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उत्तराखंड: बैसाखी पर तय होगी मद्महेश्वर और तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि, धार्मिक अनुष्ठानों के बीच होगी भव्य घोषणा

The Hill India News
Last updated: April 13, 2026 11:41 am
The Hill India News
Published: April 13, 2026
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रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के प्रसिद्ध पंच केदारों में शामिल द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि कल बैसाखी पर्व के पावन अवसर पर विधिवत घोषित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया को लेकर दोनों धामों के शीतकालीन गद्दी स्थलों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। विद्वान आचार्यों, तीर्थ पुरोहितों और मंदिर समिति के पदाधिकारियों की उपस्थिति में पंचांग गणना के आधार पर शुभ मुहूर्त निकाला जाएगा, जिसके बाद कपाट खुलने की तिथि सार्वजनिक की जाएगी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर वर्ष बैसाखी के दिन ही इन पवित्र धामों के कपाट खुलने की तिथि तय की जाती है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, जिसमें श्रद्धालुओं की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस बार भी गद्दी स्थलों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो चुका है।

भगवान मद्महेश्वर धाम, जिसे मध्यमहेश्वर भी कहा जाता है, पंच केदारों में द्वितीय स्थान रखता है। यहां भगवान शिव के मध्य भाग की पूजा की जाती है, जो इस धाम की विशेष पहचान है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भगवान मद्महेश्वर को न्याय के देवता के रूप में भी पूजा जाता है। केदारघाटी, मनसूना और तुंगनाथ घाटी के लोग किसी भी विवाद या समस्या के समाधान के लिए यहां श्रद्धा से पूजा-अर्चना करते हैं। यही कारण है कि यह धाम धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक आस्था का भी केंद्र बना हुआ है।

मद्महेश्वर धाम की चल विग्रह उत्सव डोली ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ से धाम के लिए प्रस्थान करती है। इस यात्रा के लिए भी बैसाखी के दिन शुभ मुहूर्त निकाला जाएगा। मंदिर समिति के प्रभारी अधिकारी डीएस भुजवाण के अनुसार, तिथि घोषणा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और कार्यक्रम को भव्य एवं सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

वहीं तुंगनाथ धाम, जो विश्व के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में से एक माना जाता है, पंच केदारों में तृतीय केदार के रूप में प्रतिष्ठित है। समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर करीब एक हजार साल पुराना बताया जाता है। यहां भगवान शिव की भुजाओं की पूजा की जाती है। तुंगनाथ धाम की विशेषता इसकी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण है, जो हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

तुंगनाथ धाम के ठीक ऊपर चंद्रशिला शिखर स्थित है, जो ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है। यहां से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है, जिसमें रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद की पर्वत श्रृंखलाएं स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं। साथ ही, यहां गंगा मैया का एक छोटा मंदिर भी स्थित है, जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

तुंगनाथ धाम की चल विग्रह डोली मक्कूमठ से धाम के लिए रवाना होती है। मंदिर प्रबंधक बलवीर सिंह नेगी के अनुसार, डोली प्रस्थान का शुभ मुहूर्त भी बैसाखी के दिन पंचांग गणना के आधार पर तय किया जाएगा। इस अवसर पर हक-हकूकधारियों और विद्वान आचार्यों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी, जिससे परंपराओं का पूर्ण रूप से पालन किया जा सके।

प्रशासन और मंदिर समितियां श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष तैयारियां कर रही हैं। धामों तक जाने वाले मार्गों की सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त किया जा रहा है, ताकि कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के दर्शन कर सकें।

कुल मिलाकर, बैसाखी का यह पर्व उत्तराखंड के इन पवित्र धामों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। कपाट खुलने की तिथि की घोषणा के साथ ही चारधाम यात्रा और पंच केदार यात्रा की तैयारियां भी तेज हो जाएंगी। श्रद्धालुओं में इस घोषणा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है और सभी की निगाहें कल होने वाली इस महत्वपूर्ण धार्मिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।

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