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उत्तराखंड निर्वाचन आयोग की बड़ी पहल: मतदाता सूची के ‘गहन पुनरीक्षण’ के लिए राजनैतिक दलों के साथ बड़ी बैठक

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी चुनावों की शुचिता और मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने अपनी कमर कस ली है। शुक्रवार को सचिवालय में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम की अध्यक्षता में राज्य के मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR), बीएलओ आउटरीच अभियान और बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की शत-प्रतिशत नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा।

बैठक में डॉ. पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक पारदर्शी और अद्यतन मतदाता सूची अनिवार्य है। उन्होंने राजनीतिक दलों से इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

BLO आउटरीच अभियान: 2003 की सूची से हो रही वर्तमान मतदाताओं की मैपिंग

बैठक के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन आयोग वर्तमान में पूरे प्रदेश में BLO आउटरीच अभियान चला रहा है। इस अभियान का उद्देश्य वर्ष 2003 की आधारभूत मतदाता सूची के साथ वर्तमान मतदाताओं का मिलान और उनकी सटीक मैपिंग करना है।

मैपिंग की वर्तमान स्थिति:

  • अब तक पूरे प्रदेश में 79 प्रतिशत मैपिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

  • मैदानी जिलों जैसे देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंह नगर और नैनीताल में जनसंख्या घनत्व अधिक होने के कारण यहाँ विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

  • CEO ने राजनीतिक दलों से अपील की कि इन चार जिलों में ‘बूथ लेवल एजेंट्स’ (BLA) के माध्यम से मैपिंग प्रक्रिया को गति प्रदान की जाए ताकि कोई भी पात्र मतदाता छूट न जाए।

बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की नियुक्ति: कुछ दलों की सुस्ती पर चिंता

निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की नियुक्ति एक अनिवार्य प्रक्रिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बैठक में दलों द्वारा अब तक की गई नियुक्तियों का डेटा साझा किया।

वर्तमान में प्रदेश के कुल 15,437 बूथों के सापेक्ष विभिन्न दलों की स्थिति इस प्रकार है:

राजनीतिक दल नियुक्त किए गए BLA की संख्या
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस 7,968
भारतीय जनता पार्टी (BJP) 7,165
सीपीएम (CPI-M) 187
बहुजन समाज पार्टी (BSP) 117
आम आदमी पार्टी (AAP) 0
नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) 0

डॉ. पुरुषोत्तम ने आम आदमी पार्टी (AAP) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) द्वारा अभी तक एक भी बीएलए नियुक्त न किए जाने पर ध्यानाकर्षण किया। उन्होंने सभी दलों को फरवरी माह के अंत तक शत-प्रतिशत बीएलए नियुक्ति करने का सख्त निर्देश दिया है, ताकि आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

तकनीकी सुधार और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)

आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य फर्जी मतदाताओं के नाम हटाना, शिफ्ट हो चुके मतदाताओं का पता लगाना और 18 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके नए युवाओं के नाम जोड़ना है। डॉ. पुरुषोत्तम ने कहा कि तकनीक के माध्यम से इस बार मतदाता सूची को इतना त्रुटिहीन बनाया जा रहा है कि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की गुंजाइश न रहे।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बीएलओ (Booth Level Officer) घर-घर जाकर डेटा का सत्यापन करें और राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि (BLA) उनके साथ समन्वय स्थापित करें ताकि जनता के बीच विश्वास का माहौल बना रहे।


बैठक में मौजूद प्रमुख चेहरे

सचिवालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रशासनिक और राजनैतिक जगत के कई वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए:

  • प्रशासनिक अधिकारी: अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास।

  • राजनैतिक प्रतिनिधि: भाजपा की ओर से राजकुमार पुरोहित एवं विरेंद्र वल्दिया, कांग्रेस से मनोज रावत एवं अमेंद्र बिष्ट, सीपीआई (एम) से अनंत आकाश और बसपा से सुरेंद्र जजारिया ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और आयोग के समक्ष अपने सुझाव रखे।

सुदृढ़ लोकतंत्र की दिशा में एक कदम

उत्तराखंड निर्वाचन आयोग की यह सक्रियता दर्शाती है कि राज्य में चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के नेतृत्व में जिस तरह से ‘बीएलओ आउटरीच’ और ‘डेटा मैपिंग’ का कार्य चल रहा है, उससे उम्मीद है कि आगामी चुनाव से पूर्व उत्तराखंड के पास देश की सबसे सटीक और पारदर्शी मतदाता सूचियों में से एक होगी।

राजनैतिक दलों के लिए अब चुनौती यह है कि वे फरवरी माह की समयसीमा के भीतर अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत कर बूथ स्तर तक अपने एजेंट तैनात करें, जिससे चुनावी प्रक्रिया में जन-सहभागिता को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

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