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उत्तराखंड में शहरी विकास की नई इबारत: सचिव आवास ने कसी कमर, ‘ईज एप’ और ‘लैंड पूलिंग’ से बदलेगी शहरों की सूरत

देहरादून: उत्तराखंड को आदर्श और सुव्यवस्थित राज्य बनाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विज़न को धरातल पर उतारने के लिए शासन ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। राज्य में सुनियोजित शहरी विकास, प्रशासनिक पारदर्शिता और अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों को एकीकृत करने के उद्देश्य से आवास विभाग ने एक निर्णायक कदम उठाया है। इसी कड़ी में, सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण (UHA) तथा उत्तराखंड आवास एवं विकास परिषद के कार्यों की सघन समीक्षा की और अधिकारियों को ‘जीरो टॉलरेंस’ के साथ समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

औचक निरीक्षण: कार्यप्रणाली और जवाबदेही की परख

समीक्षा बैठक से पूर्व, सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने राजधानी के डिस्पेन्सरी रोड स्थित राजीव गांधी बहुउद्देशीय कॉम्प्लेक्स का औचक निरीक्षण किया। इस परिसर में संचालित नगर नियोजन विभाग, रेरा (RERA) कार्यालय और विकास प्राधिकरणों के दफ्तरों की कार्यप्रणाली को उन्होंने बारीकी से परखा।

निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं की पहुंच और उनकी गति का आकलन करना था। डॉ. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि फाइलों का निस्तारण केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि जनमानस की संतुष्टि पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनसुविधाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जवाबदेही तय की जाएगी।

‘ईज एप’ का कायाकल्प: डिजिटल गवर्नेंस पर जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के डिजिटल उत्तराखंड के सपने को साकार करने के लिए ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली (Ease App) को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। सचिव आवास ने निर्देश दिए कि:

  • एकीकृत प्रणाली: प्रदेश के सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए।

  • यूजर फ्रेंडली इंटरफेस: एप को आगामी एक सप्ताह के भीतर इतना सरल बनाया जाए कि आम नागरिक बिना किसी तकनीकी विशेषज्ञ की मदद के मानचित्र आवेदन कर सकें।

  • एआई चैटबॉट: नागरिकों की शंकाओं के समाधान के लिए एप में एआई-आधारित चैटबॉट विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।

लैंड पूलिंग और टाउन प्लानिंग: भविष्य के शहरों का खाका

बढ़ते शहरीकरण के दबाव को देखते हुए डॉ. आर. राजेश कुमार ने लैंड पूलिंग स्कीम और टाउन प्लानिंग स्कीम को प्राथमिकता पर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अव्यवस्थित निर्माण को रोकने के लिए उन क्षेत्रों का तत्काल चिन्हीकरण किया जाए जहाँ ये योजनाएं लागू की जा सकती हैं। लैंड पूलिंग के माध्यम से न केवल बुनियादी ढांचा बेहतर होगा, बल्कि किसानों और भू-स्वामियों की भागीदारी भी सुनिश्चित होगी।

प्रधानमंत्री आवास योजना: ‘सिर पर छत’ का संकल्प

गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) की प्रगति पर सचिव आवास ने कड़ी नजर रखी। उन्होंने निर्देश दिए कि:

  1. सभी आवासीय परियोजनाएं अपनी निर्धारित डेडलाइन के भीतर पूरी होनी चाहिए।

  2. पात्र लाभार्थियों को बैंक ऋण प्राप्त करने में आ रही तकनीकी बाधाओं को दूर करने के लिए तत्काल बैंकर्स के साथ बैठक की जाए।

  3. निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए समय-समय पर स्थलीय निरीक्षण अनिवार्य किया जाए।

डिकंजेशन पॉलिसी और पार्किंग: ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति

उत्तराखंड के शहरों में यातायात का बढ़ता दबाव एक बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए सचिव आवास ने डिकंजेशन एंड रिडेवलपमेंट पॉलिसी को शीघ्र अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। इसके साथ ही, राज्य भर में चल रही पार्किंग परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि जो परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, उनका संचालन और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि सड़कों पर खड़े वाहनों की समस्या कम हो सके।

जीआईएस आधारित महायोजनाएं (GIS Master Plan)

आधुनिक तकनीक के उपयोग पर बल देते हुए डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि भविष्य की महायोजनाएं जीआईएस (Geographic Information System) आधारित होनी चाहिए। इसके सत्यापन के लिए ‘यूसेक’ (U-SAC) की मदद ली जाएगी, जिससे शहरी विस्तार का सटीक डेटा मिल सके और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं बनाई जा सकें।


सहस्त्रधारा रोड पर ‘आलयम’ का स्थलीय निरीक्षण

समीक्षा के पश्चात डॉ. आर. राजेश कुमार ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) की महत्वाकांक्षी ‘आलयम’ आवासीय योजना का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण स्थल पर कार्य की गति को बढ़ाने और आवासीय परिसर में आधारभूत सुविधाओं (जैसे पार्क, ड्रेनेज और बिजली) पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

सचिव आवास का संदेश: “मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में हम उत्तराखंड को शहरी विकास का एक नेशनल मॉडल बनाना चाहते हैं। हमारा लक्ष्य केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि एक ऐसी इको-सिस्टम तैयार करना है जो पारदर्शी, उत्तरदायी और भविष्य की जरूरतों के अनुकूल हो। तकनीकी नवाचार और समयबद्धता हमारी कार्यसंस्कृति का हिस्सा होंगे।”डॉ. आर. राजेश कुमार

बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक और निरीक्षण के दौरान संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह, वित्त नियंत्रक परवीन कौर, संयुक्त सचिव गौरव कुमार चटवाल, वरिष्ठ नगर नियोजक शालू थिन्ड सहित कई अधिशासी अभियंता और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।


विकसित उत्तराखंड की ओर कदम

आवास विभाग की यह सक्रियता दर्शाती है कि उत्तराखंड शासन अब परियोजनाओं को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने के लिए संकल्पित है। डॉ. आर. राजेश कुमार के नेतृत्व में उठाए गए ये कदम न केवल भ्रष्टाचार को कम करेंगे, बल्कि राज्य के नागरिकों को सुलभ और आधुनिक जीवनशैली प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होंगे।

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