
नई दिल्ली | भारत में डिजिटल क्रांति की रफ़्तार जितनी तेज़ हुई है, उतनी ही बड़ी चुनौती बनकर उभरा है ‘साइबर अपराध’। इस खतरे को भांपते हुए केंद्र सरकार ने अब ‘डिफेंसिव’ के बजाय ‘ऑफेंसिव’ मोड अपना लिया है। दिल्ली में आयोजित सीबीआई (CBI) के राष्ट्रीय सम्मेलन “Tackling Cyber-Enabled Frauds & Dismantling the Ecosystem” को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट संदेश दिया कि साइबर सुरक्षा अब केवल वित्तीय नुकसान का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
1. CBI की नई साइबर क्राइम ब्रांच: ठगों के खिलाफ ‘डिजिटल स्ट्राइक’
सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव CBI की नई Cyber Crime Branch का औपचारिक शुभारंभ रहा। यह विशेष विंग अब साधारण जांच से इतर, जटिल अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय ऑनलाइन फ्रॉड के नेटवर्क को ध्वस्त करने का काम करेगी।
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फोकस: डिजिटल मनी-ट्रेल की ट्रैकिंग और फॉरेंसिक टूल्स का उपयोग।
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संसाधन: इसके साथ ही S4C (State Support to States) डैशबोर्ड लॉन्च किया गया है, जो राज्यों को रियल-टाइम डेटा और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
2. डिजिटल इंडिया का उदय और सुरक्षा की नई चुनौतियां
अमित शाह ने पिछले 11 वर्षों में आए डिजिटल बदलाव का खाका पेश करते हुए बताया कि 2014 में देश में मात्र 25 करोड़ इंटरनेट यूजर थे, जो आज 100 करोड़ के जादुई आंकड़े को पार कर गए हैं। डेटा की कीमतों में 97% की भारी गिरावट और ‘भारतनेट’ के माध्यम से गांवों तक पहुंची कनेक्टिविटी ने नागरिकों को सशक्त तो बनाया है, लेकिन साथ ही साइबर अपराधियों को नए शिकार भी दिए हैं।
गृह मंत्री ने आंकड़ों के जरिए बताया कि भारत आज वैश्विक डिजिटल भुगतान का सिरमौर है। साल 2024 में 181 बिलियन ट्रांजेक्शन हुए, जिसका मूल्य ₹233 ट्रिलियन है। उन्होंने जोर देकर कहा, “दुनिया का हर दूसरा डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहा है, इसलिए हमारी सुरक्षा व्यवस्था भी दुनिया में सबसे अभेद्य होनी चाहिए।”
3. हर 37 सेकंड में एक शिकार: ₹20,000 करोड़ की ठगी का कड़वा सच
साइबर अपराध की गंभीरता को समझाते हुए गृह मंत्री ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए। भारत में औसतन हर 37 सेकंड में एक व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो रहा है। अब तक ठगों ने देशवासियों की मेहनत के करीब ₹20,000 करोड़ पर डाका डाला है।
हालांकि, सरकारी मुस्तैदी का परिणाम यह रहा कि विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से ₹8,189 करोड़ को या तो फ्रीज कर लिया गया या पीड़ितों को वापस दिलाया गया। अमित शाह ने कहा कि हमारी जीत तभी होगी जब रिकवरी रेट 100% की ओर बढ़ेगा।
4. ‘म्यूल अकाउंट’ पर प्रहार: ठगी की जड़ पर वार
साइबर अपराध के इकोसिस्टम में सबसे बड़ी बाधा ‘म्यूल अकाउंट्स’ (वे खाते जिनमें ठगी का पैसा घुमाया जाता है) हैं। अमित शाह ने इस पर सीधा प्रहार करते हुए ‘Mule Account Hunter’ सॉफ्टवेयर को गेम-चेंजर बताया। उन्होंने सभी बैंकिंग संस्थानों को निर्देश दिया कि वे इस तकनीक को तुरंत अपनाएं।
“जब तक हम म्यूल अकाउंट्स के नेटवर्क को नहीं तोड़ेंगे, तब तक ठगी के पैसे की ट्रेल को रोकना असंभव होगा।” – अमित शाह
5. 1930 हेल्पलाइन: ‘स्पीड’ ही है बचाव का मंत्र
गृह मंत्री ने 1930 साइबर हेल्पलाइन की समीक्षा करते हुए ‘स्पीड ऑफ रिस्पॉन्स’ (प्रतिक्रिया की गति) पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ठगी के शुरुआती 10-15 मिनट ‘गोल्डन आवर्स’ होते हैं। यदि पीड़ित का कॉल तुरंत अटेंड हो जाए और बैंक पोर्टल पर जानकारी दर्ज हो जाए, तो पैसा अपराधी के हाथ लगने से पहले ही ब्लॉक किया जा सकता है।
6. संदिग्ध SIM और IMEI पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई
सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अब तक की गई कार्रवाई के आंकड़े भी पेश किए गए:
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12 लाख+ संदिग्ध SIM कार्ड रद्द किए गए।
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3 लाख मोबाइल फोन के IMEI ब्लॉक किए गए।
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20,853 साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई।
7. I4C: 2026 तक का लक्ष्य और संस्थागत ढांचा
Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) अब देश का केंद्रीय साइबर सुरक्षा स्तंभ बन गया है। शाह ने लक्ष्य रखा कि दिसंबर 2026 तक देश के सभी छोटे-बड़े बैंक, फिनटेक कंपनियां और NBFC इस प्लेटफॉर्म से पूरी तरह एकीकृत हो जाएं। इससे अपराधियों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा शेयरिंग आसान होगी।
एक साझी लड़ाई का आह्वान
अमित शाह के संबोधन का लब्बोलुआब यह था कि साइबर सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। यह सरकार, बैंक, टेक कंपनियों और जागरूक नागरिकों की एक साझी लड़ाई है। गृह मंत्री ने चार स्तंभों वाला रोडमैप दिया:
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मजबूत संस्थागत ढांचा (New Institutional Frame)
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न्यूनतम प्रतिक्रिया समय (Fast Response)
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित इंटेलिजेंस (Data-Driven Intelligence)
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सख्त कानूनी प्रवर्तन (Strict Enforcement)
भारत अब न केवल डिजिटल लेन-देन में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, बल्कि वह साइबर अपराधियों के लिए अपने दरवाज़े पूरी तरह बंद करने की दिशा में भी तेज़ी से बढ़ रहा है।



