तौर पर लिखा गया है कि मुख्यमंत्री पिछले चार वर्षों से अरविंद पांडे के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र कर रहे हैं। इतना ही नहीं, पत्र में यह भी दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री के इशारे पर 13 मार्च 2025 को बाजपुर थाने में एक फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद 20 जनवरी 2026 को उनके परिवार पर जमीन कब्जाने का झूठा मामला दर्ज कर दबाव बनाने की कोशिश की गई।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पत्र में कुछ पुलिस अधिकारियों के नामों का भी उल्लेख किया गया है और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं। गोदियाल के अनुसार, पत्र में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री प्रदेश में राजनीतिक गुटबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं तथा विरोधियों के खिलाफ आर्थिक और सामाजिक स्तर पर षड्यंत्र किए जा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि पत्र में विधायक अरविंद पांडे ने अपने पुत्र को एसएसपी के माध्यम से धमकाए जाने का आरोप भी लगाया है। इसके अलावा पत्र में वरिष्ठ नेता सुखदेव सिंह नामधारी का नाम लेते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की गई है। कांग्रेस ने इन आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए पूरे मामले की न्यायिक निगरानी में जांच कराने की मांग की है।

गणेश गोदियाल ने कहा कि यदि सत्ता पक्ष का ही विधायक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है और मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगा रहा है, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार केवल कागजों में विकास दिखाने का काम कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हो रही हैं।

इस पूरे मामले पर अभी तक भाजपा विधायक अरविंद पांडे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं भाजपा की तरफ से भी इस कथित पत्र की सत्यता को लेकर कोई स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह पत्र वास्तविक साबित होता है, तो इससे भाजपा सरकार की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ सकती है। दूसरी ओर यदि पत्र फर्जी साबित होता है, तो यह राजनीतिक साजिश का मामला भी बन सकता है।

फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल इस कथित पत्र ने उत्तराखंड की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस लगातार सरकार पर हमलावर है, जबकि भाजपा बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या वायरल पत्र की सत्यता की जांच कराई जाएगी या नहीं।

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