
हरिद्वार | 21 फरवरी, 2026: सनातन धर्म के सबसे बड़े समागम ‘महाकुंभ 2027’ को लेकर उत्तराखंड सरकार ने अपनी कमर कस ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को धर्मनगरी हरिद्वार में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि आगामी कुंभ मेला न केवल दिव्य और भव्य होगा, बल्कि तकनीकी और सुरक्षा के दृष्टिकोण से ऐतिहासिक भी होगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सुगमता और सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समयबद्धता और गुणवत्ता पर विशेष जोर
मेला नियंत्रण भवन (सीसीआर) में आयोजित इस मैराथन बैठक में मुख्यमंत्री ने अब तक हुई प्रगति का बारीकी से विश्लेषण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि कुंभ से संबंधित सभी प्रमुख स्थाई निर्माण कार्यों को आगामी अक्टूबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ कराया जाएगा, ताकि भविष्य में बुनियादी ढांचे को लेकर कोई सवाल न उठे।
सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन: आधुनिक तकनीक का समावेश
कुंभ जैसे विशाल आयोजन में भीड़ नियंत्रण (Crowd Management) सबसे बड़ी चुनौती होती है। मुख्यमंत्री ने संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए अभी से ‘स्नान-आवागमन-ठहराव’ (Bathe-Transit-Stay) की विस्तृत योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
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यातायात प्रबंधन: वैकल्पिक मार्गों का चिह्नीकरण और पर्याप्त पार्किंग स्थलों का विकास।
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विशेष श्रेणी सुविधा: महिला एवं वृद्ध श्रद्धालुओं के लिए अलग से विशेष प्रबंध।
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सुरक्षा कवच: पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ साइबर सुरक्षा और अग्निशमन के लिए हाई-टेक रेस्क्यू टीमों की तैनाती।
स्वास्थ्य और स्वच्छता: बोट एवं बाइक एंबुलेंस की होगी तैनाती
‘स्वच्छ कुंभ-सुरक्षित कुंभ’ के संकल्प को दोहराते हुए सीएम धामी ने कुंभ क्षेत्र में स्वच्छता के लिए स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उन्होंने एक अभिनव पहल पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बीमार श्रद्धालुओं की सहायता के लिए बाइक एंबुलेंस और गंगा नदी के तटीय क्षेत्रों के लिए बोट एंबुलेंस की व्यवस्था की जाए।
इंफ्रास्ट्रक्चर और सौंदर्यीकरण का खाका
मुख्यमंत्री ने सिंचाई और लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए कि कुंभ क्षेत्र के सभी पुलों का ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराया जाए। इसके साथ ही:
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विद्युत लाइनीकरण: कुंभ मेला क्षेत्र की सभी लटकती विद्युत लाइनों को मेले से पूर्व भूमिगत (Underground) किया जाएगा।
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घाटों का सुदृढ़ीकरण: गंगा के घाटों पर फिसलन-रोधी (Anti-skid) व्यवस्था और मजबूत रेलिंग लगाई जाएगी।
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अतिक्रमण मुक्त कुंभ: मेलाधिकारी को स्वयं भूमि प्रबंधन की मॉनिटरिंग करने और क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त रखने के सख्त आदेश दिए गए हैं।
संतों का आशीर्वाद और जन-भागीदारी
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कुंभ की सफलता बिना साधु-संतों, अखाड़ों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग के संभव नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी अखाड़ों के सुझावों को कार्ययोजना में शामिल किया जाए। बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और सुबोध उनियाल सहित सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए।
बैठक में उपस्थित प्रमुख चेहरे
इस उच्च स्तरीय समीक्षा में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की, जिनमें सचिव शहरी विकास नितेश कुमार झा, मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका, गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय और उत्तर रेलवे की डीआरएम विनीता श्रीवास्तव प्रमुख थीं। इनके अलावा स्थानीय विधायकों और महापौरों ने भी क्षेत्रवार समस्याओं और सुझावों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।
वैश्विक पटल पर उत्तराखंड की छाप
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि सरकार कुंभ 2027 को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और प्रशासनिक क्षमता को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित करने के अवसर के रूप में देख रही है। अक्टूबर की समयसीमा तय करना यह सुनिश्चित करता है कि अंतिम समय में किसी भी प्रकार की अफरा-तफरी न मचे।



