
देहरादून/हरिद्वार | उत्तराखंड की आतिथ्य परंपरा को वैश्विक पटल पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने और आगामी महाकुंभ 2027 के सफल आयोजन की नींव रखने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अपनी कमर कस ली है। आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग के सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने शनिवार को देहरादून से हरिद्वार तक सरकारी अतिथि गृहों का व्यापक औचक निरीक्षण किया। यह दौरा केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य की छवि को संवारने और अतिथियों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं सुनिश्चित करने की एक बड़ी मुहिम के रूप में देखा जा रहा है।
“अतिथि गृह राज्य की छवि का दर्पण” – सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार
निरीक्षण के दौरान सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट संदेश दिया कि राजकीय अतिथि गृह केवल ईंट-पत्थर के भवन नहीं हैं, बल्कि ये राज्य की संस्कृति और सत्कार परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि व्यवस्थाओं में लापरवाही और गुणवत्ता से समझौता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सचिव ने फायर सेफ्टी सिस्टम, किचन की स्वच्छता और रिनोवेशन कार्यों की बारीकी से जांच की।
बीजापुर गेस्ट हाउस: तीन चरणों में होगा ‘मेकओवर’
देहरादून के गढ़ी कैंट स्थित प्रतिष्ठित बीजापुर गेस्ट हाउस के निरीक्षण के दौरान सचिव ने इसके कायाकल्प के लिए तीन चरणों वाली कार्ययोजना (Three-Phase Plan) को हरी झंडी दी:
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प्रथम चरण: वीवीआईपी कक्षों का अपग्रेडेशन, पुराने फर्नीचर का प्रतिस्थापन और अत्याधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम की स्थापना।
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द्वितीय चरण: भवन की बालकनियों और कक्षों में आधुनिक प्रकाश व्यवस्था (Lighting) और समग्र सौंदर्यीकरण।
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तृतीय चरण: ड्रॉइंग रूम, गार्ड कक्ष और खुले प्रांगण की मरम्मत के साथ-साथ परिसर को ‘ग्रीन और क्लीन’ बनाने पर जोर।
सचिव ने निर्देशित किया कि बीजापुर गेस्ट हाउस को एक ‘आदर्श अतिथि गृह’ (Model Guest House) के रूप में विकसित किया जाए, जहाँ सुरक्षा और सुविधा का संगम हो।
ऑफिसर्स ट्रांजिट हॉस्टल: 2.95 करोड़ के बजट से सुविधाओं का विस्तार
देहरादून के रेसकोर्स स्थित ऑफिसर्स ट्रांजिट हॉस्टल में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भारी निवेश किया जा रहा है। सचिव की समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया कि हॉस्टल में लगभग 2 करोड़ 33 लाख रुपये के कार्य पहले से ही प्रगति पर हैं, जबकि 2 करोड़ 95 लाख रुपये की नई योजनाओं को गति दी गई है।
हॉस्टल में होने वाले मुख्य बदलाव:
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पुरानी लिफ्टों के स्थान पर नई आधुनिक लिफ्टों की स्थापना।
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9 नए डबल/सूट कक्षों का निर्माण।
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गैलरी में पीवीसी और मेटल फॉल्स सीलिंग का कार्य।
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सभी कक्षों में स्मार्ट इंटरकॉम सिस्टम और डेटा केबलिंग की सुविधा।
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छत पर टिन शेड निर्माण और शौचालयों का पूर्ण नवीनीकरण।
मिशन ‘कुंभ 2027’: हरिद्वार के अतिथि गृहों पर विशेष फोकस
आगामी कुंभ मेला 2027 के मद्देनजर हरिद्वार की व्यवस्थाएं सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। मायापुर स्थित अटल बिहारी वाजपेई राजकीय अतिथि गृह के निरीक्षण के दौरान सचिव ने भवन की जर्जर स्थिति पर नाराजगी जताई।
छत से पानी टपकने और दीवारों पर सीलन की समस्या को देखते हुए सचिव ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को तत्काल मरम्मत शुरू करने के आदेश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि अनुपयोगी और पुराने फर्नीचर की तत्काल नीलामी की जाए ताकि परिसर में जगह खाली हो और उसे सुव्यवस्थित किया जा सके। कुंभ के दौरान यहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिनिधि और विशिष्ट अतिथि रुकेंगे, जिसके लिए वीआईपी कक्षों और डाइनिंग हॉल को भव्य स्वरूप देने की योजना बनाई गई है।
“राज्य की आतिथ्य परंपरा को बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। कुंभ 2027 एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन है, इसलिए हरिद्वार और देहरादून के सभी अतिथि गृहों को समयबद्ध तरीके से उच्च मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।” > — डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव, आवास एवं राज्य संपत्ति विभाग
सुरक्षा मानकों और स्वच्छता पर ‘जीरो टॉलरेंस’
सचिव ने अपने दौरे में फायर सेफ्टी पर सबसे अधिक जोर दिया। उन्होंने कहा कि पुराने भवनों में बिजली की वायरिंग की ऑडिट कराई जाए ताकि शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं को रोका जा सके। किचन की सफाई और हाइजीन के लिए उन्होंने होटल इंडस्ट्री के मानकों को अपनाने के निर्देश दिए।
उपस्थित अधिकारी और विभाग का रुख
निरीक्षण के दौरान अपर सचिव राज्य संपत्ति लक्ष्मण सिंह, अधिशासी अभियंता दीपक कुमार, पंकज नयाल और उत्तराखंड पेयजल निगम व लोक निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से कार्यों की प्रगति की निगरानी करें और साप्ताहिक रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
उत्तराखंड की नई प्रशासनिक कार्यशैली
सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का यह औचक निरीक्षण राज्य सरकार की उस कार्यशैली को दर्शाता है जहाँ योजनाओं को केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर समय सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर है। कुंभ 2027 से पहले इन अतिथि गृहों का कायाकल्प न केवल सरकारी कामकाज को सुगम बनाएगा, बल्कि पर्यटन और आतिथ्य के क्षेत्र में उत्तराखंड की एक नई तस्वीर पेश करेगा।


