
कराईकल (पुडुचेरी) | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को एक दिवसीय दौरे पर पुडुचेरी पहुंचे, जहाँ उन्होंने कराईकल के संथाई थिदल में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को लेकर विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे सवालों का कड़ा जवाब दिया। शाह ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए ये समझौते देश के किसानों और मछुआरों के लिए स्वर्णिम भविष्य की नींव हैं।
राहुल गांधी पर सीधा हमला: “झूठ बोलो, जोर से बोलो” की नीति
गृह मंत्री ने राहुल गांधी का नाम लेते हुए उन पर देश के अन्नदाताओं और मछुआरों को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया। शाह ने कहा, “राहुल गांधी जी की एक ही नीति है – झूठ बोलो, जोर से बोलो, सार्वजनिक रूप से बोलो और बार-बार बोलो। मगर राहुल जी, इस देश की जनता अब आपकी ‘झूठ मैन्युफैक्चरिंग की फैक्ट्री’ को अच्छी तरह पहचान गई है। आप चाहे जितना भ्रांति फैला लें, जनता सत्य जानती है।”
उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें ट्रेड डील और एफटीए (FTA) की बारीकियों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए, न कि बिना तथ्यों के राजनीति करनी चाहिए।
‘किसानों और पशुपालकों को 100% प्रोटेक्शन’
अमित शाह ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का बचाव करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने वार्ता की मेज पर भारतीय हितों को सर्वोच्च रखा है। उन्होंने कहा, “मोदी जी ने देश के किसानों, पशुपालक बहनों-भाइयों और मछुआरों को 100% प्रोटेक्शन देने का काम किया है। इस ट्रेड डील से हमारे ग्रामीण अर्थतंत्र को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि उन्हें वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी।”
गृह मंत्री ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मनमोहन सिंह की सरकार के समय ऐसे कई वैश्विक समझौते किए गए थे, जिनमें भारतीय किसानों के हितों को ‘बेच’ दिया गया था। शाह ने दावा किया कि मोदी सरकार ने उन ऐतिहासिक गलतियों को सुधारा है।
मछुआरों के हितों की बात: पुडुचेरी के लिए संदेश
पुडुचेरी जैसे तटीय क्षेत्र में रैली करते हुए शाह ने मछुआरों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष यह अफवाह फैला रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों से स्थानीय मछुआरों का बाजार छिन जाएगा, जबकि वास्तविकता यह है कि नई ट्रेड डील से भारतीय समुद्री उत्पादों (Seafood) के लिए अमेरिका और अन्य देशों के दरवाजे खुलेंगे, जिससे मछुआरों की आय में भारी वृद्धि होगी।
“राहुल गांधी देश के मछुआरों और किसानों को डराकर अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं, लेकिन मोदी जी ने उनके हितों के चारों ओर सुरक्षा की एक ऐसी दीवार खड़ी की है जिसे कोई भी वैश्विक समझौता भेद नहीं सकता।” > — अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
“2029 में भी मोदी सरकार”: भविष्य की सियासी भविष्यवाणी
लोकसभा चुनावों के भविष्य को लेकर अमित शाह ने कराईकल की धरती से एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि विपक्ष का गठबंधन चाहे जो भी कर ले, जनता ने अपना मन बना लिया है।
अमित शाह ने कहा, “मैं आज पुडुचेरी से एक बार फिर कहता हूं – 2029 में भी नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा-नीत एनडीए (NDA) की सरकार ही बनने वाली है। राहुल गांधी जी, आपकी बारी नहीं आने वाली है। देश विकास और सुरक्षा के साथ आगे बढ़ रहा है और जनता को मोदी जी की गारंटियों पर अटूट भरोसा है।”
एफटीए (FTA) की बारीकियों पर जोर
गृह मंत्री ने जनता और विशेषज्ञों से अपील की कि वे मुक्त व्यापार समझौतों के प्रावधानों को ध्यान से पढ़ें। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सुनिश्चित किया है कि संवेदनशील कृषि उत्पाद और डेयरी क्षेत्र को किसी भी प्रतिकूल प्रतिस्पर्धा से बचाया जाए।
अमित शाह द्वारा रेखांकित मुख्य बिंदु:
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स्वदेशी रक्षा: ट्रेड डील में भारतीय किसानों के उत्पादों को आयात शुल्क से सुरक्षा।
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वैश्विक पहुंच: भारतीय हस्तशिल्प, कृषि और समुद्री उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजारों में आसान राह।
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ऐतिहासिक तुलना: यूपीए काल के समझौतों और वर्तमान ‘इंडिया-फर्स्ट’ नीति के बीच का अंतर।
पुडुचेरी का विकास और एनडीए की रणनीति
अमित शाह के इस दौरे को पुडुचेरी में एनडीए सरकार की मजबूती और आगामी चुनावों की तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है। रैली में भारी भीड़ और शाह के आक्रामक तेवर बताते हैं कि भाजपा आने वाले समय में दक्षिण भारत और केंद्र शासित प्रदेशों में अपने ‘राष्ट्रवाद’ और ‘विकास’ के एजेंडे को और तेज करने वाली है।
क्या विपक्ष का ‘नैरेटिव’ होगा फेल?
अमित शाह ने अपने संबोधन से यह साफ कर दिया है कि भाजपा व्यापारिक समझौतों को ‘किसान विरोधी’ बताने वाले विपक्ष के नैरेटिव को हावी नहीं होने देगी। अब देखना यह होगा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी गृह मंत्री द्वारा उठाए गए इन तीखे सवालों और 2029 की चुनौती का क्या जवाब देती है।


