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Digital Uttarakhand: देहरादून के सरकारी स्कूलों में अब दिखेगा ‘स्मार्ट’ बदलाव, 880 LED टीवी से लैस होंगी कक्षाएं

देहरादून | 21 फरवरी, 2026: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के ‘डिजिटल देवभूमि’ के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में देहरादून जिला प्रशासन ने एक बड़ी छलांग लगाई है। जनपद के सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने और उन्हें निजी स्कूलों के समकक्ष खड़ा करने के लिए डिजिटल एजुकेशन के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया गया है। जिले के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट उत्कर्ष’ के तहत 880 स्मार्ट एलईडी टीवी का स्टॉक तैयार कर लिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में सरकारी विद्यालयों के छात्र भी ऑडियो-विजुअल माध्यम से शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।

‘प्रोजेक्ट उत्कर्ष’: निजी स्कूलों को टक्कर देंगे सरकारी विद्यालय

पिछले डेढ़ वर्षों से देहरादून जिला प्रशासन जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधारने में जुटा है। प्रोजेक्ट उत्कर्ष के तहत अब तक जिले के स्कूलों को आधुनिक फर्नीचर, खेल अवस्थापना, स्वच्छ शौचालय, बिजली, पेयजल, मंकीनेट और समृद्ध लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं से लैस किया जा चुका है। अब इस कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण अध्याय स्मार्ट क्लास का जुड़ने जा रहा है।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को वही तकनीकी सुविधाएं प्रदान करना है, जो महानगरों के महंगे निजी स्कूलों में उपलब्ध होती हैं। 880 स्मार्ट टीवी की यह खेप सरकारी स्कूलों में डिजिटल, इंटरएक्टिव और दृश्य-आधारित शिक्षण (Visual Learning) को वास्तविकता बनाएगी।


गुणवत्ता से समझौता नहीं: पांडिचेरी पहुंची विशेष जांच टीम

सार्वजनिक धन के सदुपयोग और उपकरणों की उच्चतम गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी सविन बंसल ने एक अभूतपूर्व निर्णय लिया है। स्मार्ट टीवी को सीधे स्कूलों में मंगवाने के बजाय, उनके विनिर्माण स्थल (Manufacturing Unit) पर ही प्री-डिस्पैच निरीक्षण (PDI) कराने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके लिए जिला प्रशासन का एक उच्चस्तरीय दस्ता, जिसमें जिला सूचना विज्ञान अधिकारी (DIO) और मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) शामिल हैं, पांडिचेरी स्थित एसीईआर (ACER) फैक्टरी के लिए रवाना हो गया है। यह टीम वहां जाकर निम्नलिखित मानकों की सूक्ष्म जांच करेगी:

  • तकनीकी विनिर्देश: क्या टीवी बिड डॉक्यूमेंट में तय की गई विशिष्टताओं के अनुरूप हैं?

  • सुरक्षा मानक: बच्चों के उपयोग हेतु बिजली और स्क्रीन की सुरक्षा के क्या प्रावधान हैं?

  • सॉफ्टवेयर और इंटरफेस: क्या शैक्षिक सामग्री को चलाने के लिए इंटरफेस सहज और अपडेटेड है?

निरीक्षण टीम की हरी झंडी मिलने के बाद ही यह स्टॉक देहरादून के लिए डिस्पैच किया जाएगा।


महीनों की मेहनत और रणनीतिक विश्लेषण का परिणाम

यह प्रोजेक्ट केवल खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है। जिला प्रशासन ने इसके पीछे महीनों की कड़ी मेहनत की है। बिड डॉक्यूमेंट तैयार करने से लेकर, तकनीकी विश्लेषण और प्री-बिड मीटिंग्स के दौर चले, ताकि सबसे कम लागत में सर्वश्रेष्ठ तकनीक प्राप्त की जा सके। यह पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि सरकारी स्कूलों को मिलने वाले उपकरण लंबे समय तक टिकने वाले और प्रभावी हों।

डिजिटल शिक्षा से बदलेंगे सीखने के तौर-तरीके

सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत से कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:

  1. रोचक शिक्षण: कठिन विषयों को ऑडियो-विजुअल और एनिमेशन के माध्यम से समझाना शिक्षकों के लिए आसान होगा।

  2. समान अवसर: दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र भी वैश्विक स्तर की डिजिटल सामग्री तक पहुंच सकेंगे।

  3. सहभागितापूर्ण शिक्षा: इंटरएक्टिव स्क्रीन के माध्यम से छात्रों की कक्षा में भागीदारी बढ़ेगी।

  4. पारदर्शिता और जवाबदेही: डिजिटल उपकरणों के माध्यम से सीखने के परिणामों (Learning Outcomes) का बेहतर मूल्यांकन हो सकेगा।

जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता

जिलाधिकारी सविन बंसल के अनुसार, “हमारा उद्देश्य केवल बुनियादी ढांचा सुधारना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। स्मार्ट क्लास परियोजना से जनपद के हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों का लाभ मिलेगा और भविष्य की डिजिटल शिक्षा प्रणाली के लिए एक मजबूत आधार तैयार होगा।”

देहरादून जिला प्रशासन का यह नवाचार न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है। जहाँ सरकारी धन का उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ सीधे छात्रों के भविष्य को संवारने के लिए किया जा रहा है। पांडिचेरी से आने वाली स्मार्ट टीवी की यह खेप देहरादून के शिक्षा जगत में एक नए युग की शुरुआत करेगी।

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