
कर्नाटक की राजनीति में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और न ही इसके लिए कोई तारीख तय की गई है। खड़गे ने कहा कि मुख्यमंत्री बदलने से जुड़ा कोई भी फैसला कांग्रेस हाईकमान सामूहिक रूप से करेगा, जिसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और वह स्वयं शामिल होंगे।
कलबुर्गी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खड़गे ने मीडिया से अपील करते हुए कहा कि उनके बयानों को गलत तरीके से प्रस्तुत न किया जाए। उन्होंने कहा, “जब तक कोई तारीख तय नहीं होती, तब तक यह कहना गलत होगा कि मुख्यमंत्री बदला जाएगा या नहीं। पार्टी के शीर्ष नेता आपस में चर्चा करेंगे और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।”
दरअसल, पिछले कुछ समय से कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन को लेकर राजनीतिक अटकलें लगातार तेज हो रही हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के शिवकुमार के बीच सत्ता संतुलन को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है।
हालांकि कांग्रेस नेतृत्व अब तक इस मुद्दे पर खुलकर कुछ भी कहने से बचता रहा है। खड़गे के ताजा बयान को इसी संदर्भ में काफी अहम माना जा रहा है। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस में फैसले किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं लिए जाते, बल्कि व्यापक चर्चा और वरिष्ठ नेताओं की राय लेने के बाद ही निर्णय होता है। उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा राज्य के हित को सर्वोपरि रखती है और जो भी फैसला होगा, वह जनता और सरकार की स्थिरता को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी पहले कई बार यह कह चुके हैं कि वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि यदि पार्टी नेतृत्व कोई अलग निर्णय लेता है तो वह उसका सम्मान करेंगे। दूसरी ओर डी.के. शिवकुमार के समर्थक लगातार उन्हें भविष्य का मुख्यमंत्री बताते रहे हैं। यही कारण है कि राज्य में राजनीतिक चर्चाओं का माहौल गर्म बना हुआ है।
पिछले कुछ दिनों में डी.के. शिवकुमार की दिल्ली यात्राओं और कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं से मुलाकातों ने इन अटकलों को और ज्यादा हवा दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व कर्नाटक में किसी भी तरह की अंदरूनी कलह से बचना चाहता है क्योंकि राज्य दक्षिण भारत में पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व कोई भी कदम बेहद सोच-समझकर उठाना चाहता है।
खड़गे ने यह भी कहा कि कांग्रेस संगठन में अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व की परंपरा रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें। उन्होंने कहा कि जब भी कोई निर्णय होगा, पार्टी खुद सार्वजनिक रूप से उसकी जानकारी देगी।
कर्नाटक की राजनीति पर पूरे देश की नजर बनी हुई है क्योंकि यहां कांग्रेस की सरकार 2023 के विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद सत्ता में आई थी। ऐसे में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी चर्चाएं केवल राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। फिलहाल खड़गे के बयान से इतना साफ हो गया है कि कांग्रेस अभी किसी जल्दबाजी में नहीं है और अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान के स्तर पर ही लिया जाएगा।



