
दिल्ली के प्रतिष्ठित लुटियंस बंगलो जोन (LBZ) में स्थित टिहरी हाउस की लगभग ₹1,000 करोड़ में संभावित बिक्री ने रियल एस्टेट बाजार से लेकर शाही इतिहास तक सबकी निगाहें खींच ली हैं। यह 3.2 एकड़ में फैला आलीशान बंगला, जो भगवान दास रोड पर स्थित है, उत्तराखंड के टिहरी-गढ़वाल रियासत की शाही संपत्ति के रूप में वर्षों से जाना जाता रहा है।
‘टिहरी हाउस’ दिल्ली के सबसे प्रीमियम और ऐतिहासिक इलाके में स्थित है, जिसे ब्रिटिश वास्तुकार सर एडविन लुटियंस ने डिजाइन किया था और 20वीं सदी में विकसित किया गया था। लुटियंस जोन में भूमि बेहद सीमित और नियंत्रित होती है, इसलिए यहां की संपत्तियों की मांग हमेशा ऊँची रहती है।
यह बंगला टिहरी-गढ़वाल के शाही परिवार के लिए रूसाती मुख्य निवास रहा है और इसकी गिनती विशिष्ट ऐतिहासिक और शाही संपत्तियों में होती है। टीहसी रिकॉर्ड के अनुसार, यह वर्तमान में मनुजेंद्र शाह, टिहरी गढ़वाल के शीर्ष राजपरिवार के वारिस के स्वामित्व में है, और यह स्थल अपनी शानदार वास्तुकला, खुले जंगलों और विशाल परिसर के लिए प्रसिद्ध है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मनुजेंद्र शाह इस संपत्ति को लगभग ₹1,000 करोड़ में बेचने की प्रक्रिया में हैं। खरीदार के बारे में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कहा जा रहा है कि यह वही डीलर है जिसने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पहले आधिकारिक आवास का सौदा भी लगभग ₹1,100 करोड़ में किया था, जो खुद भी एक रिकॉर्ड रियल एस्टेट ट्रांजेक्शन के रूप में उभर कर आया था।
अगर यह सौदा अंतिम रूप ले लेता है, तो यह भारत की राजधानी के इतिहास में सबसे बड़े और महंगे आवासीय प्रॉपर्टी सौदों में से एक बन जाएगा—जिसकी कीमतें अब तक आम तौर पर ₹500–600 करोड़ की सीमा के आसपास रही हैं। ऐसे सौदे दिल्ली को मुंबई की लक्ज़री प्रॉपर्टी मार्केट के करीब ले जा सकते हैं।
टिहरी हाउस का वर्तमान मालिक मनुजेंद्र शाह हैं—टिहरी गढ़वाल राज्य के शाही वंश के उत्तराधिकारी। उनका परिवार ऐतिहासिक रूप से उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र का शासन करता रहा है, और उनके पिता मानवेंद्र शाह कई बार सांसद भी रहे। मनुजेंद्र शाह की पत्नी माला राज्य लक्ष्मी शाह वर्तमान में टिहरी गढ़वाल से लोकसभा की सांसद हैं।
मनुजेंद्र शाह को एक शाही जीवन शैली और लग्ज़री कारों का बेहद शौक है, और उनके पास BMW, Porsche सहित कई नियमित और विंटेज मोटरकारों का बड़ा संग्रह बताया जाता है।
लुटियंस जोन न केवल दिल्ली की प्रशासनिक और संवैधानिक शक्ति का प्रतीक है, बल्कि यहां की संपत्तियाँ भारतीय रियल एस्टेट में विशिष्टता और विरासत मूल्य की पहचान हैं। यहां के बंगले 20वीं सदी के प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक और औपचारिक समारोहों के केंद्र रहे हैं। भूमि की दुर्लभता और ऐतिहासिक महत्ता इसे हर निवेशक और उच्च नेट-वर्थ व्यक्तियों की पहली पसंद बनाती है।
ऐसे सौदे, जो ₹1,000 करोड़ से ऊपर जाएं, भारतीय रियल एस्टेट के लिए नए मानक स्थापित कर सकते हैं और शहरी लक्ज़री संपत्ति की सीमा को परिभाषित कर सकते हैं। यह न सिर्फ एक प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन है, बल्कि यह दक्षिण एशिया के ऐतिहासिक घरों की प्राचीनता, राजनीतिक पृष्ठभूमि और आधुनिक बाजारों के बीच संबंध को भी उजागर करता है।



